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चैती मेला भव्य एवं दर्शनार्थियों के लिए सुविधायुक्त लगेगा: डीएम खैरवाल
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काशीपुर में डीएम डॉ. नीरज खैरवाल ने विधायक हरभजन सिंह चीमा सहित दर्जनों अधिकारियों के साथ चैती मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने समय की कमी को देखते हुए मेला मजिस्ट्रेट हिमांशु खुराना को जल्द मेला क्षेत्र का समतलीकरण और सौंदर्यीकरण के निर्देश दिए हैं।
शुक्रवार को डीएम ने विधायक हरभजन सिंह चीमा, एसडीएम जसपुर दयानंद सरस्वती, संयुक्त मजिस्ट्रेट हिमांशु खुराना, एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र, लोनिवि के ईई यूसी बहुगुणा, तहसीलदार संजय कुमार, एआरटीओ अनीता चंद सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया। विधायक ने कहा कि मां भगवती बाल सुंदरी का डोला शोभा यात्रा के साथ द्रोणसागर से गौविषाण टीले के किनारे-किनारे होकर चैती मंदिर तक आता है। इसमें क्षतिग्रस्त सड़क बनाने, मेले में शौचालयों, पेयजल, बिजली की व्यवस्था करने का सुुझाव दिया। डीएम ने दुर्घटना को रोकने के लिए मेला के बीचों बीच से गुजरने वाली सड़क के काफी दूरी पर दुकानें लगाने के निर्देश दिए। मेला लगाने से पहले उसका नक्शा तैयार किया जाएगा। जनता की सुविधा के लिए पानी, बिजली, शौचालयों, वाहन स्टैंड बनाना, लोगों के विश्राम गृह की व्यवस्था भी की जाएगी। बुक्सा जनजाति के लोगों के विश्राम के लिए अलग से क्षेत्र आरक्षित किया जाएगा। तैयारियों की जिम्मेदारी अलग अलग विभागों को सौंपी गई है। बताया कि मेले का आयोजन पहले पंडा परिवार करता था लेकिन पंडाओं के आपसी विवाद के चलते बीते वर्ष से प्रशासन मेला लगा रहा है।
शुक्रवार को डीएम ने विधायक हरभजन सिंह चीमा, एसडीएम जसपुर दयानंद सरस्वती, संयुक्त मजिस्ट्रेट हिमांशु खुराना, एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र, लोनिवि के ईई यूसी बहुगुणा, तहसीलदार संजय कुमार, एआरटीओ अनीता चंद सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ मेला क्षेत्र का निरीक्षण किया। विधायक ने कहा कि मां भगवती बाल सुंदरी का डोला शोभा यात्रा के साथ द्रोणसागर से गौविषाण टीले के किनारे-किनारे होकर चैती मंदिर तक आता है। इसमें क्षतिग्रस्त सड़क बनाने, मेले में शौचालयों, पेयजल, बिजली की व्यवस्था करने का सुुझाव दिया। डीएम ने दुर्घटना को रोकने के लिए मेला के बीचों बीच से गुजरने वाली सड़क के काफी दूरी पर दुकानें लगाने के निर्देश दिए। मेला लगाने से पहले उसका नक्शा तैयार किया जाएगा। जनता की सुविधा के लिए पानी, बिजली, शौचालयों, वाहन स्टैंड बनाना, लोगों के विश्राम गृह की व्यवस्था भी की जाएगी। बुक्सा जनजाति के लोगों के विश्राम के लिए अलग से क्षेत्र आरक्षित किया जाएगा। तैयारियों की जिम्मेदारी अलग अलग विभागों को सौंपी गई है। बताया कि मेले का आयोजन पहले पंडा परिवार करता था लेकिन पंडाओं के आपसी विवाद के चलते बीते वर्ष से प्रशासन मेला लगा रहा है।
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