{"_id":"5f15a4188ebc3e636b75c947","slug":"hydropower-project-damaged-due-to-overflow-footfall-broken-rudrapryag-news-drn3505810113","type":"story","status":"publish","title_hn":"अतिवृष्टि से जल विद्युत परियोजना क्षतिग्रस्त, पैदल रास्ते टूटे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अतिवृष्टि से जल विद्युत परियोजना क्षतिग्रस्त, पैदल रास्ते टूटे
विज्ञापन
आठ घंटे लगातार हुई मूसलाधार बारिश व अतिवृष्टि से जिले के गौंडार में गांव उरेडा की 100 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना की पाइप लाइन, पावर हाउस और वहां लगी टरवाइन क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जिस कारण गांव में बिजली सप्लाई ठप हो गई है। बरसात के कारण रांसी से मद्महेश्वर तक 18 किमी पैदल रास्ता भी कई जगहों पर टूट गया है।
रविवार दोपहर बाद से मद्महेश्वर घाटी में शुरू हुई तेज बारिश देर रात्रि तक होती रही। इस दौरान रात्रि लगभग साढ़े दस बजे गांव के पौंडारी तोक में जंगल की तरफ से हुए भारी भूस्खलन से उरेडा विभाग की लघु जल विद्युत परियोजना का पावर हाउस का पिछला हिस्सा ध्वस्त हो गया। जिस कारण वहां 50-50 किलोवाट विद्युत उत्पादन क्षमता की टरबाइन मलबे की भेंट चढ़ गई। वहीं, मुरकंडा नदी के तेज बहाव से परियोजना के पाइप लाइन के कई पाइप बह गए हैं। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र से मलबे के सैलाब ने द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के लिए जाने वाला पैदल रास्ते के बीस मीटर से अधिक रास्ते को भी पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। ग्राम प्रधान वीर सिंह पंवार, मदन सिंह पंवार, ताजबर सिंह पंवार, महिला मंगल दल अध्यक्ष कविता देवी, पूर्व प्रधान बीरेंद्र सिंह पंवार, देवेश्वरी देवी, मुकंदी सिंह आदि का कहना है कि लघु जल विद्युत परियोजना के क्षतिग्रस्त होने से बिजली सप्लाई भी ठप हो गई है। आठ घंटे से अधिक समय तक हुई मूसलाधार बारिश से हुई अतिवृष्टि से गांव के 75 परिवार भयभीत हैं। गांव का द्वितीय केदार से भी संपर्क कट गया है। प्रधान ने प्रशासन और उरेडा के अधिकारियों से गांव में अतिवृष्टि से हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण की मांग की है। इधर, उरेडा के परियोजना अधिकारी संदीप कुमार सैनी ने बताया कि नुकसान के आंकलन की रिपोर्ट के लिए जेई के साथ बुधवार को एक टीम गांव भेजी जाएगी।
विज्ञापन
रविवार दोपहर बाद से मद्महेश्वर घाटी में शुरू हुई तेज बारिश देर रात्रि तक होती रही। इस दौरान रात्रि लगभग साढ़े दस बजे गांव के पौंडारी तोक में जंगल की तरफ से हुए भारी भूस्खलन से उरेडा विभाग की लघु जल विद्युत परियोजना का पावर हाउस का पिछला हिस्सा ध्वस्त हो गया। जिस कारण वहां 50-50 किलोवाट विद्युत उत्पादन क्षमता की टरबाइन मलबे की भेंट चढ़ गई। वहीं, मुरकंडा नदी के तेज बहाव से परियोजना के पाइप लाइन के कई पाइप बह गए हैं। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र से मलबे के सैलाब ने द्वितीय केदार भगवान मद्महेश्वर धाम के लिए जाने वाला पैदल रास्ते के बीस मीटर से अधिक रास्ते को भी पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। ग्राम प्रधान वीर सिंह पंवार, मदन सिंह पंवार, ताजबर सिंह पंवार, महिला मंगल दल अध्यक्ष कविता देवी, पूर्व प्रधान बीरेंद्र सिंह पंवार, देवेश्वरी देवी, मुकंदी सिंह आदि का कहना है कि लघु जल विद्युत परियोजना के क्षतिग्रस्त होने से बिजली सप्लाई भी ठप हो गई है। आठ घंटे से अधिक समय तक हुई मूसलाधार बारिश से हुई अतिवृष्टि से गांव के 75 परिवार भयभीत हैं। गांव का द्वितीय केदार से भी संपर्क कट गया है। प्रधान ने प्रशासन और उरेडा के अधिकारियों से गांव में अतिवृष्टि से हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण की मांग की है। इधर, उरेडा के परियोजना अधिकारी संदीप कुमार सैनी ने बताया कि नुकसान के आंकलन की रिपोर्ट के लिए जेई के साथ बुधवार को एक टीम गांव भेजी जाएगी।
विज्ञापन