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44 गांव खतरे की जद में
Tehri
Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
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नई टिहरी। टिहरी बांध का जलस्तर घटते ही झील के आसपास के क्षेत्रों में भू-धंसाव शुरू हो गया है, जिससे आरएल 835 मीटर से ऊपर बसे करीब 44 गांव खतरे की जद में हैं। प्रभावितों का कहना है कि गांव के विस्थापन की संस्तुति पूर्व भूगर्भीय सर्वे में भी की गई है, लेकिन सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैए की वजह से गांवों का विस्थापन नहीं हो पा रहा है।
वर्ष 2010 में टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल (रिजर्व वाटर लेवल) 832 मीटर तक पहुंच गया था, जिससे जाखणीधार, भिलंगना, थौलधार और उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ के आरएल 12 सौ मीटर पर बसे गांव में भू-धंसाव हो गया था। बरसात के बाद जैसे ही झील के जलस्तर में कमी आने लगती है, आसपास के क्षेत्रों में भूस्खलन शुरू हो जाता है। इस वर्ष अगस्त-सिंतबर में जलस्तर आरएल 826 तक पहुंच गया था, जो अब घटकर आरएल 823 मीटर तक पहुंच गया है। झील से हो रहे भूस्खलन से प्रभावित नंदगांव, तिवाड़गांव, मदननेगी, सांदणा, खोला, कंगसाली सहित दर्जनों गांव के लोग विस्थापन की मांग को लेकर आंदोलित हैं। प्रभावित सुनील दत्त भट्ट, विनोद रावत, गोविंदराम, सुंदर लाल, रोशन लाल का कहना है कि वर्ष 1990, 2003, 2007 और 2010 में हुए भूगर्भीय सर्वे रिपोर्ट में भी झील से ऊपर बसे 44 गांव खतरे के जोन में रखें गए हैं।
भूस्खलन से खतरें की जद में गांव
जलवालगांव तल्ला व मल्ला, मदननेगी, सांदणा, खोला, कंगसाली, कठूली, रिंडोल, बडील, नारगढ़, खांड, म्योड़ा, गडोलिया, पीपलडाली, नंदगांव, पिपोला, उठड़, पिलखी, पिपोला ढुंग, बौर, पडागली, बिडकोट, रमोलगांव, सरोट, डोभन, भैल्डियाना बाजार, उप्पू तल्ला, मल्ला, बरोला, बैल्डोगी, मुंडरसेरा, बदांणगांव, हडियाड़ी
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पालिसी नहीं हुई लागू
सरकार ने वर्ष 2010 में कोलेट्रल डैमेज पालिसी बनाई थी, जो झील के घटते-बढ़ते जलस्तर से होने वाले नुकसान की वस्तुस्थिति का मूल्यांकन करना था। इसके आधार पर प्रभावितों की समस्याओं का निस्तारण होना था, लेकिन दो साल बाद भी पालिसी लागू नहीं हुई है।
झील के कारण दर्जनों गांव खतरें की जद में हैं। प्रभावित गांवों के विस्थापन को लेकर सरकार गंभीर है। सीएम ने भी प्रभावित गांव की रिपोर्ट तलब की है। प्रभावितों के विस्थापन हेतु केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की मांग की जा रही है। जल्द ही समस्या का निराकरण हो जाएगा।
-विक्रम सिंह नेगी, विधायक प्रतापनगर
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वर्ष 2010 में टिहरी बांध की झील का जलस्तर आरएल (रिजर्व वाटर लेवल) 832 मीटर तक पहुंच गया था, जिससे जाखणीधार, भिलंगना, थौलधार और उत्तरकाशी के चिन्यालीसौड़ के आरएल 12 सौ मीटर पर बसे गांव में भू-धंसाव हो गया था। बरसात के बाद जैसे ही झील के जलस्तर में कमी आने लगती है, आसपास के क्षेत्रों में भूस्खलन शुरू हो जाता है। इस वर्ष अगस्त-सिंतबर में जलस्तर आरएल 826 तक पहुंच गया था, जो अब घटकर आरएल 823 मीटर तक पहुंच गया है। झील से हो रहे भूस्खलन से प्रभावित नंदगांव, तिवाड़गांव, मदननेगी, सांदणा, खोला, कंगसाली सहित दर्जनों गांव के लोग विस्थापन की मांग को लेकर आंदोलित हैं। प्रभावित सुनील दत्त भट्ट, विनोद रावत, गोविंदराम, सुंदर लाल, रोशन लाल का कहना है कि वर्ष 1990, 2003, 2007 और 2010 में हुए भूगर्भीय सर्वे रिपोर्ट में भी झील से ऊपर बसे 44 गांव खतरे के जोन में रखें गए हैं।
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भूस्खलन से खतरें की जद में गांव
जलवालगांव तल्ला व मल्ला, मदननेगी, सांदणा, खोला, कंगसाली, कठूली, रिंडोल, बडील, नारगढ़, खांड, म्योड़ा, गडोलिया, पीपलडाली, नंदगांव, पिपोला, उठड़, पिलखी, पिपोला ढुंग, बौर, पडागली, बिडकोट, रमोलगांव, सरोट, डोभन, भैल्डियाना बाजार, उप्पू तल्ला, मल्ला, बरोला, बैल्डोगी, मुंडरसेरा, बदांणगांव, हडियाड़ी
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पालिसी नहीं हुई लागू
सरकार ने वर्ष 2010 में कोलेट्रल डैमेज पालिसी बनाई थी, जो झील के घटते-बढ़ते जलस्तर से होने वाले नुकसान की वस्तुस्थिति का मूल्यांकन करना था। इसके आधार पर प्रभावितों की समस्याओं का निस्तारण होना था, लेकिन दो साल बाद भी पालिसी लागू नहीं हुई है।
झील के कारण दर्जनों गांव खतरें की जद में हैं। प्रभावित गांवों के विस्थापन को लेकर सरकार गंभीर है। सीएम ने भी प्रभावित गांव की रिपोर्ट तलब की है। प्रभावितों के विस्थापन हेतु केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की मांग की जा रही है। जल्द ही समस्या का निराकरण हो जाएगा।
-विक्रम सिंह नेगी, विधायक प्रतापनगर