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आयुष्मान और सौभाग्य योग की जोड़ी में मनाएं दीपावली
Updated Sat, 03 Nov 2018 10:17 PM IST
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चंबा (टिहरी)। असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय यानी (हमको) असत्य से सत्य की ओर ले जाओ, अंधेरे से ज्योति की ओर ले जाइए। इसी बात को चरितार्थ करते हुए कार्तिक मास की अमावस्या को दिवाली का पर्व मनाया जाता है। इस साल दीपावली बुधवार सात नवंबर को होने के कारण व्यापारी, शिक्षण संस्थान, कला और बैंकिंग सेक्टर के लोगों के लिए विशेष फलदायी है। इसके अलावा आयुष्मान योग, सौभाग्य योग और मालव्य योग भी दीवाली को और शुभ और लाभकारी बना रहे हैं।
दीपावली का त्योहार पांच दिन का होता है, जो कि धनतेरस से शुरू होकर भाईदूज तक चलता है। धनतेरस पर्व इस बार पांच नवंबर को है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन खरीदे गए सामान का क्षय नहीं होता है। खरीदारी करने के अलावा उस दिन यम-दीपदान करना जरूरी बताया गया है। पुराणों के अनुसार इस दिन दीपदान करने से अकाल मृत्यु का डर खत्म हो जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार कृष्णपक्ष की त्रयोदशी के दिन सायंकाल में घर के बाहर यमदेव के उद्देश्य से दीप रखने से अकाल मृत्यु का निवारण होता है। इसी दिन धनवंतरी त्रयोदशी भी मनायी जाती है। शास्त्रों के अनुसार धनतेरस के दिन ही भगवान धनवंतरी हाथों में स्वर्ण कलश लेकर समुद्र मंथन से उत्पन्न हुई। छह नवंबर को छोटी दिवाली मनायी जाती है। उस दिन बल, बुद्धि के देवता हनुमान जी की विशेष पूजा-आराधना की जाती है। सात नवंबर कार्तिक अमावस्या को दीपावली मनायी जाएगी।
मान्यता है कि इस दिन अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद लौटे थे। उनके स्वागत में लोगों ने कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की रात को दीपों की रोशनी से जगमगा दिया था। इस साल अमावस्या तिथि छह नवंबर को रात 10.27 बजे से शुरू हो रही है, जो कि सात नवंबर को रात 9.32 बजे पर समाप्त हो रही है। सात नवंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि होने के कारण पूरे दिन अमावस्या तिथि का मान रहेगा। आठ को गोवर्द्धन पूजा और नौ को भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य स्वामी रामदास महाराज का कहना है कि दिवाली के दिन अधिक से अधिक तेल, घी के दीपक जलाने चाहिए।
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दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त
दीपावली पर्व पर सात नवंबर को लक्ष्मी-गणेश पूजन का समय शाम प्रदोश काल में 5.22 से 8.20 तक रहेगा। व्यापारी वर्ग के लिए वृष काल में 5.55 से 7.50 तक शुभ रहेगा। पूजा में भगवान गणपति के बाद मां लक्ष्मी की पूजा-आराधना की जानी चाहिए।
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दीपावली का त्योहार पांच दिन का होता है, जो कि धनतेरस से शुरू होकर भाईदूज तक चलता है। धनतेरस पर्व इस बार पांच नवंबर को है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन खरीदे गए सामान का क्षय नहीं होता है। खरीदारी करने के अलावा उस दिन यम-दीपदान करना जरूरी बताया गया है। पुराणों के अनुसार इस दिन दीपदान करने से अकाल मृत्यु का डर खत्म हो जाता है। स्कंद पुराण के अनुसार कृष्णपक्ष की त्रयोदशी के दिन सायंकाल में घर के बाहर यमदेव के उद्देश्य से दीप रखने से अकाल मृत्यु का निवारण होता है। इसी दिन धनवंतरी त्रयोदशी भी मनायी जाती है। शास्त्रों के अनुसार धनतेरस के दिन ही भगवान धनवंतरी हाथों में स्वर्ण कलश लेकर समुद्र मंथन से उत्पन्न हुई। छह नवंबर को छोटी दिवाली मनायी जाती है। उस दिन बल, बुद्धि के देवता हनुमान जी की विशेष पूजा-आराधना की जाती है। सात नवंबर कार्तिक अमावस्या को दीपावली मनायी जाएगी।
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मान्यता है कि इस दिन अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद लौटे थे। उनके स्वागत में लोगों ने कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की रात को दीपों की रोशनी से जगमगा दिया था। इस साल अमावस्या तिथि छह नवंबर को रात 10.27 बजे से शुरू हो रही है, जो कि सात नवंबर को रात 9.32 बजे पर समाप्त हो रही है। सात नवंबर को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि होने के कारण पूरे दिन अमावस्या तिथि का मान रहेगा। आठ को गोवर्द्धन पूजा और नौ को भाई दूज का त्योहार मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्य स्वामी रामदास महाराज का कहना है कि दिवाली के दिन अधिक से अधिक तेल, घी के दीपक जलाने चाहिए।
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दीपावली पूजन का शुभ मुहूर्त
दीपावली पर्व पर सात नवंबर को लक्ष्मी-गणेश पूजन का समय शाम प्रदोश काल में 5.22 से 8.20 तक रहेगा। व्यापारी वर्ग के लिए वृष काल में 5.55 से 7.50 तक शुभ रहेगा। पूजा में भगवान गणपति के बाद मां लक्ष्मी की पूजा-आराधना की जानी चाहिए।