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गाय पालन से आत्मनिर्भर बने भेटी गांव के दर्मियान
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कोरोना संक्रमण के लौटे युवा अब गांव में रहकर ही स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने लगे हैं। कोरोना के कारण वेस्टइंडीज से लौटे भेटी गांव के दर्मियान सिंह नेगी ने गाय पालन कर डेयरी फार्म के जरिए स्वरोजगार शुरू किया है। उन्होंने पंजाब के लुधियाना से एक लाख 60 हजार में दो गाय खरीदी थी। दोनों गाय प्रत्येक दिन 25 से 30 लीटर दूध दे रही है, जिसे दर्मियान सिंह 50 रुपये लीटर आसपास के गांव और स्थानीय बाजार में बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं।
भिलंगना ब्लॉक के बूढ़ाकेदार क्षेत्र के भेटी गांव निवासी दर्मियान सिंह नेगी (45) दो साल से वेस्टइंडीज स्थित एक होटल में नौकरी करते थे। मार्च 2020 में कोरोना महामारी की वजह से वे गांव लौट आए थे। उन्होंने गांव में ही लुधियाना से एक लाख 60 हजार में यूरोपियन नस्ल की दो गाय खरीद लाए। दोनों गायों का दूध बेचकर दर्मियान सिंह अब प्रति माह 20-25 हजार रुपये कमा रहे हैं।
दर्मियान सिंह नेगी का कहना है कि ऋषिकेश से चारा ट्रांसपोर्ट में दिक्कत आ रही है। भिलंग के मुकेश ने भी दर्मियान सिंह से संपर्क कर गाय पालन के तौर तरीके सीखे और डेयरी शुरू कर दी।
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भिलंगना ब्लॉक के बूढ़ाकेदार क्षेत्र के भेटी गांव निवासी दर्मियान सिंह नेगी (45) दो साल से वेस्टइंडीज स्थित एक होटल में नौकरी करते थे। मार्च 2020 में कोरोना महामारी की वजह से वे गांव लौट आए थे। उन्होंने गांव में ही लुधियाना से एक लाख 60 हजार में यूरोपियन नस्ल की दो गाय खरीद लाए। दोनों गायों का दूध बेचकर दर्मियान सिंह अब प्रति माह 20-25 हजार रुपये कमा रहे हैं।
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दर्मियान सिंह नेगी का कहना है कि ऋषिकेश से चारा ट्रांसपोर्ट में दिक्कत आ रही है। भिलंग के मुकेश ने भी दर्मियान सिंह से संपर्क कर गाय पालन के तौर तरीके सीखे और डेयरी शुरू कर दी।
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