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तराई में आठ माह में 64 मरीज एचआईवी पॉजीटिव
कीर्तिराज रुमाल, रुद्रपुर
Updated Fri, 01 Dec 2017 12:09 AM IST
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ऊधम सिंह नगर जिले में औद्योगिकीकरण के साथ ही एड्स भी तेजी से पैर पसार रहा है। पिछले 14 सालों में जिले में 709 लोग एचआईवी पॉजीटिव पाए गए हैं। पिछले साल की तुलना में मरीजों की संख्या घटी तो है, मगर जानकारी के अभाव में एचआईवी पॉजीटिव संक्रमितों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2003 में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया था। पहले साल जिले में सिर्फ दो पुरुषों में एचआईवी की पुष्टि हुई थी। अगले साल आठ लोग एचआईवी पॉजीटिव मिले थे। इसके बाद लगातार एड्स रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जानकार कहते हैं कि जिले के औद्योगिकीकरण के चलते बाहरी लोगों के यहां आने से रोग तेजी से पैर पसार रहा है।
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वर्ष 2013 में 92 लोगों में एचआईवी की पुष्टि हुई थी। वर्ष 2014 में यह संख्या 78 पहुंची थी और वर्ष 2015 में यह 66 हो गई थी। वर्ष 2016 में 81 लोग एचआईवी पॉजीटिव पाए गए थे। इस वर्ष नवंबर तक 64 लोग पॉजीटिव पाए गए हैं। इनमें 38 पुरुष व 26 महिलाएं शामिल हैं। एचआईवी पॉजीटिव लोगों ने अधिकांश ट्रक चालक, मलिन बस्तियों में रहने वाले और नशे के शिकार लोग शामिल हैं। एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. अविनाश खन्ना कहते हैं कि पिछले कुछ वर्षों से एड्स रोगियों की संख्या घट रही है।
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इंजेक्शन से मिली 68 को बीमारी
नशे से इंजेक्शन का साझा प्रयोग भी लोगों को एचआईवी पॉजीटिव बना रहा है। बीते चार सालों में ही नशे के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाले 68 नशेड़ियों में एचआईवी पॉजीटिव की पुष्टि हो चुुकी है। इस साल चार नशेड़ी एचआईवी पॉजीटिव पाए गए हैं। इनमें ज्यादातर लोग मलिन बस्तियों में रहने वाले हैं। ओएसटी काउंसलर श्वेता दीक्षित बताती हैं कि एचआईवी ग्रसित व्यक्ति के साथ जब अन्य लोग सुई का साझा इस्तेमाल नशे के लिए करते हैं तो वे एचआईवी संक्रमित हो जाते हैं। ऐसे लोग जब बिना सावधानी बरते किसी महिला के संपर्क में आते हैं तो उसे भी एचआईवी होने का खतरा हो जाता है।
दो साल में छह गर्भवती एचआईवी पॉजीटिव
रुद्रपुर में दो सालों में ही छह गर्भवती महिलाएं एचआईवी पॉजीटिव पाई गई हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में रुद्रपुर में 26 पुरुष और आठ महिलाएं एचआईवी पॉजीटिव पाई गई थी। इस बार नवंबर तक जांच में 25 पुरुष और छह महिलाएं पॉजीटिव पाई गई हैं।
मलिन बस्तियों में जागरुकता कार्यक्रमों का अभाव
एचआईवी पॉजीटिव के अधिकांश मामले मलिन बस्तियों के लोगों से जुड़े होते हैं। लेकिन सरकारी स्तर पर एड्स दिवस पर जागरूकता रैली और गोष्ठियों से इतिश्री कर ली जाती है। उन जगहों पर जागरूकता कार्यक्रम नहीं होते हैं, जहां इसकी असल जरूरत होती है। नशेड़ियों के साथ ही ट्रक चालक भी एचआईवी पॉजीटिव होते हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में वे भी खतरनाक बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।