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समय पर सूचना न देने पर वीडीओ पांच हजार का जुर्माना
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गूलरभोज। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना समय से नहीं देने और अधूरी देने पर राज्य सूचना आयोग ने वीडीओ पर पांच हजार का जुर्माना लगाया है। एक ही सूचना के कागजों को ग्राम प्रधान और वीडीओ ने अलग-अलग तिथियों और ओवर राइटिंग करके दिया था।
कैनाल कॉलोनी नंबर दो निवासी आरटीआई कार्यकर्ता कमल भट्ट ने आरटीआई के तहत एक अक्तूबर 2018 को ग्रामसभा कोपा में कराए गए विकास कार्यों की 10 बिंदुओं पर तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी (ग्राम प्रधान) से सूचना मांगी थी। ग्राम प्रधान ने दो माह बाद 24 दिसंबर को सूचना उपलब्ध कराई थी। नियमानुसार किसी भी काम को कराने के लिए पहले कोटेशन, एमबी और फिर बिल बनाकर भुगतान किया जाता है।
सूचना में उपलब्ध कराई गई जानकारी में पहले भुगतान, फिर कोटेशन और उसके बाद एमबी कराने का जिक्र है। हैरत की बात तो यह है कि एक नहीं कई बिलों में ऐसा ही दर्शाया गया है। इसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रथम अपीलीय अधिकारी (बीडीओ) से आठ जनवरी 2019 को अपील कर सूचना मांगी। बीडीओ ने वीडीओ को एक सप्ताह में सूचना देने का आदेश दिया।
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आदेश के छह माह बाद भी सूचना न मिलने पर आरटीआई कार्यकर्ता ने 26 जून को सूचना आयोग में अपील की। आयोग के आदेश पर वीडीओ ने 19 जुलाई को सूचनाएं उपलब्ध कराई। यहां पर पूर्व में ग्राम प्रधान द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के अभिलेखों में तारीखों को दुरुस्त कर सूचना दी गई। अब छह अगस्त को दूसरी सुनवाई के दौरान कमल ने आयोग को बताया कि सूचना अपूर्ण और संदिग्ध हैं, अभिलेखों में छेड़छाड़ की गई है।
आयोग ने वीडीओ के समय से सूचना उपलब्ध न कराने को सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7(1) का उल्लंघन मानकर वीडीओ पर पांच हजार का जुर्माना लगाया। आदेश दिए कि जुर्माना राशि की वसूली सूचना अधिकार नियमावली 2013 के उपनियम 11 के तहत कराकर जुर्माना राशि राजकोष में जमा कराई जाए।
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कैनाल कॉलोनी नंबर दो निवासी आरटीआई कार्यकर्ता कमल भट्ट ने आरटीआई के तहत एक अक्तूबर 2018 को ग्रामसभा कोपा में कराए गए विकास कार्यों की 10 बिंदुओं पर तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी (ग्राम प्रधान) से सूचना मांगी थी। ग्राम प्रधान ने दो माह बाद 24 दिसंबर को सूचना उपलब्ध कराई थी। नियमानुसार किसी भी काम को कराने के लिए पहले कोटेशन, एमबी और फिर बिल बनाकर भुगतान किया जाता है।
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सूचना में उपलब्ध कराई गई जानकारी में पहले भुगतान, फिर कोटेशन और उसके बाद एमबी कराने का जिक्र है। हैरत की बात तो यह है कि एक नहीं कई बिलों में ऐसा ही दर्शाया गया है। इसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रथम अपीलीय अधिकारी (बीडीओ) से आठ जनवरी 2019 को अपील कर सूचना मांगी। बीडीओ ने वीडीओ को एक सप्ताह में सूचना देने का आदेश दिया।
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आदेश के छह माह बाद भी सूचना न मिलने पर आरटीआई कार्यकर्ता ने 26 जून को सूचना आयोग में अपील की। आयोग के आदेश पर वीडीओ ने 19 जुलाई को सूचनाएं उपलब्ध कराई। यहां पर पूर्व में ग्राम प्रधान द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के अभिलेखों में तारीखों को दुरुस्त कर सूचना दी गई। अब छह अगस्त को दूसरी सुनवाई के दौरान कमल ने आयोग को बताया कि सूचना अपूर्ण और संदिग्ध हैं, अभिलेखों में छेड़छाड़ की गई है।
आयोग ने वीडीओ के समय से सूचना उपलब्ध न कराने को सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7(1) का उल्लंघन मानकर वीडीओ पर पांच हजार का जुर्माना लगाया। आदेश दिए कि जुर्माना राशि की वसूली सूचना अधिकार नियमावली 2013 के उपनियम 11 के तहत कराकर जुर्माना राशि राजकोष में जमा कराई जाए।