उत्तराखंड का राज्य वृक्ष बुरांश अपने मूल समय से लगभग ढाई माह पहले (मूल समय चैत्र मास 15 मार्च के बाद) ) माघ में ही जंगलों में खिलने लगा है। बच्छणस्यूं के सुराड़ी गांव के जंगल में बुरांश के कुछ पेड़ों पर फूल खिले हुए हैं। हालांकि अभी इनकी संख्या कम है।
रुद्रप्रयाग जिले में केदारघाटी घाटी, कालीमठ घाटी, मद्महेश्वर, तुंगनाथ, देवरियाताल, रानीगढ़, बच्छणस्यूं, धनपुर क्षेत्र में बुरांश सबसे अधिक पाया जाता है। केदारघाटी में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तो सफेद, पीला व गुलाबी बुरांश भी पाया जाता है, लेकिन निचले क्षेत्रों में बुरांश का रंग लाल ही होता है। पिछले कुछ वर्षों से यह पुष्प अपने मूल समय से डेढ़ से दो माह पहले खिल रहा है। इन दिनों बच्छणस्यूं पट्टी के सुराड़ी गांव के जंगल में कुछ बुरांश के पेड़ों पर फूल खिले हुए हैं। बकरी पालक कुलदीप सिंह ने बताया कि वे दो दिन पूर्व जंगल के ऊपरी तरफ गए थे, जहां उन्हें एक-दो बुरांश के पेड़ों पर फूल खिले हुए मिले। जबकि वन क्षेत्र में अन्य जगहों पर भी कई बुरांश के पेड़ों पर फूल के अंकुर आने लगे हैं। इधर, पर्यावरणविद् जगत सिंह जंगली ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से बारिश व बर्फबारी के चक्र में निरंतर बदलाव हो रहा है, जिससे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी तापमान बढ़ रहा है। ऐसे में जंगलों में पेड़-पौधों व वनस्पतियों पर भी प्रभाव पड़ रहा है। पैंया, फ्यूंली समेत आबादी क्षेत्र व जंगलों में अन्य कई प्रकार के पुष्प भी समय से पहले खिलने लगे हैं, जो ग्लोबल वार्मिंग का प्रत्यक्ष परिणाम है।