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बमण गांव में पांडव नृत्य की अनूठी परंपरा आज भी है कायम
Updated Sun, 18 Nov 2018 10:19 PM IST
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चंबा (टिहरी)। आधुनिकता की चकाचौंध के बीच हमारी लोक संस्कृति की विरासत विलुप्त होने की कगार पर है। मगर जिले का एक गांव ऐसा भी है जो सदियों से कई परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजे हुए हैं। यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र के बमण गांव में हर तीसरे साल पांडव नृत्य मंडाण की अनूठी परंपरा आज भी कायम है। इससे संस्कृति संरक्षण के साथ ही भावी पीढ़ी भी इससे रूबरू हो रही है।
उत्तराखंड को पांडवों की धरती भी कहा जाता है। मान्यता है कि पांडवों ने यहीं से स्वर्गारोहिणी के लिए प्रस्थान किया था। इसी कारण पहाड़ के गांवों में पांडव पूजन की विशेष परंपरा है। इसी क्रम में नरेंद्रनगर ब्लॉक के बमण गांव में पांडव नृत्य मंडाण की अनूठी परंपरा सदियों से आज भी कायम है। गांव में हर तीसरे साल एकादशी के दिन से नौ दिन तक पांडव और उनके अस्त्रों की पूजा करने के साथ ही रात के समय में मंडाण लगाया जाता है। इसके लिए 18 नवंबर एकादशी की रात को नौ दिन तक अखंड दीपक जलाया जाएगा। उसके बाद सोमवार सुबह पूजा-अर्चना की जाएगी। रात को मंडाण लगाकर पांडवों को नचाया जाएगा। मान्यता है कि इस दौरान पांच पांडव और द्रोपदी किसी ग्रामीण में अवतरित होते हैं। किसी पश्वा पर जब भीम अवतरित होते हैं, तो वह देखते ही देखते कई किलो फल और सब्जियां खा जाते हैं। पांडव नृत्य समिति के अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद बिजल्वाण का कहना है कि बमण गांव में पांडव नृत्य मंडाण का आयोजन सदियों से होता आ रहा है। पौराणिक संस्कृति संरक्षण और भावी पीढ़ी को इससे रूबरू कराने के लिए यह आयोजन किया जाता है।
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उत्तराखंड को पांडवों की धरती भी कहा जाता है। मान्यता है कि पांडवों ने यहीं से स्वर्गारोहिणी के लिए प्रस्थान किया था। इसी कारण पहाड़ के गांवों में पांडव पूजन की विशेष परंपरा है। इसी क्रम में नरेंद्रनगर ब्लॉक के बमण गांव में पांडव नृत्य मंडाण की अनूठी परंपरा सदियों से आज भी कायम है। गांव में हर तीसरे साल एकादशी के दिन से नौ दिन तक पांडव और उनके अस्त्रों की पूजा करने के साथ ही रात के समय में मंडाण लगाया जाता है। इसके लिए 18 नवंबर एकादशी की रात को नौ दिन तक अखंड दीपक जलाया जाएगा। उसके बाद सोमवार सुबह पूजा-अर्चना की जाएगी। रात को मंडाण लगाकर पांडवों को नचाया जाएगा। मान्यता है कि इस दौरान पांच पांडव और द्रोपदी किसी ग्रामीण में अवतरित होते हैं। किसी पश्वा पर जब भीम अवतरित होते हैं, तो वह देखते ही देखते कई किलो फल और सब्जियां खा जाते हैं। पांडव नृत्य समिति के अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद बिजल्वाण का कहना है कि बमण गांव में पांडव नृत्य मंडाण का आयोजन सदियों से होता आ रहा है। पौराणिक संस्कृति संरक्षण और भावी पीढ़ी को इससे रूबरू कराने के लिए यह आयोजन किया जाता है।
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