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खुले आसमान के नीचे चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र
ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Thu, 28 Jan 2016 10:18 PM IST
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छह वर्ष से ग्राम पंचायत कुरछोला में आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन पंचायती चौक में खुले आसमान के नीचे हो रहा है।
मौसम खराब होने पर केंद्र को बंद करना पड़ता है।
आंगनबाड़ी केंद्र कुरछोला भवन विहीन है।
वर्ष 2010 में भारी बरसात से भवन ध्वस्त हो गया था।
उसके बाद अब तक भवन का पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है।
वर्तमान में केंद्र में 21 बच्चे पंजीकृत हैं। भवन नहीं होने से आंगनबाड़ी केंद्र का सामान गांव में अलग-अलग घरों में रखा गया है।
पंचायत चौक छोटा होने से मीड-डे-मील बनाने में भी दिक्कतें हो रही हैं।
वहीं ग्राम पंचायत की बैठक या अन्य सामूहिक कार्यों के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन अलग-अलग घरों के आंगन में होता है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्री बीना पंवार का कहना है कि छह वर्ष से विभाग को सैकड़ों बार भवन पुनर्निर्माण के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।
बारिश होने या गांव में किसी आयोजन के दौरान केंद्र को मजबूरी में बंद करना पड़ता है। जिन घरों में केंद्र का सामान रखा गया है, उनके सामान की अन्यत्र व्यवस्था के लिए कहा जा रहा है।
किराये पर भी कोई कमरा नहीं मिल रहा है। सहायक महिला एवं बाल विकास अधिकारी देवेश्वरी कुंवर ने कहा कि जिले में एक सौ से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपने भवन नहीं है।
विभागीय स्तर पर भवनों के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, लेकिन शासन से सीमित संख्या में स्वीकृति मिलने से दिक्कतें हो रही हैं।
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मौसम खराब होने पर केंद्र को बंद करना पड़ता है।
आंगनबाड़ी केंद्र कुरछोला भवन विहीन है।
वर्ष 2010 में भारी बरसात से भवन ध्वस्त हो गया था।
उसके बाद अब तक भवन का पुनर्निर्माण नहीं हो पाया है।
वर्तमान में केंद्र में 21 बच्चे पंजीकृत हैं। भवन नहीं होने से आंगनबाड़ी केंद्र का सामान गांव में अलग-अलग घरों में रखा गया है।
पंचायत चौक छोटा होने से मीड-डे-मील बनाने में भी दिक्कतें हो रही हैं।
वहीं ग्राम पंचायत की बैठक या अन्य सामूहिक कार्यों के दौरान आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन अलग-अलग घरों के आंगन में होता है।
आंगनबाड़ी कार्यकत्री बीना पंवार का कहना है कि छह वर्ष से विभाग को सैकड़ों बार भवन पुनर्निर्माण के प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।
बारिश होने या गांव में किसी आयोजन के दौरान केंद्र को मजबूरी में बंद करना पड़ता है। जिन घरों में केंद्र का सामान रखा गया है, उनके सामान की अन्यत्र व्यवस्था के लिए कहा जा रहा है।
किराये पर भी कोई कमरा नहीं मिल रहा है। सहायक महिला एवं बाल विकास अधिकारी देवेश्वरी कुंवर ने कहा कि जिले में एक सौ से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के पास अपने भवन नहीं है।
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विभागीय स्तर पर भवनों के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, लेकिन शासन से सीमित संख्या में स्वीकृति मिलने से दिक्कतें हो रही हैं।