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टूटे और उखड़े पेड़ बने खतरे का सबब
Updated Wed, 21 Sep 2016 10:01 PM IST
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जखोली ब्लाक के गांवों के जंगलों में चार माह पूर्व आंधी से टूटे पेड़ बने ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब।
- फोटो : Amar Ujala
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चार माह पूर्व आंधी-तूफान से टूटे और उखड़े चीड़ के पेड़ ग्रामीणों के लिए खतरे का सबब बने हुए हैं। गांव को जाने वाले मुख्य पैदल मार्ग पर गिरे चीड़ के पेड़ों से लोगों को आवाजाही में दिक्कत हो रही है।
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विगत मई माह में अतिवृष्टि और आंधी से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जंगलों में हजारों चीड़ व अन्य प्रजाति के पेड़ जड़ सहित उखड़ गए थे। सबसे अधिक नुकसान जखोली ब्लाक में हुआ था। यहां अकेले रतनगढ़-जाखाल पैदल मार्ग पर जगह-जगह पर विशालकाय चीड़ के पेड़ उखड़कर या टूटकर गिर गए थे, जिन्हें चार माह बाद भी नहीं हटाया गया है।
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इस समस्या के कारण क्षेत्र के जाखाल, बीराणगांव, बरसोत, रतनगढ़, मरड़ीगाड, त्यूंखर सहित अन्य गांवों के ग्रामीणों को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों और जंगल से चारापत्ती लाने वाली महिलाओं को हो रही है।
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ग्राम पंचायत जाखाल के प्रधान माधव सिंह, सरिता देवी, रुद्रा देवी, अमर सिंह, बलवीर सिंह, रणजीत सिंह आदि का कहना है कि चार माह बीत जाने के बाद भी विभागीय स्तर पर इन टूटे पेड़ों का निस्तारण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने विभाग से जल्द टूटे पेड़ों को हटाने की मांग की है।