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पलायन का शोर मचाने वालों को मुकंदराम दिखा रहे आईना
Updated Sat, 24 Mar 2018 10:44 PM IST
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कंडीसौड़ (टिहरी)। थौलधार ब्लाक के क्यार्दा निवासी मुकंदराम नौटियाल कृषि और बागवानी के क्षेत्र में स्वरोजगार कर अच्छी खासी आय अर्जित कर रहे हैं। मुकंदराम की प्रेरणा से कई ग्रामीण कृषि करने लगे हैं। नौटियाल खेती से प्रत्येक वर्ष करीब दो लाख रुपये कमा रहे हैं।
थौलधार के नगुन पट्टी के क्यार्दा गांव के रहने वाले मुकंदराम नौटियाल ने उत्तरकाशी से बीए पास करने के बाद सरकारी नौकरी के लिए भटकने के बजाय स्वरोजगार की राह चुनी। उन्होंने क्यार्दा से दूर अपने पुस्तैनी गांव डोबन में भूमि पर 1985 में कृषि करने की शुरूआत की। मुकंदराम ने बंजर पड़ी पैतृक भूमि से लेकर आसपास के ग्रामीणों के साथ स्वैच्छिक चकबंदी कर 20 बीघा जमीन को स्वयं की मेहनत से आबाद कर उस पर फलदार पौधे रोपने के साथ ही विभिन्न तरह की सब्जियां उगाई। वर्तमान में वह कृषि एवं बागवानी से प्रत्येक वर्ष डेढ़ से दो लाख का मुनाफा कमा रहे हैं। मुकंदराम की प्रेरणा के कारण घोन, लालूरी, क्यारी, चापडा समेत कई गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने भी बंजर पड़े खेतों पर कृषि शुरू कर स्वरोजगार अपनाया है। नौटियाल की बेमौसमी जैविक सब्जियां और फलों को खरीदने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों से लेकर कंडीसौड़, चिन्यालीसौड़ के व्यापारी पहुंचते हैं। जनवरी में सचिव कृषि डी सेंथिल पांडियन, कृषि निदेशक गौरी शंकर, मुख्य कृषि अधिकारी जीपी तिवारी ने गांव पहुंचकर कृषि, बागवानी के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए उन्हें सम्मानित भी किया।
मुकंदराम का कहना है, कि कृषि एवं बागवानी स्वरोजगार का प्रमुख साधन है। यदि हम इसे व्यवसायिक तौर पर करते हैं, तो सरकारी नौकरी से ज्यादा आय अर्जित कर सकते हैं। मुकंदराम कहते हैं कि लंबे समय गांव के पास नहर क्षतिग्रस्त है। सचिव कृषि से लेकर कई अधिकारियों से नहर की मरम्मत की मांग की गई। बावजूद अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
थौलधार के नगुन पट्टी के क्यार्दा गांव के रहने वाले मुकंदराम नौटियाल ने उत्तरकाशी से बीए पास करने के बाद सरकारी नौकरी के लिए भटकने के बजाय स्वरोजगार की राह चुनी। उन्होंने क्यार्दा से दूर अपने पुस्तैनी गांव डोबन में भूमि पर 1985 में कृषि करने की शुरूआत की। मुकंदराम ने बंजर पड़ी पैतृक भूमि से लेकर आसपास के ग्रामीणों के साथ स्वैच्छिक चकबंदी कर 20 बीघा जमीन को स्वयं की मेहनत से आबाद कर उस पर फलदार पौधे रोपने के साथ ही विभिन्न तरह की सब्जियां उगाई। वर्तमान में वह कृषि एवं बागवानी से प्रत्येक वर्ष डेढ़ से दो लाख का मुनाफा कमा रहे हैं। मुकंदराम की प्रेरणा के कारण घोन, लालूरी, क्यारी, चापडा समेत कई गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने भी बंजर पड़े खेतों पर कृषि शुरू कर स्वरोजगार अपनाया है। नौटियाल की बेमौसमी जैविक सब्जियां और फलों को खरीदने के लिए बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों से लेकर कंडीसौड़, चिन्यालीसौड़ के व्यापारी पहुंचते हैं। जनवरी में सचिव कृषि डी सेंथिल पांडियन, कृषि निदेशक गौरी शंकर, मुख्य कृषि अधिकारी जीपी तिवारी ने गांव पहुंचकर कृषि, बागवानी के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए उन्हें सम्मानित भी किया।
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मुकंदराम का कहना है, कि कृषि एवं बागवानी स्वरोजगार का प्रमुख साधन है। यदि हम इसे व्यवसायिक तौर पर करते हैं, तो सरकारी नौकरी से ज्यादा आय अर्जित कर सकते हैं। मुकंदराम कहते हैं कि लंबे समय गांव के पास नहर क्षतिग्रस्त है। सचिव कृषि से लेकर कई अधिकारियों से नहर की मरम्मत की मांग की गई। बावजूद अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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