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13 फरवरी को त्रयोदशी के साथ चतुर्दशी तिथि में मनेगा महाशिवरात्रि
Updated Sun, 04 Feb 2018 10:24 PM IST
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चंबा (टिहरी)। इस साल फाल्गुन माह की चतुर्दशी की तिथि 13 और 14 फरवरी को दो दिन आने से महाशिवरात्रि पर्व की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। मगर ज्योतिषियों का कहना है कि 13 फरवरी की रात्रि को त्रयोदशी के साथ चतुर्दशी आने से इसी दिन महाशिवरात्रि का व्रत-पूजन किया जाना शास्त्र सम्मत है। ऐसे में इस बार महाशिवरात्रि मंगलवार को सिद्धि योग के दुर्लभ संयोग में आने से विशेष कल्याणकारी मानी जा रही है।
महाशिवरात्रि पर्व फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस साल चतुर्दशी की तिथि 13 फरवरी को रात्रि 10.34 से शुरू होकर 14 फरवरी रात्रि 12.42 तक रहेगी। चतुर्दशी तिथि दो दिन होने से महाशिवरात्रि पर्व मनाए जाने को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्योंकि 13 फरवरी मंगलवार की रात्रि को त्रयोदशी और चतुर्दशी मिल रही हैं। ऐसे में निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु और व्रतराज के अनुसार मंगलवार को ही त्रयोदशी और चतुर्दशी युक्त महाशिवरात्रि पर्व को मनाना शास्त्र सम्मत बताया गया है। वहीं मंगलवार को महाशिवरात्रि का पर्व सिद्धि योग के दुर्लभ संयोग के साथ आने से और भी अधिक प्रभावकारी बताया जा रहा है। पुराणों में वर्णन है कि भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था। भगवान शिव के विवाह में सिर्फ देव ही नहीं दानव, किन्नर, गंधर्व, भूत, पिशाच भी इस विवाह में शामिल हुए थे। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग को गंगाजल, दूध, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से शिवलिंग को स्नान करवाया जाता है। फिर चंदन लगाकर फल-फूल, बेलपत्र, धतूरा, बेर इत्यादि अर्पित किए जाते हैं।
निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु के अनुसार 13 फरवरी को त्रयोदशी और चतुर्दशी युक्त महाशिवरात्रि को ग्राहय बताया गया है। ऐसे में मंगलवार को ही व्रत और पूजन किया जाना सर्वोत्तम है। इस दिन भगवान शिव की गई आराधना कई गुना अधिक फल देती है।
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-पंडित उदय शंकर भट्ट, पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड विद्वत सभा
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महाशिवरात्रि पर्व फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस साल चतुर्दशी की तिथि 13 फरवरी को रात्रि 10.34 से शुरू होकर 14 फरवरी रात्रि 12.42 तक रहेगी। चतुर्दशी तिथि दो दिन होने से महाशिवरात्रि पर्व मनाए जाने को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्योंकि 13 फरवरी मंगलवार की रात्रि को त्रयोदशी और चतुर्दशी मिल रही हैं। ऐसे में निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु और व्रतराज के अनुसार मंगलवार को ही त्रयोदशी और चतुर्दशी युक्त महाशिवरात्रि पर्व को मनाना शास्त्र सम्मत बताया गया है। वहीं मंगलवार को महाशिवरात्रि का पर्व सिद्धि योग के दुर्लभ संयोग के साथ आने से और भी अधिक प्रभावकारी बताया जा रहा है। पुराणों में वर्णन है कि भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था। भगवान शिव के विवाह में सिर्फ देव ही नहीं दानव, किन्नर, गंधर्व, भूत, पिशाच भी इस विवाह में शामिल हुए थे। महाशिवरात्रि पर शिवलिंग को गंगाजल, दूध, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से शिवलिंग को स्नान करवाया जाता है। फिर चंदन लगाकर फल-फूल, बेलपत्र, धतूरा, बेर इत्यादि अर्पित किए जाते हैं।
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निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु के अनुसार 13 फरवरी को त्रयोदशी और चतुर्दशी युक्त महाशिवरात्रि को ग्राहय बताया गया है। ऐसे में मंगलवार को ही व्रत और पूजन किया जाना सर्वोत्तम है। इस दिन भगवान शिव की गई आराधना कई गुना अधिक फल देती है।
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-पंडित उदय शंकर भट्ट, पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड विद्वत सभा