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आपदा के मारों से हर कदम पर लूट

Fri, 21 Jun 2013 01:50 PM IST
ऋषिकेश/नरेश थपलियाल
ऋषिकेश/नरेश थपलियाल Updated Fri, 21 Jun 2013 01:50 PM IST
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survivors suffer from loot

आपदा से बचे चारधाम यात्रियों को लूटने में किसी ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। धामों से जैसे-तैसे जान बचाकर तीर्थनगरी लौटे यात्रियों की मानें तो यातायात व्यवस्थाओं में लगे पुलिसकर्मी और ट्रेवल एजेंसियों ने मौके का भरपूर लाभ उठाया।

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पुलिस ने अवैध पार्किंग के पैसे लिए तो ट्रेवल एजेंसियों ने बरसात का बहाना बनाकर सुविधा नहीं दी।

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तीन सौ रुपये देने को कहा
गौरीकुंड से वाहन और सामान गंवाकर तीर्थनगरी पहुंचे सोनीपत (हरियाणा) निवासी सुनील कुमार और सुरेंद्र ने बताया कि गौरीकुंड में पहली खेप में बहने वाले अधिकतर वाहन अवैध पार्किंग में खड़े थे। उनका वाहन भी उसी में था। पार्किंग फुल होने से जब वह अवैध पार्किंग में वाहन खड़ा करने लगे, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोका और तीन सौ रुपये देने को कहा।
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पैसे नहीं देने पर वाहन की हवा निकालने की चेतावनी दी। तीन सौ रुपये लेने के बाद सुबह छह बजे वाहन हटाने की हिदायत देकर चलते बने।

मगर सुविधाएं कुछ नहीं
गंगोत्री से लौटे मध्यप्रदेश के रीवा और सतना जिले के तीर्थयात्रियों से ट्रेवल एजेंसी ने प्रति यात्री दस हजार रुपये लिए, मगर सुविधाएं कुछ नहीं दी। यात्री कमल देव रत्नावत, राजेंद्र भाई जाट और हीरा लाल कुमावत ने बताया कि स्थानीय एजेंसी ने उनसे आने-जाने, खाने और ठहरने के प्रति यात्री दस हजार रुपये लिए थे। मगर यात्रा के दौरान बारिश का बहाना बनाकर किसी प्रकार की सुविधा नहीं दी। बस यात्रा मार्ग में फंस गई, लिहाजा वह जेब का पैसा खर्च कर ऋषिकेश पहुंचे हैं।
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होटल वालों ने की जमकर मनमानी
जहां एक ओर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में दैवी आपदा से पूरा देश सहमा हुआ है, वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने दुख की इस घड़ी में यात्रियों को राहत देने की बजाए अपने व्यवहार से और आहत कर दिया। आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में जो होटल सुरक्षित बच गए, उनमें व्यवसायियों ने यात्रियों से भोजन और आवास के नाम पर मनमाने दाम वसूल किए।


हेमकुंड यात्रा से सकुशल लौटे पटियाला निवासी सिमरन सिंह ने बताया कि यात्रा मार्ग में होटल व्यवसायी आपदा पीड़ितों से आश्रय के लिए एक कमरे के कई गुना दाम वसूल रहे हैं। खाने की थाली, चाय और मिनरल वाटर के दाम कई गुना अधिक बढ़ा दिए गए हैं। ऐसे में जो लोग जिंदा बचे हैं, उनके भी भूखों मरने के आसार हैं। जिला प्रशासन की आपदाग्रस्त क्षेत्रों पर कोई सक्रियता नहीं है।

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