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धरातल पर नहीं उतर पाई है घोषणाएं
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नई टिहरी। औद्यानिकी एवं वानिकी को बढ़ावा देने के नाम पर हो रही घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही है, जिससे कृषि, वानिकी के जरिए किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। वर्ष 2013 में सरकार ने रजाखेत के जखिंड में वानिकी महाविद्यालय परिसर स्वीकृत किया था, लेकिन साढ़े पांच साल बाद भी बजट और पदों का सृजन न होने से परिसर अस्तित्व में नहीं आ पाया है।
सरकार ने वर्ष 2013 में उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार का वानिकी महाविद्यालय का परिसर रजाखेत के समीप जखिंडा में स्वीकृत किया था। इसके लिए करीब पांच हेक्टेयर राजस्व भूमि भी विवि के नाम पर दर्ज हुई थी। महाविद्यालय का परिसर, छात्रावास, कर्मचारी, अधिकारी आवास आदि का निर्माण किया जाना था, लेकिन साढ़े पांच साल बाद भी भवन निर्माण को बजट और कर्मचारियों, अधिकारियों के पदों का सृजन न होने से परिसर नहीं बन पाया है। परिसर की स्वीकृति मिली थी, तो लोगों को बड़ी उम्मीद जगी थी। उन्हें उम्मीद थी कि वानिकी महाविद्यालय का परिसर बनने से युवाओं को कृषि के क्षेत्र में पढ़ने करने का मौका मिलेगा। साथ ही आसपास के किसानों को भी परिसर के वैज्ञानिकों से खेती, किसानी की नई तकनीकी भी मिल पाएगी। बावजूद परिसर बनाने की घोषणा परवान न चढ़ने के कारण उम्मीदें हकीकत में नहीं बदल पाई। ऐसे में पहाड़ों में कृषि को बढ़ावा देने 2022 तक किसानों के आए दोगुनी करने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
परिसर निर्माण को लंबे समय से बजट नहीं मिला है। साथ ही पदों का सृजन भी नहीं हो पाया है, जिसके चलते जखिंडा में वानिकी महाविद्यालय परिसर निर्माण की कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है।
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-एसपी सती, कुलसचिव, औद्यानिकी एवं वानिकी विवि परिसर भरसार।
सरकार ने वर्ष 2013 में उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार का वानिकी महाविद्यालय का परिसर रजाखेत के समीप जखिंडा में स्वीकृत किया था। इसके लिए करीब पांच हेक्टेयर राजस्व भूमि भी विवि के नाम पर दर्ज हुई थी। महाविद्यालय का परिसर, छात्रावास, कर्मचारी, अधिकारी आवास आदि का निर्माण किया जाना था, लेकिन साढ़े पांच साल बाद भी भवन निर्माण को बजट और कर्मचारियों, अधिकारियों के पदों का सृजन न होने से परिसर नहीं बन पाया है। परिसर की स्वीकृति मिली थी, तो लोगों को बड़ी उम्मीद जगी थी। उन्हें उम्मीद थी कि वानिकी महाविद्यालय का परिसर बनने से युवाओं को कृषि के क्षेत्र में पढ़ने करने का मौका मिलेगा। साथ ही आसपास के किसानों को भी परिसर के वैज्ञानिकों से खेती, किसानी की नई तकनीकी भी मिल पाएगी। बावजूद परिसर बनाने की घोषणा परवान न चढ़ने के कारण उम्मीदें हकीकत में नहीं बदल पाई। ऐसे में पहाड़ों में कृषि को बढ़ावा देने 2022 तक किसानों के आए दोगुनी करने के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
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परिसर निर्माण को लंबे समय से बजट नहीं मिला है। साथ ही पदों का सृजन भी नहीं हो पाया है, जिसके चलते जखिंडा में वानिकी महाविद्यालय परिसर निर्माण की कार्रवाई शुरू नहीं हो पाई है।
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-एसपी सती, कुलसचिव, औद्यानिकी एवं वानिकी विवि परिसर भरसार।