हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल की 103वीं जयंती पर कलश लोक संस्कृति चैरिटेबिल ट्रस्ट ने गांव गीड में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। का आयोजन किया। हिमवंत कवि के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
मुख्य अतिथि डायट रतूड़ा के प्राचार्य विनोद सिमल्टी ने हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल ने अल्प आयु में ही हिंदी साहित्य की अपार सेवा की है। संस्था के संस्थापक ओम प्रकाश सेमवाल ने संचालन करते हुए बुग्यालों की सैर करीक सौंजड्या तेरा गौं का बाटा लग्यां, लोक कवि जगदंबा चमोला ने घौर जाण मैंन आज अपणा बुड्या कूड़ा पर, मुरली दीवान ने प्यार अर दुलारै सुगंध रै जींका गात मां वै च ब्वे, अनूप नेगी ने गुंज, गुंज गुंजणी बाघ सीं दहाड़ छै, अश्विनी गौड़ ने बंदरों कु तमसु मचयूं च, कविता का पाठ किया। इस मौके पर हिमवंत कवि के भतीजे गंभीर सिंह बर्त्वाल, शिक्षाविद् प्रेम मोहन डोभाल, चंद्रशेखर पुरोहित, दिलवान बर्त्वाल, प्रदीप भंडारी, संजय रावत, हैप्पी असवाल, रेखा कंडारी, आशीष कंडारी, अंशुल जगवाण, उमा कंडारी, शिशुपाल कंडारी, वेदिका सेमवाल, कुसुम भट्ट, विमला राणा मौजूद रहे।