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झील का जलस्तर घटने से छाम-बैल्डोगी बोट सेवा ठप
Updated Mon, 09 Apr 2018 10:44 PM IST
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कंडीसौड़ (टिहरी)। टिहरी बांध की झील का जलस्तर कम होने से कंडी-बैल्डोगी की बोट सेवा भी ठप हो गई है, जिससे टिहरी जिले की गुसाईं-नगुण पट्टी और उत्तरकाशी जिले की दिचली-गमरी पट्टी के दर्जनों गांव के लोगों के सामने एक-दूसरे क्षेत्र में आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है। हर साल होने वाली इस समस्या से निपटने के लिए लोगों ने पहले की भांति कंडी-बैल्डोगी झूला पुल बनाने की मांग की है।
बांध की झील बनने से पहले थौलधार और दिचली गमरी क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग छाम-बैल्डोगी झूला पुल से आवागमन करते थे, लेकिन टिहरी बांध की झील बनने के बाद झूला पुल डूबने पर पुनर्वास निदेशालय ने स्थानीय लोगों को आवागमन के लिए बोट की सुविधा प्रदान की है। झील का जलस्तर कम होने से वहां दलदल हो गया है, जिससे बोट का संचालन सोमवार से बंद हो गया है। ऐसे में थौलधार व चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के दर्जनों गांवों के लोगों के सामने आवागमन की समस्या पैदा हो गई है। बोट का संचालन बंद होने से लोगों को चिन्यालीसौड़ से कंडीसौड़ पहुंचने के लिए दो किमी के बजाए 36 किमी का सफर तय करना पड़ेगा। क्षेत्र के विशन सिंह पंवार, केदार सिंह, उत्तम सिंह, केदार सिंह, रामदयाल, प्रजा देवी, गोविंद सिंह, राम प्रकाश, जयप्रकाश, उत्तम दास, कंसरी देवी, जुमला देवी और पीतांबर दत्त ने कहा कि बोट से हर साल तीन-चार माह समस्या आती है। स्थायी समाधान के लिए झूला पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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बांध की झील बनने से पहले थौलधार और दिचली गमरी क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोग छाम-बैल्डोगी झूला पुल से आवागमन करते थे, लेकिन टिहरी बांध की झील बनने के बाद झूला पुल डूबने पर पुनर्वास निदेशालय ने स्थानीय लोगों को आवागमन के लिए बोट की सुविधा प्रदान की है। झील का जलस्तर कम होने से वहां दलदल हो गया है, जिससे बोट का संचालन सोमवार से बंद हो गया है। ऐसे में थौलधार व चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के दर्जनों गांवों के लोगों के सामने आवागमन की समस्या पैदा हो गई है। बोट का संचालन बंद होने से लोगों को चिन्यालीसौड़ से कंडीसौड़ पहुंचने के लिए दो किमी के बजाए 36 किमी का सफर तय करना पड़ेगा। क्षेत्र के विशन सिंह पंवार, केदार सिंह, उत्तम सिंह, केदार सिंह, रामदयाल, प्रजा देवी, गोविंद सिंह, राम प्रकाश, जयप्रकाश, उत्तम दास, कंसरी देवी, जुमला देवी और पीतांबर दत्त ने कहा कि बोट से हर साल तीन-चार माह समस्या आती है। स्थायी समाधान के लिए झूला पुल बनाने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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