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भाजपा-कांग्रेस को मुश्किल में डाल सकते हैं भीतरघाती
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टिहरी विधानसभा सीट पर टिकट कटने से उठे विरोध के स्वर तो अब थम गए हैं, लेकिन प्रत्याशियों को अपनी पार्टी के भीतरघातियों से निपटने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा और कांग्रेस में खींचतान अधिक है। भाजपा ने सिटिंग विधायक धन सिंह नेगी का टिकट काटकर इस बार कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को चुनाव में उतारा है। भाजपा से बगावत कर नेगी भी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। चुनाव से ऐन पहले पाला बदलने से टिहरी सीट पर चुनावी जंग रोचक हो गई है।
भाजपा, कांग्रेस प्रत्याशियों के पाला बदलने से चुनावी समीकरण भी बदल गए हैं। उत्तराखंड जनएकता पार्टी, आदमी आदमी पार्टी, उक्रांद और अन्य निर्दलीय प्रत्याशी दलबदल करने वालों की घेरेबंदी करने में जुटे हैं। बदली हुई परिस्थितियों में भाजपा और कांग्रेस को सबसे अधिक डर भीतरघात का सता रहा है। क्योंकि टिकट वितरण के बाद दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता अपने को असहज महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि भाजपा से बगावत कर पार्टी के कई पदाधिकारी सहित दर्जनों कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का भी एक बड़ा धड़ा बगावत कर भाजपा में शामिल हो गया है। मतदान से पहले भाजपा और कांग्रेस में अब रूठों को मनाने के प्रयास तेज हो गए। दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशियों सहित कार्यकर्ताओं के दलबदल से पार्टी संगठन को भीतरघात का डर सता रहा है। डैमेज कंट्रोल करने में कौन पार्टी आगे रहेगी इसी पर भाजपा और कांग्रेस की जीत तय होगी। दलबदल की इस राजनीति को भुनाने में अन्य पार्टी के प्रत्याशी जोरशोर से मोर्चेबंदी में जुटे हैं। दलबदल को लेकर भाजपा, कांग्रेस पर हमला बोल कर अपने पक्ष में माहौल तैयार करने की कोशिश में जुटे हैं।
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भाजपा, कांग्रेस प्रत्याशियों के पाला बदलने से चुनावी समीकरण भी बदल गए हैं। उत्तराखंड जनएकता पार्टी, आदमी आदमी पार्टी, उक्रांद और अन्य निर्दलीय प्रत्याशी दलबदल करने वालों की घेरेबंदी करने में जुटे हैं। बदली हुई परिस्थितियों में भाजपा और कांग्रेस को सबसे अधिक डर भीतरघात का सता रहा है। क्योंकि टिकट वितरण के बाद दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता अपने को असहज महसूस कर रहे हैं। यही वजह है कि भाजपा से बगावत कर पार्टी के कई पदाधिकारी सहित दर्जनों कार्यकर्ता कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का भी एक बड़ा धड़ा बगावत कर भाजपा में शामिल हो गया है। मतदान से पहले भाजपा और कांग्रेस में अब रूठों को मनाने के प्रयास तेज हो गए। दोनों ही पार्टियों के प्रत्याशियों सहित कार्यकर्ताओं के दलबदल से पार्टी संगठन को भीतरघात का डर सता रहा है। डैमेज कंट्रोल करने में कौन पार्टी आगे रहेगी इसी पर भाजपा और कांग्रेस की जीत तय होगी। दलबदल की इस राजनीति को भुनाने में अन्य पार्टी के प्रत्याशी जोरशोर से मोर्चेबंदी में जुटे हैं। दलबदल को लेकर भाजपा, कांग्रेस पर हमला बोल कर अपने पक्ष में माहौल तैयार करने की कोशिश में जुटे हैं।
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