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भवन निर्माण को नहीं मिली दूसरी किश्त
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राजकीय इंटर कालेज गरवाणगांव का भवन निर्माण बजट के अभाव में पिछले चार साल से अधर में लटका है। भवन को बनाने के लिए सरकार ने एक करोड़ 12 लाख मंजूर किए थे, लेकिन अभी तक सिर्फ 58 लाख ही स्वीकृत हो पाए हैं। ऐसे में नवनिर्मित भवन में दरवाजे, खिड़कियां, फर्श आदि कार्य अधूरे पड़े हैं।
प्रतापनगर ब्लॉक के राजकीय इंटर कालेज गरवाणगांव का पुराना भवन जर्जर हो चुका है। नए भवन निर्माण के लिए वर्ष 2016 में एक करोड़ 12 लाख मंजूर हुए। इसकी पहली किश्त 58 लाख रुपये भी मिले। कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम को वर्ष 2017 में भवन निर्माण पूरा करके देना था। लेकिन चार साल बाद भी भवन निर्माण पूरा नहीं हो सका है। वर्तमान में निर्माण के नाम पर अवमुक्त हुई धनराशि से केवल दो मंजिला भवन के कॉलम और छत ही पड़ी है। दूसरी किश्त 54 लाख रुपये जारी न होने से भवन निर्माण अधूरा पड़ा है। यहां 360 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं।
प्रभारी प्रधानाचार्य बलवीर सिंह चौहान का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन की ओर से कई बार उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को लिखित में पत्र भेजकर भवन निर्माण पूरा करने का अनुरोध किया जा चुका है। किसी ने सुध लेना मुनासिब नहीं समझा।
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जीआईसी गरवाणगांव के भवन निर्माण को शासन से दूसरी किश्त नहीं मिल पाई है, जिसके चलते निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। शासन को फिर से बजट की डिमांड भेजी गई है। उम्मीद है कि अगले माह तक शेष धनराशि मिल जाएगी। - नवनीत कटारिया, प्रबंधक पेयजल निर्माण निगम चंबा।
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प्रतापनगर ब्लॉक के राजकीय इंटर कालेज गरवाणगांव का पुराना भवन जर्जर हो चुका है। नए भवन निर्माण के लिए वर्ष 2016 में एक करोड़ 12 लाख मंजूर हुए। इसकी पहली किश्त 58 लाख रुपये भी मिले। कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम को वर्ष 2017 में भवन निर्माण पूरा करके देना था। लेकिन चार साल बाद भी भवन निर्माण पूरा नहीं हो सका है। वर्तमान में निर्माण के नाम पर अवमुक्त हुई धनराशि से केवल दो मंजिला भवन के कॉलम और छत ही पड़ी है। दूसरी किश्त 54 लाख रुपये जारी न होने से भवन निर्माण अधूरा पड़ा है। यहां 360 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं।
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प्रभारी प्रधानाचार्य बलवीर सिंह चौहान का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन की ओर से कई बार उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को लिखित में पत्र भेजकर भवन निर्माण पूरा करने का अनुरोध किया जा चुका है। किसी ने सुध लेना मुनासिब नहीं समझा।
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जीआईसी गरवाणगांव के भवन निर्माण को शासन से दूसरी किश्त नहीं मिल पाई है, जिसके चलते निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। शासन को फिर से बजट की डिमांड भेजी गई है। उम्मीद है कि अगले माह तक शेष धनराशि मिल जाएगी। - नवनीत कटारिया, प्रबंधक पेयजल निर्माण निगम चंबा।