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अब किसान जलवायु के हिसाब से कर सकेंगे खेती
Updated Mon, 13 Nov 2017 10:39 PM IST
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चंबा (टिहरी)। रानीचौरी परिसर के मौसम विज्ञान ने इस साल के गेहूं और मंडुवा की उपज पर शोध रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान केंद्र हैदराबाद भेज दी है। उम्मीद है कि जल्द ही काश्तकारों को फसल की उपज बढ़ाने की नई जानकारियां मिल सकेंगी।
मौसम में दिन प्रतिदिन आ रहे परिवर्तन के कारण फसलों में बीमारी, कम उत्पादन की समस्या आम बात हो गई है। ऐसे में किसानों का खेतीबाड़ी से मुंह फेरने से रकबा घटने लगा है। इस समस्या से निपटने के लिए रानीचौरी परिसर का मौसम विज्ञान विभाग शोध कार्य कर रहा है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए विभाग ने सबसे अधिक बोई जाने वाली गेहूं और मंडुवे की बुआई की थी। दोनों फसलों के एक ही बीज को तीन अलग-अलग समय पर खेतों में बोया गया। एक फसल सामान्य बुआई से दस दिन पहले, दूसरी सामान्य समय पर और तीसरी फसल इसके दस दिनों बाद बोई गई। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इन फसलों पर कीड़ा या अन्य बीमारी की निगरानी की। जल्दी पककर अधिक उत्पादन देने वाली फसल की जांच की गई। अधिक उपज जानने के लिए पौधे के दाने का वजन भी नापा जाएगा। अब दोनों फसलों के उत्पादन का डाटा तैयार कर केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान हैदराबाद भेज दिया गया है। अब इसके आधार पर ही किसानों को नए फसल चक्र के आधार खेती करने की जानकारी दी जाएगी।
कोट
जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए गेहूं और मंडुवे पर शोध कार्य तेजी से किया जा रहा है। दोनों फसलों की उपज का डाटा तैयार कर केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान हैदराबाद को भेज दिया गया है। इसके आधार पर किसानों की उपज बढ़ाने के लिए नई जानकारियां दी जाएंगी। - प्रकाश नेगी, तकनीकी अधिकारी, मौसम विज्ञान विभाग रानीचौरी परिसर।
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मौसम में दिन प्रतिदिन आ रहे परिवर्तन के कारण फसलों में बीमारी, कम उत्पादन की समस्या आम बात हो गई है। ऐसे में किसानों का खेतीबाड़ी से मुंह फेरने से रकबा घटने लगा है। इस समस्या से निपटने के लिए रानीचौरी परिसर का मौसम विज्ञान विभाग शोध कार्य कर रहा है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए विभाग ने सबसे अधिक बोई जाने वाली गेहूं और मंडुवे की बुआई की थी। दोनों फसलों के एक ही बीज को तीन अलग-अलग समय पर खेतों में बोया गया। एक फसल सामान्य बुआई से दस दिन पहले, दूसरी सामान्य समय पर और तीसरी फसल इसके दस दिनों बाद बोई गई। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इन फसलों पर कीड़ा या अन्य बीमारी की निगरानी की। जल्दी पककर अधिक उत्पादन देने वाली फसल की जांच की गई। अधिक उपज जानने के लिए पौधे के दाने का वजन भी नापा जाएगा। अब दोनों फसलों के उत्पादन का डाटा तैयार कर केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान हैदराबाद भेज दिया गया है। अब इसके आधार पर ही किसानों को नए फसल चक्र के आधार खेती करने की जानकारी दी जाएगी।
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जलवायु परिवर्तन के खतरों से निपटने के लिए गेहूं और मंडुवे पर शोध कार्य तेजी से किया जा रहा है। दोनों फसलों की उपज का डाटा तैयार कर केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान हैदराबाद को भेज दिया गया है। इसके आधार पर किसानों की उपज बढ़ाने के लिए नई जानकारियां दी जाएंगी। - प्रकाश नेगी, तकनीकी अधिकारी, मौसम विज्ञान विभाग रानीचौरी परिसर।
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