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डौडियों कालिंका देणी ह्वे जो...
ब्यूरो/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Tue, 20 Dec 2016 09:48 PM IST
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पट्टी बच्छणस्यूं व कंडारस्यूं के मध्य में स्थित डौडियों कालिंका देवी मंदिर में आयोजित मेला में प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित।
- फोटो : amar ujala.
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पट्टी बच्छणस्यूं और कंडारस्यूं की सीमा पर स्थिति डौडियों कालिंका मां के मंदिर में मेले का आयोजन किया गया। इस मौके पर देवी भक्तों ने अराध्या के दर्शन कर पूजा-अर्चना कर मनौती भी मांगी। मेले में जय बुंखाल कालिंका प्रोडक्शन ग्रुप द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कलाकारों ने हे मेरी मां डौडियों कालिंका देणी ह्वे जा, ढोल-दमाऊं ले की तेरा जागरी ऐ गे..., मां भवानी कष्ट हरणी..., धरती हमरा गढ़वाल की..., जख देवतों का थौ छन भैजी तख हमरा गौ छन भैजी... के अलावा गीत व थड्या, चौंफुला, झुमेला आदि नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों से मेलार्थियों का मन मोहा।
इससे पहले मंदिर परिसर में आयोजित मेले का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीनगर के व्यापार संघ अध्यक्ष वासुदेव कंडारी व सामाजिक कार्यकर्ता डा. प्रकाश चमोली ने संयुक्त रूप से किया। कहा कि अराध्या के प्रागंण में आयोजित मेले ने भक्ति और सौहार्द को एक मंच पर ला दिया है। डौडियो देवी का मंदिर प्राचीन है, लेकिन शासन, प्रशासन और पर्यटन विभाग द्वारा इसकी उपेक्षा की गई है।
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ऐसे में क्षेत्रवासियों को एकजुट होकर मंदिर में मेला व धार्मिक अनुष्ठान के लिए प्रयास करने होंगे। मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनेश बिष्ट ने कहा कि जनता व जनप्रतिनिधियों के प्रयास से मंदिर में पशुबलि बंद हुए एक दशक हो गया है, लेकिन अब सबकी जिम्मेदारी है कि इस धार्मिक स्थल की भव्यता और महत्ता को आमजन तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया जाए।
इस मौके पर बच्छणस्यूं, वल्ली व पल्ली कंडारस्यूं पट्टी के जनप्रतिनिधि व ग्रामीण मौजूद थे। डा. प्रकाश चमोली ने बताया कि मंदिर में स्थापित एक शिलापट में निर्माण वर्ष 1742 में होना और फते शाह द्वारा कराया जाना लिखा है। मंदिर की दीवारों पर कटवा पत्थर लगा हुआ है। मंदिर ऊंचे स्थान पर है, जहां से हिमालय के चौखंभा के दर्शन होते हैं।
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कलाकारों ने हे मेरी मां डौडियों कालिंका देणी ह्वे जा, ढोल-दमाऊं ले की तेरा जागरी ऐ गे..., मां भवानी कष्ट हरणी..., धरती हमरा गढ़वाल की..., जख देवतों का थौ छन भैजी तख हमरा गौ छन भैजी... के अलावा गीत व थड्या, चौंफुला, झुमेला आदि नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों से मेलार्थियों का मन मोहा।
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इससे पहले मंदिर परिसर में आयोजित मेले का शुभारंभ मुख्य अतिथि श्रीनगर के व्यापार संघ अध्यक्ष वासुदेव कंडारी व सामाजिक कार्यकर्ता डा. प्रकाश चमोली ने संयुक्त रूप से किया। कहा कि अराध्या के प्रागंण में आयोजित मेले ने भक्ति और सौहार्द को एक मंच पर ला दिया है। डौडियो देवी का मंदिर प्राचीन है, लेकिन शासन, प्रशासन और पर्यटन विभाग द्वारा इसकी उपेक्षा की गई है।
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ऐसे में क्षेत्रवासियों को एकजुट होकर मंदिर में मेला व धार्मिक अनुष्ठान के लिए प्रयास करने होंगे। मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनेश बिष्ट ने कहा कि जनता व जनप्रतिनिधियों के प्रयास से मंदिर में पशुबलि बंद हुए एक दशक हो गया है, लेकिन अब सबकी जिम्मेदारी है कि इस धार्मिक स्थल की भव्यता और महत्ता को आमजन तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य किया जाए।
इस मौके पर बच्छणस्यूं, वल्ली व पल्ली कंडारस्यूं पट्टी के जनप्रतिनिधि व ग्रामीण मौजूद थे। डा. प्रकाश चमोली ने बताया कि मंदिर में स्थापित एक शिलापट में निर्माण वर्ष 1742 में होना और फते शाह द्वारा कराया जाना लिखा है। मंदिर की दीवारों पर कटवा पत्थर लगा हुआ है। मंदिर ऊंचे स्थान पर है, जहां से हिमालय के चौखंभा के दर्शन होते हैं।