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बाढ़ और भूस्खलन से निपटने के लिए टीएचडीसी ने की तैयारियां
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टीएचडीसी इंडिया लि. ने मानसून सत्र में परियोजना स्तर पर आपातकालीन कार्ययोजना बनाई गई है। यदि मानसून सत्र में बारिश की वजह से टिहरी झील में अधिक जलभराव होता है या झील के कारण आसपास के क्षेत्र में भूस्खलन होता है, तो उससे निपटने के लिए अपने विभिन्न विभागों को आपसी समन्वय स्थापित कर समस्या से तत्काल निपटने के निर्देश दिए हैं।
टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक यूके सक्सेना ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से पूर्वाभ्यास (माक ड्रिल) भी किया जा रहा है। स्पिल-वे गेट, आईएलओ को देख लिया है, जिससे बरसात एवं फ्लड आने की स्थिति में पानी की निकासी हो सके। उत्तरकाशी, घनसाली, टिहरी बांध नियंत्रण कक्ष पर मानसून सत्र के दौरान 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिससे पानी के जल प्रवाह एवं जलाशय के जलस्तर की जानकारी नियमित रूप से उच्च अधिकारियों, प्रशासन, आपदा प्रबंधन को मिलती रहे। साथ ही बाढ़ नियंत्रण में लगे सभी कर्मचारियों के सैटेलाइट फोन भी मुहैया कराए गए हैं, जबकि टीएचडीसी के सुरक्षा विभाग ने झील के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया है। ऊर्जा निगम ने पावर बैकअप के लिए डीजी सेट तैयार किए हैं। हर स्थिति पर जियोलॉजी, जियो टेक्निकल विंग पर नजर रखी हुई है। बाढ़ की स्थिति में स्पिल-वे से पानी छोड़े जाने पर कोटेश्वर बांध से हरिद्वार तक सात विभिन्न स्थानों पर पूर्व चेतावनी प्रणाली लगाई है।
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टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक यूके सक्सेना ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से पूर्वाभ्यास (माक ड्रिल) भी किया जा रहा है। स्पिल-वे गेट, आईएलओ को देख लिया है, जिससे बरसात एवं फ्लड आने की स्थिति में पानी की निकासी हो सके। उत्तरकाशी, घनसाली, टिहरी बांध नियंत्रण कक्ष पर मानसून सत्र के दौरान 24 घंटे कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिससे पानी के जल प्रवाह एवं जलाशय के जलस्तर की जानकारी नियमित रूप से उच्च अधिकारियों, प्रशासन, आपदा प्रबंधन को मिलती रहे। साथ ही बाढ़ नियंत्रण में लगे सभी कर्मचारियों के सैटेलाइट फोन भी मुहैया कराए गए हैं, जबकि टीएचडीसी के सुरक्षा विभाग ने झील के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क किया है। ऊर्जा निगम ने पावर बैकअप के लिए डीजी सेट तैयार किए हैं। हर स्थिति पर जियोलॉजी, जियो टेक्निकल विंग पर नजर रखी हुई है। बाढ़ की स्थिति में स्पिल-वे से पानी छोड़े जाने पर कोटेश्वर बांध से हरिद्वार तक सात विभिन्न स्थानों पर पूर्व चेतावनी प्रणाली लगाई है।
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