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ग्रामीण व्यवसायों को 12 साल बाद भी नहीं मिले भूखंड
Updated Fri, 27 Jul 2018 10:20 PM IST
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नई टिहरी। टिहरी बांध प्रभावित 25 ग्रामीण व्यवसायों को 12 साल बाद भी व्यवसायिक भूखंड नही मिल पाए हैं। व्यवसाय भूखंड आवंटन की मांग को लेकर पुनर्वास निदेशालय के अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अधिकारी प्रभावित व्यापारियों को केवल आश्वासन ही दे रहे हैं।
वर्ष 2005-06 में टिहरी बांध की झील में सिरांई, छाम समेत भागीरथी एवं भिलंगना घाटी के करीब 116 ग्रामीण व्यवसायों के व्यापारिक प्रतिष्ठान डूब गए थे। पुनर्वास निदेशालय ने वर्ष 2014 में लॉटरी के माध्यम से अन्य व्यवसायों को विभिन्न स्थानों पर भूखंड आवंटित किए गए थे, लेकिन 25 व्यवसायों को भूखंड विकसित करने के बाद आवंटित करने का भरोसा दिया गया। बावजूद चार साल बाद भी प्रभावित दुकानदारों को भूखंड नहीं दिए गए हैं। जिसके चलते वह बेरोजगार घूम रहे हैं। प्रभावित दुकानदार लगातार पुनर्वास निदेशालय के चक्कर लगाकर डोबरा में भूखंड देने की मांग कर रहे हैं। प्रभावित रतन सिंह, राधाराम रतूड़ी, सुरेंद्र सिंह, तारादत्त थपलियाल, मुकेश थपलियाल, भाग सिंह, युद्धवीर राणा आदि ने बताया कि भूखंड न मिलने के कारण वह बेरोजगार घूम रहे हैं। पुनर्वास निदेशालय भूखंड के बजाए नकद प्रतिकर लेने का दबाव बना रहा है। प्रभावित नकद धनराशि नहीं, बल्कि भूखंड ही लेंगे।
छूटे हुए व्यवसायों को डोबरा में भूखंड अविकसित भूमि को विकसित करने को पत्र लिखा गया है। इस संबंध में टिहरी बांध पुनर्वास समन्वय समिति की बैठक में प्रस्ताव रखा गया था। जल्द ही टीएचडीसी, प्रभावितों के बीच बैठक निर्णय लिया जाएगा।
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-सुबोध मैठाणी, अधिशासी अभियंता अवस्थापना खंड पुनर्वास।
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वर्ष 2005-06 में टिहरी बांध की झील में सिरांई, छाम समेत भागीरथी एवं भिलंगना घाटी के करीब 116 ग्रामीण व्यवसायों के व्यापारिक प्रतिष्ठान डूब गए थे। पुनर्वास निदेशालय ने वर्ष 2014 में लॉटरी के माध्यम से अन्य व्यवसायों को विभिन्न स्थानों पर भूखंड आवंटित किए गए थे, लेकिन 25 व्यवसायों को भूखंड विकसित करने के बाद आवंटित करने का भरोसा दिया गया। बावजूद चार साल बाद भी प्रभावित दुकानदारों को भूखंड नहीं दिए गए हैं। जिसके चलते वह बेरोजगार घूम रहे हैं। प्रभावित दुकानदार लगातार पुनर्वास निदेशालय के चक्कर लगाकर डोबरा में भूखंड देने की मांग कर रहे हैं। प्रभावित रतन सिंह, राधाराम रतूड़ी, सुरेंद्र सिंह, तारादत्त थपलियाल, मुकेश थपलियाल, भाग सिंह, युद्धवीर राणा आदि ने बताया कि भूखंड न मिलने के कारण वह बेरोजगार घूम रहे हैं। पुनर्वास निदेशालय भूखंड के बजाए नकद प्रतिकर लेने का दबाव बना रहा है। प्रभावित नकद धनराशि नहीं, बल्कि भूखंड ही लेंगे।
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छूटे हुए व्यवसायों को डोबरा में भूखंड अविकसित भूमि को विकसित करने को पत्र लिखा गया है। इस संबंध में टिहरी बांध पुनर्वास समन्वय समिति की बैठक में प्रस्ताव रखा गया था। जल्द ही टीएचडीसी, प्रभावितों के बीच बैठक निर्णय लिया जाएगा।
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-सुबोध मैठाणी, अधिशासी अभियंता अवस्थापना खंड पुनर्वास।