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कागजों में ही सिमटा ग्रीन बेल्ट का प्रस्ताव
Updated Sun, 11 Nov 2018 09:21 PM IST
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नई टिहरी। टिहरी झील किनारे लगातार बढ़ते भूस्खलन को रोकने के लिए ग्रीन बेल्ट तैयार करने की योजना धरी की धरी रह गई है। ग्रीन बेल्ट तैयार करने के लिए वन विभाग को एक करोड़ की दरकार है। झील किनारे बढ़ते भूस्खलन रोकने को वन विभाग ने पौधरोपण की योजना बनाई थी, लेकिन योजना कागजों में ही सिमट कर रह गई है। भूस्खलन रोकने के लिए ठोस प्रयास नहीं होने से झील किनारे गांवों के लोग मायूस हैं।
भिंलगना ब्लॉक के पिलखी से चिन्यालीसौड़ तक 42 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली टिहरी बांध झील के दोनों किनारों पर तेजी से भूस्खलन हो रहा है। प्रतिवर्ष अगस्त-सितंबर में झील का जलस्तर बढ़ने और मई से जुलाई तक झील का जलस्तर कम होने पर भूस्खलन तेजी से बढ़ता है। झील किनारे भूस्खलन रोकने के लिए प्रदेश सरकार के निर्देश पर वन विभाग ने 2012 में ग्रीन बेल्ट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। योजना के तहत झील के आरएल 835 से ऊपर खाली पड़ी भूमि पर बाज, बुरांश, देवदार सहित विभिन्न प्रजाति के पौधों का रोपण करना था, लेकिन बजट के अभाव में वन विभाग की ग्रीन बेल्ट तैयार की योजना धरी-धरी की रह गई है।
इस साल प्रदेश सरकार ने झील का जलस्तर आरएल 825 से बढ़ाकर आरएल 828 मीटर तक बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इन दिनों जलस्तर आरएल 825.15 मीटर है। आगामी मार्च-अप्रैल से पानी कम होने से भूस्खलन की संभावनाएं बढ़ जाती है, लेकिन शासन-प्रशासन के स्तर पर भूस्खलन रोकने के लिए कोई भी ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है।
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झील किनारे ग्रीन बेल्ट तैयार करने का प्रस्ताव पूर्व में तैयार किया गया था, लेकिन बजट न मिलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया। झील किनारे कैचमेंट एरिया में जल संरक्षण और संवर्द्धन का कुछ कार्य टीएचडीसी ने स्वयं कराए है। इस वर्ष नमामि गंगे योजना के तहत झील किनारे कुछ स्थानों पर पौध रोपण किया गया है।
-डा. कोको रोसे, डीएफओ, टिहरी वन प्रभाग
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भिंलगना ब्लॉक के पिलखी से चिन्यालीसौड़ तक 42 वर्ग किमी क्षेत्र में फैली टिहरी बांध झील के दोनों किनारों पर तेजी से भूस्खलन हो रहा है। प्रतिवर्ष अगस्त-सितंबर में झील का जलस्तर बढ़ने और मई से जुलाई तक झील का जलस्तर कम होने पर भूस्खलन तेजी से बढ़ता है। झील किनारे भूस्खलन रोकने के लिए प्रदेश सरकार के निर्देश पर वन विभाग ने 2012 में ग्रीन बेल्ट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। योजना के तहत झील के आरएल 835 से ऊपर खाली पड़ी भूमि पर बाज, बुरांश, देवदार सहित विभिन्न प्रजाति के पौधों का रोपण करना था, लेकिन बजट के अभाव में वन विभाग की ग्रीन बेल्ट तैयार की योजना धरी-धरी की रह गई है।
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इस साल प्रदेश सरकार ने झील का जलस्तर आरएल 825 से बढ़ाकर आरएल 828 मीटर तक बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इन दिनों जलस्तर आरएल 825.15 मीटर है। आगामी मार्च-अप्रैल से पानी कम होने से भूस्खलन की संभावनाएं बढ़ जाती है, लेकिन शासन-प्रशासन के स्तर पर भूस्खलन रोकने के लिए कोई भी ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं की गई है।
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झील किनारे ग्रीन बेल्ट तैयार करने का प्रस्ताव पूर्व में तैयार किया गया था, लेकिन बजट न मिलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया। झील किनारे कैचमेंट एरिया में जल संरक्षण और संवर्द्धन का कुछ कार्य टीएचडीसी ने स्वयं कराए है। इस वर्ष नमामि गंगे योजना के तहत झील किनारे कुछ स्थानों पर पौध रोपण किया गया है।
-डा. कोको रोसे, डीएफओ, टिहरी वन प्रभाग