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पानी है पास, फिर भी करनी पड़ रही ‘डेढ़ कोस’ दूर तलाश
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 24 May 2016 12:54 PM IST
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water tanker
- फोटो : अमर उजाला
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वाह रे जल संस्थान! एक ओर गर्मियों में लोग बूंद-बूंद पानी को लेकर परेशान हैं ,वहीं लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है, इसकी परवाह संस्थान को नहीं है। जैंतनवाला में प्राकृतिक स्रोत से आ रहा लाखों लीटर पानी रोज बर्बाद हो रहा है।
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गौर करने वाली बात यह है कि जिस गांव के पास यह प्राकृतिक स्रोत है वहां जलसंस्थान डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित नलकूप से पाइप लाइन डालकर ग्रामीणों को पानी की सप्लाई कर रहा है। गांव वालों का कहना है कि इन जल संस्थान पानी का भरपूर बिल लेता है पर उन्हें पानी पूरा नहीं मिलता।
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लोग अपनी जरूरत के पानी के लिए प्रकृतिक जल स्रोत पर ही निर्भर हैं। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है स्रोत का लाखों लीटर पानी यूं ही बर्बाद हो रहा है, जबकि जलसंस्थान चाहे तो एक मोटर लगाकर इस पानी का उपयोग पेयजल सप्लाई में कर सकता है। उधर जलसंस्थान का कहना है यह काम ग्राम पंचायत का है।
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गढ़ी कैंट के समीप स्थित जैंतनवाला में प्राकृतिक स्त्रोत है। जहां बेहद स्वच्छ पानी आता है। दूर-दराज के लोग इस पानी को पेयजल के लिए उपयोग में लाते हैं। गांव में जल स्रोत होते हुए भी जैंतनवाला के लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। गांव में पानी की लाइन है और जल संस्थान ग्रामीणों से पानी का बिल भी लेता है।
फिर भी लोग जरूरत के पानी के लिए प्राकृतिक जल स्रोत पर ही निर्भर हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि डेढ़ किलोमीटर दूर से कम पानी सप्लाई के बजाय जल संस्थान एक योजना बनाकर उन्हें इसी जल स्रोत से पानी क्यों नहीं दे देता है।
इस बारे में जल संस्थान का कहना है कि गांव में पड़ी हुई पाइप लाइन ग्राम पंचायत की योजना है। इस बारे में ग्राम प्रधान का कहना है कि योजना ग्राम पंचायत की है तो पानी का बिल जल संस्थान क्यों लेता है? ग्रामीणों का कहना है कि जल्द ही इस संबंध में विभागीय अधिकारियों के साथ ही डीएम और सीएम का भी घिराव करेंगे।
यह योजना जल संस्थान की नहीं है। संस्थान ने पाइप लाइन बिछाकर इसे ग्राम पंचायत को हैंडओवर कर दिया था। अब वहां जो भी काम होना है, वह ग्राम पंचायत स्तर से ही होगा। गांव वालों को यदि जल संस्थान से काम कराना है तो उन्हें लिखित में देना होगा, कि यहां विभाग काम करें। यदि वह पत्र देते हैं तो विभाग अवश्य पानी बचाने के लिए गांव में काम करेगा।
- जीपी गैरोला, अधिशासी अभियंता, अनुरक्षण खंड, जल संस्थान
यदि यहां ग्राम पंचायत की योजना है तो फिर जल संस्थान लोगों से पानी के बिल क्यों ले रहा है। क्यों नलकूप से पानी दिया जा रहा है। विभाग के अधिकारी झूठ बोल रहे हैं। यह जल संस्थान की ही योजना है, तभी तो लोग बिल भर रहे हैं। संस्थान के अधिकारियों से कई बार पानी को योजनाबद्ध तरीके से दिए जाने की मांग कर चुके हैं। जल्द ही इस बारे में कोई ठोस योजना नहीं बनी तो सीएम का ग्रामीण घेराव करेंगे।
- नैन सिंह पंवार, ग्राम प्रधान, जैंतनवाला
मामला चाहे जल संस्थान का हो या ग्राम पंचायत स्तर का। लाखों लीटर पानी तो रोज बर्बाद हो ही रहा है। जब तक पानी को बचाने के लिए पर्याप्त टंकी आदि बनाने के इंतजाम नहीं हो जाते हैं तब तक फिलहाल कोई ऐसी व्यवस्था की हो जाए, जिससे पानी यूं बहता न रहे। जल संस्थान और प्रधान को आपस में बात कर लोगों का फायदा सोचना होगा।
- कविता, वार्ड सदस्य, जैंतनवाला