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आपदा के खौफ में जी रहे 11 गांव के लोग
Updated Thu, 26 Jul 2018 10:45 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। भिलंगना ब्लॉक के 11 गांव आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील हैं। भू वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के बाद भी शासन-प्रशासन गांवों का पुनर्वास नहीं कर रहा है, जिससे लोगों को खौफ के साये में जीना पड़ रहा है।
आपदा से वर्ष 2013 से 2018 के दौरान 19 लोगों को मौत हो गई थी, जबकि 468 भवन ध्वस्त हो गए थे। सैकड़ों भवन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस दौरान 300 पालतू पशु भी मर गए थे। भू वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने आपदा प्रभावित 6456 की आबादी के पुनर्वास की संस्तुति भेजी थी, जिसमें अति संवेदनशील गांव इंद्रोला, मेंढ़, मरवाड़ी, पिंस्वाड, अगुंडा, कोटी, जमोलना, बडियारकुड़ा, ठेला, संराश गांव, कोठियाड़ा सहित 11 गांव शामिल हैं। वर्ष 2002 से क्षेत्र में लगातार बादल फटने और भूस्खलन की समस्या बनी हुई है। आपदा पीड़ितों को राहत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। एसडीएम पीएच चौहान का कहना है कि शासन से इंद्रोला और अगुंडा गांव के पुनर्वास का प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी की जा रही है। अन्य गांवों के विस्थापन की जानकारी नहीं है।
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आपदा से वर्ष 2013 से 2018 के दौरान 19 लोगों को मौत हो गई थी, जबकि 468 भवन ध्वस्त हो गए थे। सैकड़ों भवन आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इस दौरान 300 पालतू पशु भी मर गए थे। भू वैज्ञानिकों की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने आपदा प्रभावित 6456 की आबादी के पुनर्वास की संस्तुति भेजी थी, जिसमें अति संवेदनशील गांव इंद्रोला, मेंढ़, मरवाड़ी, पिंस्वाड, अगुंडा, कोटी, जमोलना, बडियारकुड़ा, ठेला, संराश गांव, कोठियाड़ा सहित 11 गांव शामिल हैं। वर्ष 2002 से क्षेत्र में लगातार बादल फटने और भूस्खलन की समस्या बनी हुई है। आपदा पीड़ितों को राहत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है। एसडीएम पीएच चौहान का कहना है कि शासन से इंद्रोला और अगुंडा गांव के पुनर्वास का प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने की तैयारी की जा रही है। अन्य गांवों के विस्थापन की जानकारी नहीं है।
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