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निर्वाण रूप में आज भी तपस्यारत है कार्तिकेय

Thu, 09 Jun 2016 09:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Thu, 09 Jun 2016 09:50 PM IST
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kartik swami tempel in rudraprayag.
रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित उत्तर भारत का एकमात्र कार्तिकेय स्वामि मंदर झेल रहा उपेक्षा व लापरवाही का दंश। - फोटो : Amar Ujala
 उत्तर भारत के एकमात्र कार्तिक  स्वामी मंदिर उपेक्षा का दंश झेल रहा है। प्रचार-प्रसार और जरूरी सुविधाएं नहीं होने से यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की नजरों से ओझल है।
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समुद्रतल से करीब 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कार्तिक स्वामी का मंदिर बिजली, पानी, और संचार जैसी सुविधाओं से महरूम है।

भगवान कार्तिक स्वामी, रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद के बाडव, पोगठा, स्वारी, तड़ाग, पिल्लू, थाल, सोना-मंगरा, बनेड़, चौंडी-मज्याड़ी सहित 360 गांवों के ईष्टदेव हैं। क्रौंच पर्वत पर स्थित इस प्राचीन मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय आज भी यहां निर्वांण रूप में तपस्यारत हैं।
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कार्तिक स्वामी मंदिर की महत्ता
रुद्रप्रयाग। 1940 से प्रतिवर्ष जून माह में मंदिर में महायज्ञ होता है। बैकुंठ चतुर्दशी पर्व पर भी दो दिवसीय मेला लगता है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां निसंतान दंपति दीपदान करते हैं। यहां पर रातभर खड़े दीये लेकर दंपति संतान प्राप्ति की कामना करतेे हैं, जो फलीभूत होती है। कार्तिक पूर्णिमा और जेठ माह में आधिपत्य गांवों की ओर से मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी किया जाता है।
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यह है मान्यता :
रुद्रप्रयाग। किवदंती है कि भगवान कार्तिकेय व गणेश ने अपने माता-पिता भगवान शिव व पार्वती के सम्मुख उनका विवाह करने की बात कही।  माता-पिता ने कहा कि जो पूरे विश्व की परिक्रमा कर पहले उनके सम्मुख पहुंचेगा, उसका विवाह पहले होगा। कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठकर विश्व परिक्रमा को निकल पड़े।

जबकि गणेश गंगा स्नान कर माता-पिता की परिक्रमा करने लगे। गणेश को परिक्रमा करते देख शिव-पार्वती ने पूछा कि वे विश्व की जगह उनकी परिक्रमा क्यों कर रहे हैं तो गणेश ने उत्तर दिया कि माता-पिता में ही पूरा संसार समाहित है। यह बात सुनकर शिव-पार्वती ने खुश होकर गणेश का विवाह विश्वकर्मा की पुत्री रिद्धि व सिद्धि से कर दिया।

इधर, विश्व भ्रमण कर लौटते समय कार्तिकेय को देवर्षि नारद ने पूरा वृतांत सुनाया तो, कार्तिकेय नाराज हो गए और कैलाश पहुंचकर अपना मांस माता को और खून पिता को सौंप निर्वाण रूप में तपस्या के लिए क्रोंच पर्वत पर गए। तब से भगवान कार्तिकेय को यहां पर पूजा जाता है।


कार्तिकेय स्वामी मंदिर में सुविधाएं जुटाने को लेकर शासन-प्रशासन को अवगत कराया जा रहा है। बावजूद इसके आज तक किसी ने सुध नहीं ली है। मंदिर में सबसे बड़ी समस्या पानी की है, जो ढाई किमी दूर से जुटाया जा रहा है।
- शत्रुघ्न सिंह नेगी, अध्यक्ष कार्तिकेय मंदिर समिति अध्यक्ष
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