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टूटी नहरों के कारण सिंचाई पर संकट
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वर्ष 2013 की आपदा में क्षतिग्रस्त भिलंगना और जाखणीधार की नहरों के निर्माण के लिए बजट नहीं मिल पाया है, जिसके कारण किसानों को सिंचाई के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि आठ वर्ष से किसान क्षतिग्रस्त नहरों से जोड़तोड़ कर सिंचाई करने के लिए मजबूर हैं।
भिलंगना ब्लॉक कृषि के लिए प्रसिद्ध है। यहां बालगंगा और भिलंगना घाटी में धान, प्याज, लहसुन, आलू, अदरक से लेकर बेमौसमी सब्जियों की किसान अच्छी पैदावार कर आजीविका संवर्द्धन करते हैं, लेकिन 2013 की आपदा में दोनों घाटी की एक दर्जन से अधिक छोटी बड़ी नहरें क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिसके चलते किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। सेंदुल, चाकरू का सेरा समेत कई स्थानों पर किसान बारिश पर निर्भर रहकर खेती करते हैं, जबकि कई जगह सिंचाई के अभाव में भूमि असिंचित हो गई है। जाखणीधार ब्लॉक के ढुंगमंदार क्षेत्र की भी आधा दर्जन नहरें क्षतिग्रस्त बनी है। सिंचाई विभाग ने वर्ष 2019 में भिलंगना की नहरों के सुदृढ़ीकरण के लिए दो करोड़ 99 लाख, नैलचामी की नहरों के पुनर्निर्माण के लिए दो करोड़ 51 लाख 93 हजार और जाखणीधार, भिलंगना की पर्वतीय नहरों के पुनरोद्धार के लिए तीन करोड़ 12 लाख की डीपीआर शासन को भेजी थी, लेकिन दो साल में भी सिंचाई नहरों के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए बजट नहीं मिल पाया है। ऐसे में नहरों का पुनर्निर्माण नहीं हुआ है। नहरों की मरम्मत न होने के कारण कृषि के जरिए किसानों की आय दोगुना करने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। नहरों की मरम्मत के अभाव पानी न चलने के कारण किसान खेती छोड़ने के लिए मजबूर हैं।
- सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। नहरों की मरम्मत के लिए डीपीआर शासन को भेजी गई है, लेकिन बजट नहीं मिल पाया है। - बिजेंद्र कुमार, ईई, सिंचाई विभाग।
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- क्षेत्र की नहरों के पुनर्निर्माण को सीएम की घोषणा में शामिल करवाया गया है। जल्द ही नहरों की मरम्मत के लिए बजट मिलने की उम्मीद है। - शक्ति लाल शाह, विधायक, घनसाली।
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भिलंगना ब्लॉक कृषि के लिए प्रसिद्ध है। यहां बालगंगा और भिलंगना घाटी में धान, प्याज, लहसुन, आलू, अदरक से लेकर बेमौसमी सब्जियों की किसान अच्छी पैदावार कर आजीविका संवर्द्धन करते हैं, लेकिन 2013 की आपदा में दोनों घाटी की एक दर्जन से अधिक छोटी बड़ी नहरें क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिसके चलते किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। सेंदुल, चाकरू का सेरा समेत कई स्थानों पर किसान बारिश पर निर्भर रहकर खेती करते हैं, जबकि कई जगह सिंचाई के अभाव में भूमि असिंचित हो गई है। जाखणीधार ब्लॉक के ढुंगमंदार क्षेत्र की भी आधा दर्जन नहरें क्षतिग्रस्त बनी है। सिंचाई विभाग ने वर्ष 2019 में भिलंगना की नहरों के सुदृढ़ीकरण के लिए दो करोड़ 99 लाख, नैलचामी की नहरों के पुनर्निर्माण के लिए दो करोड़ 51 लाख 93 हजार और जाखणीधार, भिलंगना की पर्वतीय नहरों के पुनरोद्धार के लिए तीन करोड़ 12 लाख की डीपीआर शासन को भेजी थी, लेकिन दो साल में भी सिंचाई नहरों के पुनर्निर्माण और मरम्मत के लिए बजट नहीं मिल पाया है। ऐसे में नहरों का पुनर्निर्माण नहीं हुआ है। नहरों की मरम्मत न होने के कारण कृषि के जरिए किसानों की आय दोगुना करने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। नहरों की मरम्मत के अभाव पानी न चलने के कारण किसान खेती छोड़ने के लिए मजबूर हैं।
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- सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। नहरों की मरम्मत के लिए डीपीआर शासन को भेजी गई है, लेकिन बजट नहीं मिल पाया है। - बिजेंद्र कुमार, ईई, सिंचाई विभाग।
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- क्षेत्र की नहरों के पुनर्निर्माण को सीएम की घोषणा में शामिल करवाया गया है। जल्द ही नहरों की मरम्मत के लिए बजट मिलने की उम्मीद है। - शक्ति लाल शाह, विधायक, घनसाली।