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नए साल में रोशन होगा गौंडार गांव
अमर उजाला ब्यूराो रुद्रप्रयाग
Updated Wed, 30 Dec 2015 06:27 PM IST
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अब गांव सहित बनतोली और मकोड़ा में निवास कर रहे 85 परिवारों ने अपने घरों में बिजली फिटिंग सहित अन्य जरूरी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। गौंडार अब तक जिले का एकमात्र विद्युत विहीन गांव था। अब नए साल में गौंडार गांव बिजली की रोशनी से रोशन होगा।
ऊखीमठ तहसील में मद्महेश्वर घाटी के दूरस्थ गौंडार गांव में आजादी के 68 वर्ष बाद बिजली पहुंची है। विद्युतीकरण की जिम्मेदारी अगस्त 2013 में ऊर्जा निगम से स्थानांतरित कर उरेडा को सौंपी गई थी। अप्रैल 2014 से उरेडा ने यहां काम शुरू किया। गांव के विद्युतीकरण के लिए 100 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना पर दो टरबाइन लगाई गई हैं। गांव तक बिजली सप्लाई के लिए 3 किमी की एचटी (हाईटेंशन) और 2.7 किमी एलटी (लोटेंशन) विद्युत लाइनें बिछाई गई हैं।
पावर हाउस के अलावा पांच ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं, जिसमें तीन 25 केवी और दो ट्रांसफार्मर 63 केवी के हैं। घर-घर तक सप्लाई के लिए हाईटेंशन लाइन पर 39 और लो-टेंशन लाइन पर 48 विद्युत पोल लगाए गए हैं। परियोजना के ट्रायल के लिए तीन दिन से उरेडा के सहायक अभियंता गांव में ही डेरा जमाए हुए थे। इधर, ग्राम पंचायत गौंडार के पूर्व प्रधान भगत सिंह पंवार ने बताया कि उरेडा ने तेजी से विद्युतीकरण का काम कर इसे डेढ़ वर्ष में पूरा किया गया है। 29 दिसंबर को गांव में विद्युत सप्लाई का ट्रायल भी सफल रहा। घरों में बिजली फिटिंग और कनेक्शन के लिए ग्रामीणों ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
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2 करोड़ 20 लाख लागत से बनी लघु विद्युत परियोजना डेढ़ वर्ष में बनकर तैयार की गई है। परियोजना की देखरेख और गांव में विद्युत कनेक्शन वितरण के लिए एक ऑपरेटर की तैनाती कर उसे जिम्मेदारी सौंपी गई है। - डीएस पटवाल, सहायक अभियंता उरेडा रुद्रप्रयाग
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ऊखीमठ तहसील में मद्महेश्वर घाटी के दूरस्थ गौंडार गांव में आजादी के 68 वर्ष बाद बिजली पहुंची है। विद्युतीकरण की जिम्मेदारी अगस्त 2013 में ऊर्जा निगम से स्थानांतरित कर उरेडा को सौंपी गई थी। अप्रैल 2014 से उरेडा ने यहां काम शुरू किया। गांव के विद्युतीकरण के लिए 100 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना पर दो टरबाइन लगाई गई हैं। गांव तक बिजली सप्लाई के लिए 3 किमी की एचटी (हाईटेंशन) और 2.7 किमी एलटी (लोटेंशन) विद्युत लाइनें बिछाई गई हैं।
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पावर हाउस के अलावा पांच ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं, जिसमें तीन 25 केवी और दो ट्रांसफार्मर 63 केवी के हैं। घर-घर तक सप्लाई के लिए हाईटेंशन लाइन पर 39 और लो-टेंशन लाइन पर 48 विद्युत पोल लगाए गए हैं। परियोजना के ट्रायल के लिए तीन दिन से उरेडा के सहायक अभियंता गांव में ही डेरा जमाए हुए थे। इधर, ग्राम पंचायत गौंडार के पूर्व प्रधान भगत सिंह पंवार ने बताया कि उरेडा ने तेजी से विद्युतीकरण का काम कर इसे डेढ़ वर्ष में पूरा किया गया है। 29 दिसंबर को गांव में विद्युत सप्लाई का ट्रायल भी सफल रहा। घरों में बिजली फिटिंग और कनेक्शन के लिए ग्रामीणों ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
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2 करोड़ 20 लाख लागत से बनी लघु विद्युत परियोजना डेढ़ वर्ष में बनकर तैयार की गई है। परियोजना की देखरेख और गांव में विद्युत कनेक्शन वितरण के लिए एक ऑपरेटर की तैनाती कर उसे जिम्मेदारी सौंपी गई है। - डीएस पटवाल, सहायक अभियंता उरेडा रुद्रप्रयाग