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हिप्पियों ने बिगाड दिए भारत के संत, करेंगे बैठक
अमर उजाला, कौशल सिखौला, हरिद्वार
Updated Wed, 04 Sep 2013 12:09 AM IST
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आसाराम प्रकरण से हरिद्वार के संत आहत हैं। इस प्रकरण को वे 1975 में संत बालयोगी द्वारा विदेशों से हिप्पियों को भारत लाने से अध्यात्म जगत में आए पतन को जिम्मेदार मानते हैं जो आसाराम प्रकरण तक पहुंच गया है।
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अनेक संत 1975 के बाद कब्जों, हत्याओं और सेक्स की गिरफ्त में आ गये। ऐसा लगने लगा कि मानों समूची संतई पर प्रश्नचिन्ह लग गया हो।
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वे कहते हैं कि आज न्यायालयों में झोले लेकर खड़े महंत, रजिस्ट्री दफ्तरों में जमीनें खरीद और बेच रहे तथाकथित साधु-संतों को देखकर लगता ही नहीं है कि संन्यास की प्राचीन परंपरा कहीं बच गई है। ऐसे में संत मौजूदा दौर में आदि शंकराचार्य जैसे व्यक्तित्व की आवश्यकता महसूस करते हैं।
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संत परंपरा को बदनाम करने वाले चिह्नित होंगे
सब कुछ बिखरता लग रहा है किंतु बचाया जा सकता है। देशभर के साधु-संतों को एक मंच पर लाकर चिंतन किया जाएगा। इस संबंध में अखाड़ों की एक महत्वपूर्ण बैठक अतिशीघ्र अयोध्या अथवा हरिद्वार में बुलाई जाएगी।
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उन संतों को चिन्हित किया जाएगा, जिनके कारण संत परम्परा बर्बाद हो रही है। संत जगत भोग विलास में लिप्त संतों को बहिष्कृत करेगा। साधुओं के लिए एक नई आचार संहिता का निर्माण भी किया जाएगा।
-श्रीमहंत ज्ञानदास, अध्यक्ष-अभा अखाड़ा परिषद
विकट दौर से गुजर रहे हैं
सत्ताधीशों में धन की हवस जाग गई। इसका असर समूचे समाज पर पड़ा। संत जगत भी बचा न रह पाया। ऐसा नहीं है कि सब कुछ समाप्त हो गया हो, कुछ ही लोग हैं जो लीक से हटे हैं।
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संत जगत के वरिष्ठ आचार्यों को मिल बैठ कर वह खोजना होगा, जिससे परंपराओं और मर्यादाओं का संरक्षण किया जा सके। आज जो हो रहा है, वह निश्चय ही चिंता का विषय है।
-योग गुरु स्वामी रामदेव
खोजनी होगी चिंतन में आई कमी
धर्म जगत ने सदैव ही समाज को दिशा प्रदान की है। आज ऐसा लगता है जैसे समूचा समाज पतन के कगार पर आ गया हो। बलात्कार उस हवस का परिणाम हैं, जो भौतिक होते मानव ने ग्रहण की है। आज नैतिक शिक्षा कहीं नहीं रही। यदि अब भी न जागे तो बहुत देर हो जाएगी।
-स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज, शारदा पीठाधीश्वर