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समुदाय संपदा का संरक्षण भी जरूरी : रावत
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अनुसूया प्रसाद बहुगुणा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि में बौद्धिक संपदा अधिकार विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर ऑनलाइन व ऑफलाइन विशेषज्ञों ने विचार व्यक्त किए।
उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूकोस्ट) के सहयोग से वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य अतिथि केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार के साथ समुदाय संपदा का संरक्षण जरूरी है। उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में यह बेहद जरूरी है क्योंकि इससे हमारा पौराणिक ज्ञान संरक्षित होगा, जिसका लाभ पूरे समाज को मिल सकेगा। प्राचार्या प्रो. पुष्पा नेगी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. केपी चमोली कहा कि मनुष्य अपनी बुद्धि से कई अविष्कार और नई रचनाओं को जन्म देता है। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. पीके पाठक, यूकोष्ट वैज्ञानिक डा. अर्पणा शर्मा व सेवानिवृत्त शिक्षाविद प्रो. जीएस रजवार ने कहा कि बौद्धिक संपदा के संरक्षण का लाभ स्थानीय लोगों को मिले। विवि के पर्यावरण विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. आरके मैखुरी ने कहा कि पारंपरिक उत्पादों का संरक्षण कर इनका प्रचार-प्रसार करना होगा। इस मौके पर गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विवि नई दिल्ली के सहायक प्रो. डॉ. एम सक्थीवेल, डॉ. हरिओम शरण बहुगुणा, डा. अखिलेश्वर द्विवेदी, डा. डीएस बिष्ट, डा. जितेंद्र, डा. आबिदा, डा. ममता शर्मा, डा. निधि छाबड़ा आदि मौजूद थे।
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उत्तराखंड स्टेट काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (यूकोस्ट) के सहयोग से वनस्पति विज्ञान विभाग की ओर से कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य अतिथि केदारनाथ विधायक मनोज रावत ने कहा कि बौद्धिक संपदा अधिकार के साथ समुदाय संपदा का संरक्षण जरूरी है। उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में यह बेहद जरूरी है क्योंकि इससे हमारा पौराणिक ज्ञान संरक्षित होगा, जिसका लाभ पूरे समाज को मिल सकेगा। प्राचार्या प्रो. पुष्पा नेगी ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. केपी चमोली कहा कि मनुष्य अपनी बुद्धि से कई अविष्कार और नई रचनाओं को जन्म देता है। उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. पीके पाठक, यूकोष्ट वैज्ञानिक डा. अर्पणा शर्मा व सेवानिवृत्त शिक्षाविद प्रो. जीएस रजवार ने कहा कि बौद्धिक संपदा के संरक्षण का लाभ स्थानीय लोगों को मिले। विवि के पर्यावरण विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. आरके मैखुरी ने कहा कि पारंपरिक उत्पादों का संरक्षण कर इनका प्रचार-प्रसार करना होगा। इस मौके पर गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विवि नई दिल्ली के सहायक प्रो. डॉ. एम सक्थीवेल, डॉ. हरिओम शरण बहुगुणा, डा. अखिलेश्वर द्विवेदी, डा. डीएस बिष्ट, डा. जितेंद्र, डा. आबिदा, डा. ममता शर्मा, डा. निधि छाबड़ा आदि मौजूद थे।
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