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‘केदारघाटी के गांवों की सुध ले सरकार’
ब्यूरो/अमर उजाला रुद्रप्रयाग
Updated Sun, 14 Feb 2016 10:15 PM IST
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29 सूत्री मांगों को लेकर केदारघाटी आपदा पीड़ित संघर्ष समिति का आंदोलन 178 वें दिन भी जारी रहा। समिति का कहना है कि सरकार केदारनाथ में पांच दिवसीय आयोजन की बात कर रही है, लेकिन केदारघाटी के गांवों की सुध नहीं ली जा रही है। समिति ने केदारनाथ को सड़क से जोड़ने की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
समिति के महामंत्री विपिन सेमवाल की अध्यक्षता हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि समिति पिछले वर्ष अगस्त माह से आंदोलित है, लेकिन शासन-प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली है।
केदारनाथ पुनर्निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन धाम को सड़क से जोड़ने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। गुप्तकाशी से गौरीकुंड के बीच आपदा के बाद से सुधार कार्य नहीं हुए हैं।
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समिति के उपाध्यक्ष राजाराम सेमवाल ने प्रदेश सरकार पर धार्मिक मान्यताओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि धाम में शीतकाल में किसी भी प्रकार के आयोजन का घोर विरोध किया जाएगा, चाहे परिणाम कुछ भी हो।
तीर्थ पुरोहित अधिवक्ता अरुण प्रकाश वाजपेयी ने कहा कि एक तरफ सरकार सेंचुरी एरिया के गांवों को विकास से जोड़ने की बात कर रही है, दूसरी तरफ आपदा में टूटे गांवों के रास्तों पर एक नया पत्थर नहीं लगा है।
बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति पर भी चर्चा की गई। इस दौरान कुबेरनाथ पोश्ती, जीप-टैक्सी यूनियन के राय सिंह राणा, भगत कोटवाल आदि मौजूद थे।
इधर, पूर्व विधायक आशा नौटियाल, पूर्व प्रमुख ममता नौटियाल और सांसद प्रतिनिधि डा. आशुतोष किमोठी ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए सरकार से मांगों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।
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समिति के महामंत्री विपिन सेमवाल की अध्यक्षता हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि समिति पिछले वर्ष अगस्त माह से आंदोलित है, लेकिन शासन-प्रशासन ने इसकी सुध नहीं ली है।
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केदारनाथ पुनर्निर्माण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन धाम को सड़क से जोड़ने के लिए कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। गुप्तकाशी से गौरीकुंड के बीच आपदा के बाद से सुधार कार्य नहीं हुए हैं।
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समिति के उपाध्यक्ष राजाराम सेमवाल ने प्रदेश सरकार पर धार्मिक मान्यताओं के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि धाम में शीतकाल में किसी भी प्रकार के आयोजन का घोर विरोध किया जाएगा, चाहे परिणाम कुछ भी हो।
तीर्थ पुरोहित अधिवक्ता अरुण प्रकाश वाजपेयी ने कहा कि एक तरफ सरकार सेंचुरी एरिया के गांवों को विकास से जोड़ने की बात कर रही है, दूसरी तरफ आपदा में टूटे गांवों के रास्तों पर एक नया पत्थर नहीं लगा है।
बैठक में आंदोलन की अगली रणनीति पर भी चर्चा की गई। इस दौरान कुबेरनाथ पोश्ती, जीप-टैक्सी यूनियन के राय सिंह राणा, भगत कोटवाल आदि मौजूद थे।
इधर, पूर्व विधायक आशा नौटियाल, पूर्व प्रमुख ममता नौटियाल और सांसद प्रतिनिधि डा. आशुतोष किमोठी ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए सरकार से मांगों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।