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रानीचौरी कृषि विज्ञान केंद्र में मनाया राष्ट्रीय पोषण दिवस
Updated Thu, 27 Sep 2018 10:21 PM IST
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चंबा (टिहरी)। कृषि विज्ञान केंद्र, वानिकी महाविद्यालय रानीचौरी और एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना की ओर से राष्ट्रीय पोषण दिवस पर नया उत्तराखंड सुपोषित उत्तराखंड कार्यक्रम आयोजित किया गया। पोषण प्रदर्शनी में आजीविका परियोजना और कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ी महिलाओं ने प्रतिभाग किया।
रानीचौरी वानिकी महाविद्यालय में आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि सीडीओ आशीष भटगाई ने किया। उन्होंने कहा कि देश के उज्जवल भविष्य के लिए अपने बच्चों को कुपोषण से बचाना होगा, ताकि कुपोषण दर को 2022 तक 38 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत तक लाया जा सके। पोषण प्रदर्शनी में महिलाओं ने मंडुवा, झंगोरा, चौलाई आदि से निर्मित पौष्टिक अर्से, रोटाना, मंडुवे की नमकीन और मिठाई का प्रदर्शन किया। वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. एसके गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को कुपोषण दूर करने के लिए जागरूक करने की जरूरत है। कार्यक्रम की समन्वयक कीर्ति कुमारी ने महिलाओं को पोषक तत्व, स्तनपान, राष्ट्रीय पोषण मिशन, एनीमिया की जानकारी दी। विशेष वक्ता विजय जड़धारी ने कहा कि महिलाओं के स्थानीय फसलों को अपने दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए। वानिकी विश्वविद्यालय के संयुक्त निदेशक (प्रसार) डा. अरविंद विजल्वाण, डा. अमोल वशिष्ठ ने भी विचार रखे। इस दौरान आजीविका परियोजना की उत्तराखंड रसाण पुस्तक और बारह नाजा पोस्टर का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर जिला कार्यक्रम अधिकारी विक्रम पंवार, डा. आलोक येवले, शिखा, डा. ऋचा आदि मौजूद थे।
रानीचौरी वानिकी महाविद्यालय में आयोजित प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि सीडीओ आशीष भटगाई ने किया। उन्होंने कहा कि देश के उज्जवल भविष्य के लिए अपने बच्चों को कुपोषण से बचाना होगा, ताकि कुपोषण दर को 2022 तक 38 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत तक लाया जा सके। पोषण प्रदर्शनी में महिलाओं ने मंडुवा, झंगोरा, चौलाई आदि से निर्मित पौष्टिक अर्से, रोटाना, मंडुवे की नमकीन और मिठाई का प्रदर्शन किया। वानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. एसके गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को कुपोषण दूर करने के लिए जागरूक करने की जरूरत है। कार्यक्रम की समन्वयक कीर्ति कुमारी ने महिलाओं को पोषक तत्व, स्तनपान, राष्ट्रीय पोषण मिशन, एनीमिया की जानकारी दी। विशेष वक्ता विजय जड़धारी ने कहा कि महिलाओं के स्थानीय फसलों को अपने दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए। वानिकी विश्वविद्यालय के संयुक्त निदेशक (प्रसार) डा. अरविंद विजल्वाण, डा. अमोल वशिष्ठ ने भी विचार रखे। इस दौरान आजीविका परियोजना की उत्तराखंड रसाण पुस्तक और बारह नाजा पोस्टर का विमोचन भी किया गया। इस मौके पर जिला कार्यक्रम अधिकारी विक्रम पंवार, डा. आलोक येवले, शिखा, डा. ऋचा आदि मौजूद थे।
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