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Tehri News: गड्ढों और मलबे से संकरी हुई छह गांवों की सड़क
Sun, 20 Sep 2026 06:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sun, 20 Sep 2026 06:40 PM IST
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कंडीसौड़ (टिहरी)। थौलधार ब्लॉक के छह राजस्व गांवों को यातायात सुविधा से जोड़ने वाली रमोल गांव-कस्तल सड़क सुविधा के बजाय ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनी हुई है। नौ किमी लंबी इस सड़क का 14 साल बाद भी डामरीकरण नहीं हो पाया है। सड़क पर हर दो कदम पर गड्ढे बने हुए है। नालियां क्षतिग्रस्त है और सुरक्षा दीवारें टूटी हुई है। लोगों को आवाजाही में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
रमोल गांव, नौगांव, कस्तल, लावणी, मजकोट व सेनसारी गांवों को जोड़ने वाली इस सड़क से करीब छह हजार की आबादी जुड़ी है। वर्ष 2012 में सड़क बनने के बाद डामरीकरण नहीं हुआ। बारिश से सड़क किनारे जगह-जगह मलबा गिरने से मार्ग संकरा बना हुआ है। जिससे वाहन चालकों को आवागमन करने में दिक्कतें आ रही है।
कस्तल के प्रधान सुंदरलाल भट्ट ने कहा कि 14 साल बाद भी सड़क का डामरीकरण नहीं हो पाया है। जगह-जगह सुरक्षा दीवारें टूट चुकी हैं और पानी की निकासी के लिए नालियां भी नहीं हैं। नौगांव की प्रधान अशरफी चौहान ने बताया कि छह किमी सड़क लोनिवि चंबा और तीन किमी पीएमजीएसवाई के अधीन है। सड़क की हालत इतनी खराब है कि बरसात में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। डामरीकरण और मरम्मत के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए। बीडीसी बैठक में भी समस्या उठाई गई, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर होना पड़ा रहा है।
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रमोल गांव-कस्तल सड़क के डामरीकरण और सुधारीकरण के लिए 1.60 करोड़ का इस्टीमेट शासन को पूर्व में भेजा गया था। शासन से स्वीकृति नहीं मिल पाई।
-अमित रूसिया, सहायक अभियंता लोनिवि चंबा
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रमोल गांव, नौगांव, कस्तल, लावणी, मजकोट व सेनसारी गांवों को जोड़ने वाली इस सड़क से करीब छह हजार की आबादी जुड़ी है। वर्ष 2012 में सड़क बनने के बाद डामरीकरण नहीं हुआ। बारिश से सड़क किनारे जगह-जगह मलबा गिरने से मार्ग संकरा बना हुआ है। जिससे वाहन चालकों को आवागमन करने में दिक्कतें आ रही है।
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कस्तल के प्रधान सुंदरलाल भट्ट ने कहा कि 14 साल बाद भी सड़क का डामरीकरण नहीं हो पाया है। जगह-जगह सुरक्षा दीवारें टूट चुकी हैं और पानी की निकासी के लिए नालियां भी नहीं हैं। नौगांव की प्रधान अशरफी चौहान ने बताया कि छह किमी सड़क लोनिवि चंबा और तीन किमी पीएमजीएसवाई के अधीन है। सड़क की हालत इतनी खराब है कि बरसात में पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। डामरीकरण और मरम्मत के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए। बीडीसी बैठक में भी समस्या उठाई गई, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर होना पड़ा रहा है।
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रमोल गांव-कस्तल सड़क के डामरीकरण और सुधारीकरण के लिए 1.60 करोड़ का इस्टीमेट शासन को पूर्व में भेजा गया था। शासन से स्वीकृति नहीं मिल पाई।
-अमित रूसिया, सहायक अभियंता लोनिवि चंबा