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परिनियमावली का अभाव बना विवि की राह में बाधा
Updated Sat, 30 Sep 2017 10:39 PM IST
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नई टिहरी। श्रीदेव सुमन विवि की राह में परिनियमावली बाधा बनी हुई है। विवि स्थापना के छह साल बाद भी प्रथम परिनियमावली को शासन से हरी झंडी नहीं मिल पाई है। इस कारण विवि में टीचिंग और नॉन टीचिंग के पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। विवि से संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश के लिए शुल्क का निर्धारण भी नहीं हो पा रहा है। परिनियमावली के अभाव में विवि को हर बात के लिए शासन का मुंह ताकना पड़ रहा है।
किसी भी विवि की व्यवस्थाएं संचालित करने के लिए परिनियमावाली का होना बेहद जरूरी है। परिनियमावाली के अनुसार ही विवि संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया, शुल्क, छात्र संख्या का निर्धारण, टीचिंग और नॉन टीचिंग के पदों पर नियुक्ति करता है, लेकिन शासन-प्रशासन की लेट लतीफी के कारण श्रीदेव सुमन विवि इस मामले में पीछे रह गगा है। वर्ष 2012 में विवि की स्थापना के छह साल बाद भी विवि की प्रथम परिनियमावली शासन से अनुमोदित नहीं हो पाई है, जबकि विवि प्रशासन की ओर से हिंदी और अंग्रेजी में परिनियमावली का प्रारूप तैयार कर जनवरी 2015 में शासन को भेज दिया गया था। तब से परिनियमावली विधि विभाग में शासन स्तर पर लंबित चल रही है। शासन स्तर से श्रीदेव सुमन विवि की प्रथम परिनियमावली को अनुमोदन न मिलने के कारण विवि संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश देने और शुल्क का निर्धारण करने के लिए गढ़वाल विवि की पुरानी परिनियमावली के भरोसे चल रहा है।
कोट
विवि की प्रथम परिनियमावली हिंदी और अंग्रेजी में तैयार कर अनुमोदन के लिए शासन को भेजी गई थी। विधि विभाग ने कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था, जिसे संशोधित कर जनवरी 2015 में दोबारा से परीक्षण के लिए विधि विभाग में भेजा गया है। - डा. यूएस रावत, कुलपति श्रीदेव सुमन विवि।
किसी भी विवि की व्यवस्थाएं संचालित करने के लिए परिनियमावाली का होना बेहद जरूरी है। परिनियमावाली के अनुसार ही विवि संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश की प्रक्रिया, शुल्क, छात्र संख्या का निर्धारण, टीचिंग और नॉन टीचिंग के पदों पर नियुक्ति करता है, लेकिन शासन-प्रशासन की लेट लतीफी के कारण श्रीदेव सुमन विवि इस मामले में पीछे रह गगा है। वर्ष 2012 में विवि की स्थापना के छह साल बाद भी विवि की प्रथम परिनियमावली शासन से अनुमोदित नहीं हो पाई है, जबकि विवि प्रशासन की ओर से हिंदी और अंग्रेजी में परिनियमावली का प्रारूप तैयार कर जनवरी 2015 में शासन को भेज दिया गया था। तब से परिनियमावली विधि विभाग में शासन स्तर पर लंबित चल रही है। शासन स्तर से श्रीदेव सुमन विवि की प्रथम परिनियमावली को अनुमोदन न मिलने के कारण विवि संबद्ध कॉलेजों में प्रवेश देने और शुल्क का निर्धारण करने के लिए गढ़वाल विवि की पुरानी परिनियमावली के भरोसे चल रहा है।
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विवि की प्रथम परिनियमावली हिंदी और अंग्रेजी में तैयार कर अनुमोदन के लिए शासन को भेजी गई थी। विधि विभाग ने कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था, जिसे संशोधित कर जनवरी 2015 में दोबारा से परीक्षण के लिए विधि विभाग में भेजा गया है। - डा. यूएस रावत, कुलपति श्रीदेव सुमन विवि।
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