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भगवान शिव की नगरी का अस्तित्व खतरे में
रविंद्र थलवाल
Updated Sat, 27 Jul 2013 08:12 AM IST
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वर्षों से आपदा का कहर झेल रही भगवान विश्वनाथ की धरती उत्तरकाशी का अस्तित्व खतरे की जद में हैं। बाढ़ से नदी का तल ऊंचा होने से यहां आबादी क्षेत्र में कभी भी पानी घुस सकता है।
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बावजूद इसके प्रशासन द्वारा नगर को सुरक्षित करने के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जबकि नगर के लोग नदी के दोनों ओर प्रशासन से लगातार आरसीसी की दीवार लगाने की मांग कर रहे हैं।
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उत्तरकाशी नगर सहित आसपास के क्षेत्रों के लोग वर्षा से आपदा का कहर झेल रहे हैं। राज्य गठन के बाद वर्ष 2003 में वरुणावत भूस्खलन ने उत्तरकाशी में भारी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद अगस्त 2012 की बाढ़ में भी भारी नुकसान हुआ। 2003 में उत्तरकाशी को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने 250 करोड़ का पैकेज दिया तथा वर्ष 2012 में करोड़ों रुपये बाढ़ सुरक्षा के नाम खर्च किए गए। इसके बावजूद उत्तरकाशी नगर सुरक्षित नहीं हो पाया।
नदी का तल ऊंचा हो गया है
इस बार भी 16-17 जून की बाढ़ ने फिर तबाही मचाई। उत्तरकाशी कैसे सुरक्षित रहेगी इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। बाढ़ में आए मलबे से नदी का तल ऊंचा हो गया है। इस वजह से नगर के किसी भी हिस्से से आबादी क्षेत्र में पानी घुस कर तबाही मचा सकता है।
जोशियाड़ा व ज्ञानसू वाले हिस्से में भी कटाव जारी है। लेकिन नगर को सुरक्षित करने का प्रयास करना तो दूर कोई योजना तक नहीं बन पाई। ऐसे में उत्तरकाशी में कभी तबाही मच सकती है।
बरसात में सुरक्षा कार्य संभव नहीं है। फिर भी जिस क्षेत्र को अधिक खतरा है, वहां पर वायरक्रेट डालने सहित अन्य कार्य किए जा रहे हैं। नगर को सुरक्षित करने के लिए ठोस योजना बनाई जाएगी।
- डा. पंकज कुमार पांडेय, डीएम उत्तरकाशी
प्रशासन से उत्तरकाशी नगर व जोशियाड़ा क्षेत्र को सुरक्षित करने के लिए गुहार-गुहार लगाते थक गए हैं। दो बार कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर चुके हैं, लेकिन अभी तक सुरक्षा कार्य शुरू नहीं हो पाए। प्रशासन को नदी के दोनों ओर आरसीसीसी की दीवार लगानी चाहिए।
- विजेंद्र नौटियाल, बाढ़ प्रभावित जोशियाड़ा
सुरक्षा कार्य बरसात के बाद शुरू हो पाएगा। अगले हफ्ते विभागीय उच्चाधिकारी उत्तरकाशी पहुंचेंगे। इसके बाद प्लान तैयार किया जाएगा। आरसीसी दीवार के लिए प्रदेश स्तर पर बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए गठित तकनीकी सलाहकार समिति सहमत नहीं होती है।
- चंद्रशेखर सिंह, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग
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