दून के इस पर्यटन स्थल में विहंगम नजारे पर गर्दिश में हैं सितारे

सुनील तोमर, मनीष त्रिपाठी/ अमर उजाला, नागथात-विकासनगर Updated Tue, 26 Apr 2016 04:28 PM IST
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खूबसूरत वादियां, झरने, कल-कल करतीं नदियां, देवदार के घने जंगल और अंत: करण तक आनंद की अनुभूति देने वाली हिमाच्छादित चोटियां। क्या कुछ नहीं है नागथात में।
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पहाड़ की जिस कल्पना को मन में बसाकर पर्यटक उत्तराखंड आते हैं, वह सब कुछ है यहां। फिर भी  यहां की खामोशियां हैं कि टूटती ही नहीं हैं। यह दुर्भाग्य ही है कि अपने आंचल में नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य समेटे यह क्षेत्र आज तक पर्यटन के नक्शे पर उभर नहीं पाया है।
सरकारी उदासीनता के चलते यहां पर न तो पर्यटकों के रुकने की कोई व्यवस्था है, न ही पहुंचने के लिए कोई साधन। क्षेत्रवासी भी रोज दुश्वारियों से दो-चार होते हैं। लेकिन, सरकारी स्तर पर प्रयास किए जाएं तो नि:संदेह इस क्षेत्र को समृद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।
कुछ ऐसा है मौसम
पहाड़ियों से घिरे नागथात में बारह महीने ठंडा ही रहता है। हालांकि, गर्मियों में यहां हाफ स्वेटर में भी काम चल जाता है। दिसंबर से फरवरी के बीच यहां पर हिमपात भी होता है। खास बात यह है कि यहां कब मौसम बदल जाए कहा नहीं जा सकता।

विकसित हो सकते है साहसिक खेल
नागथात की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से यहां पर क्याकिंग, रिवर क्रॉसिंग, जुमारिंग, रॉक क्लाइबिंग, हाकिंग जैसे खेल शुरू किए जा सकते हैं।

ऐसे पहुंचे नागथात
देहरादून से 78 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नागथात तक पहुंचने के लिए वाया विकासनगर होकर पहुंचा जा सकता है। यातायात सुविधाएं न होने की वजह से बेहतर होगा कि आप टैक्सी में ही यहां पहुंचें।

ये हैं नागथात पर्यटन स्थल
नागथात के आसपास भी कई ऐसी जगह हैं जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती हैं। इनमें बैराटखाई, बिसोई और लक्सियार स्थित महासू देवता मंदिर, रेनबो फॉल का नाम शामिल किया जा सकता है।

पर्यटन बढ़ने से रुक सकता है पलायन
जौनसार-बावर के ज्यादातर गांव पलायन का दंश झेल रहे हैं। भौगोलिक दुश्वारियों और सरकार की उपेक्षा के कारण क्षेत्र में पलायन नासूर बनता जा रहा है। कई गांव तो निर्जन होने की कगार पर आ गए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता इंदर सिंह नेगी का कहना है कि यदि यहां पर पर्यटकों के रुकने को होटल आदि खोले जाएं और मूलभूत सुविधाएं जुटाई जाएं तो यह स्थल समृद्ध पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के साधन भी जुटेंगे और पलायन भी रुकेगा।

सरकारी की मंशा नागथात को पर्यटन विलेज के रूप में विकसित करने की है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। बजट स्वीकृत होते ही नागथात में मूलभूत सुविधाएं जुटाई जाएंगी।
- वाईएस गंगवार, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी
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