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बच्चों के प्रति हिंसा कतई बर्दाश्त नहीं:ऊषा
Updated Mon, 25 Jun 2018 10:52 PM IST
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नई टिहरी। उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने कहा कि बच्चों के प्रति हिंसा कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सभी को निभानी चाहिए। उन्होंने सालभर पहले दो नाबालिग बच्चियों को बंधक बनाकर रखने वाले डा. ललित जैन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि मामला पोक्सो एक्ट का होने के बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहा है। आयोग ने पुलिस से इसकी जांच रिपोर्ट तलब की है।
जिला सभागार में आयोजित बैठक में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने अधिकारियों को अगली बैठक में सही आंकड़ों के साथ उपस्थित रहने के निर्देश दिए। पांच जुलाई 2017 को जिला मुख्यालय में कार्यरत एक डाक्टर दंपति के घर में दो नाबालिग लड़कियों के बंधक मिलने के मामले में दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने पर आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पोक्सो एक्ट का मामला होने के बावजूद दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है, जबकि ऐसे मामलों में विवेचना से पहले ही गिरफ्तारी की जाती है। आयोग की पहल पर हाईकोर्ट ने भी मामले को स्वीकार किया है। आयोग ने बाल श्रम रोकने के लिए टास्कफोर्स गठित करने के निर्देश देते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और स्कूल बसों में जीपीएस लगाने को कहा। श्रम अधिकारी ने बताया कि जिले में बाल श्रम के 11 मामले पाए गए हैं। प्रभारी डीएम आशीष भटगांई ने बाल संरक्षण आयोग के निर्देशों का अनुपालन करने के निर्देश दिए। आयोग की सदस्य अधिवक्ता बीना सजवाण ने पुलिस से सहयोग की अपेक्षा की है। एसएसपी डा. योगेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बाल संरक्षण को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। बैठक में सदस्य सीमा डौंर, शारदा त्रिपाठी, सीएमओ भागीरथी जंगपांगी आदि मौजूद थे।
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जिला सभागार में आयोजित बैठक में बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ने अधिकारियों को अगली बैठक में सही आंकड़ों के साथ उपस्थित रहने के निर्देश दिए। पांच जुलाई 2017 को जिला मुख्यालय में कार्यरत एक डाक्टर दंपति के घर में दो नाबालिग लड़कियों के बंधक मिलने के मामले में दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने पर आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पोक्सो एक्ट का मामला होने के बावजूद दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है, जबकि ऐसे मामलों में विवेचना से पहले ही गिरफ्तारी की जाती है। आयोग की पहल पर हाईकोर्ट ने भी मामले को स्वीकार किया है। आयोग ने बाल श्रम रोकने के लिए टास्कफोर्स गठित करने के निर्देश देते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और स्कूल बसों में जीपीएस लगाने को कहा। श्रम अधिकारी ने बताया कि जिले में बाल श्रम के 11 मामले पाए गए हैं। प्रभारी डीएम आशीष भटगांई ने बाल संरक्षण आयोग के निर्देशों का अनुपालन करने के निर्देश दिए। आयोग की सदस्य अधिवक्ता बीना सजवाण ने पुलिस से सहयोग की अपेक्षा की है। एसएसपी डा. योगेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बाल संरक्षण को हर संभव सहयोग दिया जाएगा। बैठक में सदस्य सीमा डौंर, शारदा त्रिपाठी, सीएमओ भागीरथी जंगपांगी आदि मौजूद थे।
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