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खाली होते गांव की चुनौति से निपटने की गवाह बनी कोटी

Sun, 03 Nov 2019 08:30 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 03 Nov 2019 08:30 PM IST
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Koti became witness to the challenge of the emptying village
पहाड़ से खाली होते गांवों की चुनौति से निपटने के लिए टिहरी झील शानदार आयोजन की गवाह बनी। इतिहास में पहली बार झील के किनारे कोटीकालोनी में प्रदेश के प्रवासी हस्तियों ने गांव की संस्कृति, सभ्यता और जड़ों से जुड़ने के लिए एक मंच पर सुझाव साझा किए। उम्मीद की जा रही है कि रैबार-2 आवा अपणु घौर कार्यक्रम के सुझावों पर अमल कर पलायन पर अंकुश लगाने की दिशा में समेकित विकास की योजना तैयार कर नई इबारत लिखी जा सकेगी।
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उत्तराखंड राज्य हिमालय की तलहटी में बसा पर्वतीय भूभाग है, जो अपने भीतर प्रकृति के अकूत खजाने को संजोए हुए है। ऐतिहासिक आंदोलन के गर्भ से पैदा हुआ यह राज्य आगामी 9 नवंबर को 20 साल के किशोर अवस्था की दहलीज में पहुंच रहा है, लेकिन अफसोस यह है कि पहाड़ से मैदान की ओर बढ़ता पलायन सुरसा के मुंह की तरह नासूर बनता जा रहा है। ऐसे हालातों में राज्य के स्थापना दिवस के बहाने सूबे को पर्यटन, तीर्थाटन, बागवानी, औद्योगिक और आयुष राज्य बनाने के सपने को पंख लगाने के लिए प्रवासी नामचीन हस्तियां कोटी कालोनी में रैबार -2 कार्यक्रम में जुटी। इसके लिए पहाड़ की मिट्टी से जुड़े यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और सेना प्रमुख बिपिन रावत सहित कई हस्तियों ने पहाड़ के समेकित विकास और पलायन रोकने के लिए अपने फार्मूले प्रस्तुत किए। रैबार कार्यक्रम में पलायन रोकने के लिए सभी लोगों से अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। ी दिशा में क्या कुछ नया हो पाता है।
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