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पौधरोपण के लिए चढ़ाई पेड़ों की बलि
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नए पेड़ लगाने के लिए यहां पुराने पेड़ों की बलि दी गई है। वन विभाग और नगर पालिका की यह प्लानिंग लोगों के गले नहीं उतर रही है। कलक्ट्रेट परिसर को जाने वाले मुख्य मार्ग पर ढाईजर में पानी के स्रोत को रिचार्ज करने में मददगार हराभरा मिश्रित जंगल था, लेकिन उस जंगल को काटकर नगर पालिका और वन विभाग आज वहां हरेला पर्व पर नई पौध लगाने की तैयारी में है।
जिला मुख्यालय के ढाईजर में हैंडपंप के पीछे स्यांरू, माल्या, रिखोला और पैंय्या (पदम) के साथ ही कुज्जू के मिश्रित जंगल को काट दिया गया है। पूछने पर बताया गया कि हरेला पर्व पर वहां नई पौध लगाने की तैयारी है। जानकार बताते हैं कि इस तरह का जंगल प्राकृतिक जलस्रोत को रिचार्ज करने में काफी मददगार साबित होता है। झाड़ीनुमा जंगल पशु-पक्षियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है, लेकिन वन विभाग के क्रू स्टेशन से 50 मीटर की दूरी पर हरेभरे जंगल को काट कर नए पेड़ लगाने की प्लानिंग की गई है। प्रभागीय वनाधिकारी से लेकर वन विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारी इस मार्ग से आवागमन करते हैं, बावजूद झाड़ीनुमा मिश्रित जंगल कटने से कोई नहीं बचा पाया है। स्थानीय व्यक्ति के विरोध जताने पर निशान मिटाने के प्रयास भी किए गए हैं। ईओ राजेंद्र सिंह सजवाण का कहना है कि हरेला पर्व पर उस स्थान को पौधरोपण के लिए चुना गया है। वहां वन विभाग और पालिका संयुक्त रूप से पौध रोपण करेंगे। इस बाबत वन विभाग से भी बात हुई थी। उसके बाद ही वहां झाड़ियों को काट कर सफाई की गई है। डीएफओ डा. कोको रोशे का कहना है कि जहां तक मेरी जानकारी में है कि वहां पेड़ नहीं केवल झाड़ियां काटी गई हैं। वहां पर काफी कूड़ाकरकट भी जमा हो गया था। मंगलवार को पौधरोपण के समय वहां जाकर देखेंगे।
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जिला मुख्यालय के ढाईजर में हैंडपंप के पीछे स्यांरू, माल्या, रिखोला और पैंय्या (पदम) के साथ ही कुज्जू के मिश्रित जंगल को काट दिया गया है। पूछने पर बताया गया कि हरेला पर्व पर वहां नई पौध लगाने की तैयारी है। जानकार बताते हैं कि इस तरह का जंगल प्राकृतिक जलस्रोत को रिचार्ज करने में काफी मददगार साबित होता है। झाड़ीनुमा जंगल पशु-पक्षियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है, लेकिन वन विभाग के क्रू स्टेशन से 50 मीटर की दूरी पर हरेभरे जंगल को काट कर नए पेड़ लगाने की प्लानिंग की गई है। प्रभागीय वनाधिकारी से लेकर वन विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारी इस मार्ग से आवागमन करते हैं, बावजूद झाड़ीनुमा मिश्रित जंगल कटने से कोई नहीं बचा पाया है। स्थानीय व्यक्ति के विरोध जताने पर निशान मिटाने के प्रयास भी किए गए हैं। ईओ राजेंद्र सिंह सजवाण का कहना है कि हरेला पर्व पर उस स्थान को पौधरोपण के लिए चुना गया है। वहां वन विभाग और पालिका संयुक्त रूप से पौध रोपण करेंगे। इस बाबत वन विभाग से भी बात हुई थी। उसके बाद ही वहां झाड़ियों को काट कर सफाई की गई है। डीएफओ डा. कोको रोशे का कहना है कि जहां तक मेरी जानकारी में है कि वहां पेड़ नहीं केवल झाड़ियां काटी गई हैं। वहां पर काफी कूड़ाकरकट भी जमा हो गया था। मंगलवार को पौधरोपण के समय वहां जाकर देखेंगे।
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