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Tehri News: डायट में दो दिवसीय जेंडर संवेदीकरण कार्यशाला शुरू
Mon, 19 Jan 2026 06:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Mon, 19 Jan 2026 06:55 PM IST
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प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य को दिया जा रहा प्रशिक्षण
नई टिहरी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में छात्र-छात्राओं के बीच समानता के व्यवहार को बढ़ावा के उद्देश्य से प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्यों की दो दिवसीय जेंडर संवेदीकरण कार्यशाला शुरू हो गई। दो चरणों में 100 प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्यों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
डायट के प्राचार्य सुमेर सिंह कैंतुरा ने कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य जेंडर संवेदीकरण है। उन्होंने सभी संस्थाध्यक्षों से अभिभावकों के साथ समानता को लेकर विस्तृत चर्चा करने को कहा। कार्यशाला समन्वयक राजेंद्र प्रसाद बडोनी और सीमा शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विद्यालयों में समानता, समावेशन एवं संवेदनशील वातावरण विकसित करना है। विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्यों को कार्यशाला में विद्यालय एवं कार्यस्थल पर जेंडर और जेंडर समाजीकरण की प्रक्रिया को जनाना और समझना है।
कार्यशाला में शिक्षण पद्धतियां, मूलभूत संरचनाएं व सुविधाएं शिक्षा के जरिए बराबरी की सोच बनाना शामिल है। इस मौके पर डॉ़ वीर सिंह रावत, दीपक रतूड़ी, नरेश चंद कुमाई, विनोद पेटवाल, दीवान सिंह नेगी,जय प्रकाश डबराल आदि मौजूद थे।
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नई टिहरी। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में छात्र-छात्राओं के बीच समानता के व्यवहार को बढ़ावा के उद्देश्य से प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्यों की दो दिवसीय जेंडर संवेदीकरण कार्यशाला शुरू हो गई। दो चरणों में 100 प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्यों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
डायट के प्राचार्य सुमेर सिंह कैंतुरा ने कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य जेंडर संवेदीकरण है। उन्होंने सभी संस्थाध्यक्षों से अभिभावकों के साथ समानता को लेकर विस्तृत चर्चा करने को कहा। कार्यशाला समन्वयक राजेंद्र प्रसाद बडोनी और सीमा शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विद्यालयों में समानता, समावेशन एवं संवेदनशील वातावरण विकसित करना है। विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्यों को कार्यशाला में विद्यालय एवं कार्यस्थल पर जेंडर और जेंडर समाजीकरण की प्रक्रिया को जनाना और समझना है।
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कार्यशाला में शिक्षण पद्धतियां, मूलभूत संरचनाएं व सुविधाएं शिक्षा के जरिए बराबरी की सोच बनाना शामिल है। इस मौके पर डॉ़ वीर सिंह रावत, दीपक रतूड़ी, नरेश चंद कुमाई, विनोद पेटवाल, दीवान सिंह नेगी,जय प्रकाश डबराल आदि मौजूद थे।
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