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बेमौसमी धान के बजाय मक्के की खेती फायदेमंद

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jan 2020 12:45 AM IST
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Maize cultivation beneficial instead of out of paddy
विकास भवन में किसानों को संबोधित करते मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. अभय सक्सेना। - फोटो : RUDRAPUR
रुद्रपुर। जिले में मक्के की खेती को बढ़ावा देने के लिए शुक्रवार को विकास भवन सभागार में कृषि विभाग की ओर से किसानों के लिए जिला स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को मक्के की खेती से कम लागत में अधिक लाभ कमाने के बारे में जानकारी दी गई।
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मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. अभय सक्सेना ने कहा कि वर्तमान में जिले में करीब 18 हजार हेक्टेयर में मक्के की खेती हो रही है। कम लागत में अधिक लाभ मिलने के कारण किसान मक्के की खेती मेें रुचि ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेमौसमी धान से जहां धान की मूल फसल को नुकसान होता है, वहीं कीट बढ़ने से खेती की लागत भी बढ़ जाती है। साथ ही बेमौसमी धान से भूजल स्तर गिरने व भूमि उपजाऊ क्षमता घटने की भी समस्या आ रही है।
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ऐसे में बेमौसमी धान के विकल्प के रूप में मक्के की खेती सबसे अधिक फायदेमंद है। कृषि विज्ञान केंद्र काशीपुर के वैज्ञानिक चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि मक्के की बुवाई के संबंध में जानकारी दी। विभिन्न बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मक्के के बीज की विभिन्न वैरायटी के बारे में जानकारी दी। वहां भारतीय किसान संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष ठाकुर जगदीश सिंह, कुंवरपाल सिंह, सुधीर साही, श्याम चौहान, देवेंद्र मलिक, रघुराज सिंह, हरेंद्र सिंह, मदन मोहन शर्मा, सुभाष गिरी, कन्हैया लाल, शंकर कुशवाहा, सुरेश राणा आदि किसान थे।
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बेमौसमी धान बोने से परहेज करें किसान : एसडीएम
किच्छा। एसडीएम विवेक प्रकाश ने शुक्रवार को अपने कार्यालय में क्षेत्र के किसानों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने किसानों को बेमौसमी धान की फसल न बोने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि गिरते जलस्तर को रोकने के लिए बेमौसमी धान से किसान परहेज करें।

क्षेत्र के प्रतिष्ठित किसान कर्नल प्रमोद शर्मा ने कहा कि किसान भी पानी की बचत का समर्थन करता है लेकिन सरकार को गर्मियों में क्षेत्र की फैक्ट्रियों में पानी का दोहन रोकने के अलावा प्रदूषण पर अंकुश लगाना चाहिए। इस दौरान किसानों ने धान और गन्ने की बकाया राशि के भुगतान की मांग की। वहां जगरूप सिंह गिल, सुखविंदर सिंह, दिलबाग सिंह, सर्वजीत सिंह, श्रवण सिंह, बख्शीश सिंह, बलकार सिंह आदि थे।
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