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लाखों का पैकेज छोड़ चुनी दुआएं

Tue, 23 Jul 2013 12:58 PM IST
देहरादून/नलिनी गुसाईं
देहरादून/नलिनी गुसाईं Updated Tue, 23 Jul 2013 12:58 PM IST
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shweta gulani leave lakhs rupees package select social service

देश के प्रबंधन संस्थानों पर यह तोहमत लगती रही है कि वे एग्जीक्यूटिव और मैनेजर तैयार करते हैं, इंसान नहीं। लेकिन उत्तराखंड के आपदा पीड़ितों की मदद में जुटी देहरादून की श्वेता गुलानी और उनकी टीम इस धारणा को खंडित करती है।

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श्वेता ने प्रतिष्ठित भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद से प्रबंधन की डिग्री ली है। लाखों के पैकेज को छोड़ श्वेता ने मानव सेवा को तरजीह दी। उच्च उपाधियों से लैस उनकी टोली में कुल 30 लोग हैं। सभी उत्तराखंड के आपदा पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने में जुटे हैं।
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देहरादून न्यू कैंट निवासी श्वेता (37) बताती हैं कि 1998 में आईआईएम से पासआउट हुईं तो उन्हें आठ लाख पैकेज की नौकरी ऑफर हुई। कुछ समय बाद आर्ट ऑफ लिविंग के श्रीश्री रविशंकर के संपर्क में आईं।
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जीवन में समाज सेवा का महत्व समझा। पारिवारिक बंधन पांवों की बेड़ियां न बन जाए इसलिए शादी भी नहीं की।
श्वेता ने बताया कि टीम में महाराष्ट्र, गुजरात जैसे राज्यों के लोग हैं। गुप्ताकाशी में टेंट, सोलर लाइट आदि सामग्री पहुंचाने वाले लोगों की भी इस टीम ने मदद की और सामान सही जगह पहुंचाया।

श्वेता के कार्यों की तारीफ आईटीबीपी के कमांडेट भी करते हैं। रिटायर्ड टीचर निर्मली गुलानी व स्व. एमएल गुलानी की बेटी श्वेता तीन साल मुंबई और दिल्ली में नौकरी कर चुकी है।

ये हैं टीम के सदस्य

मर्चेंट नेवी में अफसर मोहित ने एक महीने का वक्त टीम के साथ सेवा कार्यों में दिया। सूर्या बी फार्मा और शक्ति सीए की छात्रा है। दोनों अपना समय आपदा पीड़ितों के लिए दे रहे हैं। मालविका आर्मी स्कूल में टीचर है। राहुल का फूलों का बिजनेस है। हरीश पेशे से डॉक्टर हैं। इसके साथ ही टीम में कुल 30 लोग हैं।

श्रीनगर में बनेगा अनाथ आश्रम
आर्ट ऑफ लिविंग के मीडिया संयोजक हेमंत ने बताया कि गुप्तकाशी के पास कालीमठ में राहत सामग्री के साथ ही टेंट आदि सामग्री बांटी। अब श्वेता और उनकी टीम के लोग सर्वे कर रहे हैं।


इसके बाद कई गांवों को गोद लेकर वहां स्वरोजगार शुरू किया जाएगा। श्रीनगर में अनाथ आश्रम बनाया जाएगा। जहां आपदा में अनाथ हुए बच्चों सहित बुजुर्गों की रहने-खाने की व्यवस्था होगी।

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