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डडुर के ग्रामीण वैदिक रीति से बनाएंगे धूपबती
Updated Wed, 31 Oct 2018 10:21 PM IST
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चंबा (टिहरी)। पर्यावरण को सहेजने के लिए वेद-पुराणों में वर्णित प्राचीन ज्ञान का सहारा लिया जाएगा। चंबा ब्लॉक कि डडुर में नंदगांव के ग्रामीणों ने वैदिक रीति से धूपबत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
घर की शुद्धि और पवित्रता के साथ ही देवताओं को प्रसन्न करने के लिए धूपबत्ती जलायी जाती है। मगर बाजार में अमूमन धूपबत्ती रसायनिक पदार्थों से बनाई जाती है। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने वेद-पुराणों में उल्लिखित प्राचीन ज्ञान के आधार पर धूपबत्ती बनाने के प्रयोग पर सफलता हासिल की है। ग्रामीण उम्मेद सिंह गुसाईं ने बताया कि ऋषि-मुनियों के ज्ञान से पर्यावरण संरक्षण के लिए जड़ी-बूटियों के माध्यम से धूपबत्ती बनाने का प्रशिक्षण लिया गया है। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) लखनऊ के पूर्व निदेशक चंद्रशेखर नौटियाल ने बताया कि वैज्ञानिकों ने पाया है कि औषधीय धुआं वातावरण शुद्धि के साथ ही स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। शोध में पाया गया है कि औषधीय धुएं से वायु जनित जीवाणुओं की संख्या में कमी आ जाती है।
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घर की शुद्धि और पवित्रता के साथ ही देवताओं को प्रसन्न करने के लिए धूपबत्ती जलायी जाती है। मगर बाजार में अमूमन धूपबत्ती रसायनिक पदार्थों से बनाई जाती है। इसे देखते हुए ग्रामीणों ने वेद-पुराणों में उल्लिखित प्राचीन ज्ञान के आधार पर धूपबत्ती बनाने के प्रयोग पर सफलता हासिल की है। ग्रामीण उम्मेद सिंह गुसाईं ने बताया कि ऋषि-मुनियों के ज्ञान से पर्यावरण संरक्षण के लिए जड़ी-बूटियों के माध्यम से धूपबत्ती बनाने का प्रशिक्षण लिया गया है। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) लखनऊ के पूर्व निदेशक चंद्रशेखर नौटियाल ने बताया कि वैज्ञानिकों ने पाया है कि औषधीय धुआं वातावरण शुद्धि के साथ ही स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। शोध में पाया गया है कि औषधीय धुएं से वायु जनित जीवाणुओं की संख्या में कमी आ जाती है।
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