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रोगों से बचाव और किसानों को मालामाल करेगा गैनोडर्मा मशरूम
Updated Sun, 22 Jul 2018 10:24 PM IST
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चंबा (टिहरी)। मध्य प्रदेश के जंगलों में आदिवासियों की परंपरागत चिकित्सा का साधन गैनोडर्मा मशरूम चंबा के किसानों की आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित होगा। औषधीय गुणों से भरपूर गैनोडर्मा मशरूम की खूबियों को देखते हुए औद्यानिकी एवं वानिकी विवि ने स्थानीय स्तर पर गैनोडर्मा मशरूम का उत्पादन करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए विवि ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय केंद्र सरकार को 4 करोड़ 50 लाख की प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंप दी है। विवि को जल्द ही केंद्र सरकार से इस महत्वाकांक्षी योजना को हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।
अभी तक चंबा और आसपास के क्षेत्रों में कई लोग सामान्य प्रजाति के मशरूम का उत्पादन करते आ रहे हैं। मगर अब औद्यानिकी एवं वानिकी विवि ने मानव शरीर में कई रोगों के लिए रामबाण औषधि के रूप में प्रयोग किए जाने वाले गैनोडर्मा मशरूम से काश्तकारों की आय बढ़ाने का प्रोजेक्ट तैयार किया है। गैनोडर्मा मशरूम मध्य प्रदेश के जंगलों में बहुतायत मात्रा में पाया जाता है। एमपी के आदिवासी गैनोडर्मा मशरूम से अपने शरीर की बीमारियों का परंपरागत इलाज करते आ रहे हैं। इसे देखते हुए विवि के कुलपति प्रो. सीएम शर्मा की पहल पर गैनोडर्मा से स्थानीय किसानों की आय बढ़ाए जाने के लिए परियोजना तैयार की है। विवि के अनुसार किसानों को गैनोडर्मा मशरूम के उत्पादन, प्रसंस्करण के बाद बाजार मुहैया करवाने की योजना है।
इंसेट
लाखों की आमदनी कर सकते हैं किसान
80 वर्ग मीटर भूमि पर उगने वाला गैनोडर्मा मशरूम करीब तीन लाख 20 हजार रुपये प्रतिवर्ष की आय दे सकता है। किसान बड़े पैमाने में गैनोडर्मा मशरूम की खेती करके लाखों की आमदनी कमा सकता है। विवि किसानों को गैनोडर्मा मशरूम उगाने से लेकर प्रसंस्करण और बाजार की सुविधा भी मुहैया करेगा।
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इन बीमारियों में है उपयोगी
गैनोडर्मा मशरूम रोग प्रतिरोधक गुणों से भरपूर है। यह हृदय रोग, हैपेटाइटिस, अर्थराइटस, थकान, रक्तचाप और रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने सहित कई रोगों के उपचार में सहायक होता है।
कोट
गैनोडर्मा मशरूम स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा। औषधीय गुणों से भरपूर गैनोडर्मा मशरूम स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय केंद्र सरकार को चार करोड़ 50 लाख का प्रस्ताव सौंप दिया गया है। इस योजना के तहत किसानों को उत्पादन, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधा दी जाएगी। - डा. एसपी सती, प्रभारी कुलसचिव, औद्यानिकी एवं वानिकी विवि।
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अभी तक चंबा और आसपास के क्षेत्रों में कई लोग सामान्य प्रजाति के मशरूम का उत्पादन करते आ रहे हैं। मगर अब औद्यानिकी एवं वानिकी विवि ने मानव शरीर में कई रोगों के लिए रामबाण औषधि के रूप में प्रयोग किए जाने वाले गैनोडर्मा मशरूम से काश्तकारों की आय बढ़ाने का प्रोजेक्ट तैयार किया है। गैनोडर्मा मशरूम मध्य प्रदेश के जंगलों में बहुतायत मात्रा में पाया जाता है। एमपी के आदिवासी गैनोडर्मा मशरूम से अपने शरीर की बीमारियों का परंपरागत इलाज करते आ रहे हैं। इसे देखते हुए विवि के कुलपति प्रो. सीएम शर्मा की पहल पर गैनोडर्मा से स्थानीय किसानों की आय बढ़ाए जाने के लिए परियोजना तैयार की है। विवि के अनुसार किसानों को गैनोडर्मा मशरूम के उत्पादन, प्रसंस्करण के बाद बाजार मुहैया करवाने की योजना है।
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लाखों की आमदनी कर सकते हैं किसान
80 वर्ग मीटर भूमि पर उगने वाला गैनोडर्मा मशरूम करीब तीन लाख 20 हजार रुपये प्रतिवर्ष की आय दे सकता है। किसान बड़े पैमाने में गैनोडर्मा मशरूम की खेती करके लाखों की आमदनी कमा सकता है। विवि किसानों को गैनोडर्मा मशरूम उगाने से लेकर प्रसंस्करण और बाजार की सुविधा भी मुहैया करेगा।
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इन बीमारियों में है उपयोगी
गैनोडर्मा मशरूम रोग प्रतिरोधक गुणों से भरपूर है। यह हृदय रोग, हैपेटाइटिस, अर्थराइटस, थकान, रक्तचाप और रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने सहित कई रोगों के उपचार में सहायक होता है।
कोट
गैनोडर्मा मशरूम स्थानीय किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा। औषधीय गुणों से भरपूर गैनोडर्मा मशरूम स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने के लिए पर्यावरण एवं वन मंत्रालय केंद्र सरकार को चार करोड़ 50 लाख का प्रस्ताव सौंप दिया गया है। इस योजना के तहत किसानों को उत्पादन, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधा दी जाएगी। - डा. एसपी सती, प्रभारी कुलसचिव, औद्यानिकी एवं वानिकी विवि।