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हाईवे: भूधंसाव से कई स्थानों पर बदहाल
ब्यूरो/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Sun, 24 Jul 2016 10:51 PM IST
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रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग मुनकटिया में अवरूद्घ। पहाड़ी से गिरे मलबे व बोल्डर से होकर यूं गुजर रहे यात्री।
- फोटो : Amar Ujala
76 किमी रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे जगह-जगह हादसों का सबब बना है। चट्टानें खिसकने, भूस्खलन और भू-धंसाव से सड़क कई स्थानों पर बदहाल हो गई है। स्थिति यह कि केदारनाथ यात्रा तैयारियों के नाम पर लाखों खर्च के बाद भी स्थिति दयनीय है।
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केदारघाटी की लाइफ लाइन कहा जाने वाला राजमार्ग पर एनएच सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। स्थायी मरम्मत के नाम पर अधिकारी चारधाम प्रोजेक्ट के तहत काम की बात कहकर वर्तमान हालात को नजरांदाज कर रहे हैं। रुद्रप्रयाग से दो किमी की दूरी पर लोनिवि प्रांतीय खंड के समीप पहाड़ी से हल्की बरसात में भारी बोल्डर गिर रहे हैं।
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नौला पानी और भटवाड़ीसैंण में सड़क संवेदनशील बनी हुई है। विजयनगर से आगे पुराना देवल में बह रहा गदेरा कभी भी सड़क को बहा सकता है। बावजूद आपदा के तीन वर्ष बाद भी यहां पर कॉजवे का निर्माण नहीं किया गया है। बांसवाड़ा पूरा भूस्खलन जोन है। जबकि चंद्रापुरी से कुंड तक सड़क संकरी होने के साथ उबड़-खाबड़ हैै।
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सेमी, रामपुर और खाट गांव के नीचे सड़क धंस रही है। जबकि बीते तीन वर्षों से इन स्थानों पर सुधारीकरण के नाम पर लाखों रुपये स्वाह किए जा चुके हैं। सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच पांच किमी सड़क आपदा के बाद से निरंतर आवाजाही लायक नहीं बन पाई है। जबकि प्रशासन ने इसकी देखरेख के लिए अलग से डीडीएमए गठित किया है।
15 दिन से यहां सिर्फ 2 दिन यातायात चल पाया है। गौरीकुंड के ग्राम प्रधान राकेश गोस्वामी का कहना है कि डीडीएमए और एनएच की लापरवाही से राजमार्ग दयनीय बना है। सुरक्षा और सुधार के नाम पर सिर्फ सरकारी धन ठिकाने लग रहा है। उन्होंने डीएम व सीएम से आपदा के बाद राजमार्ग पर हुए सुधार कार्य की जांच की मांग की है।
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे सुधार के तहत अब तक 35 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। राजमार्ग का स्थायी ट्रीटमेंट चारधाम प्रोजेक्ट के तहत होना है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी सड़क को सिर्फ कामचलाऊ व्यवस्था के लिए चालू रखना है।
- प्रवीन कुमार, ईई एनएच निर्माण खंड, रुद्रप्रयाग