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अपनी जमीन के साथ बेची जमीन का भी ले लिया मुआवजा
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चंदन बंगारी
रुद्रपुर। एनएच-74 की चौड़ीकरण की जद में आई एक कारोबारी की जमीन का लाखों रुपये का मुआवजा एनएचएआई ने जारी तो किया लेकिन मुआवजा जमीन के पुराने मालिक के खाते में चला गया। जब मामले की जानकारी कारोबारी को हुई तो पैरों तले जमीन खिसक गई और उसने एसएलओ दफ्तर में शिकायत की। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) ने जब तहसीलदार से मामले की जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई। इसके बाद एसएलओ ने अतिरिक्त मुआवजा वापस करने का नोटिस जारी किया है।
दिल्ली के कारोबारी बलराम त्यागी ने रुद्रपुर के कारोबारी से 10 साल पहले भमरौला गांव में 9500 वर्गमीटर जमीन खरीदी थी। एनएच के अधिग्रहण में दोनों की 1182 वर्गमीटर जमीन अधिग्रहीत हो गई थी। एक ही खसरा नंबर होने की वजह से तत्कालीन कर्मियों ने जमीनी रिपोर्ट में अधिग्रहीत पूरी जमीन को रुद्रपुर के कारोबारी के नाम दर्शाकर रिपोर्ट तहसीलदार को दी थी।
तहसीलदार के माध्यम से एसएलओ दफ्तर में दी गई रिपोर्ट के आधार पर थ्रीडी की कार्यवाही के बाद प्रतिकर निर्धारण कर एनएचएआई को भेजा गया था। इसके बाद पूरी जमीन का करीब 44 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान दिसंबर 2018 को रुद्रपुर के कारोबारी को हो गया था। इसी बीच जब बलराम त्यागी को मुआवजा जारी होने की जानकारी मिली तो उन्होंने मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत एसएलओ दफ्तर में की थी।
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उन्होंने बताया कि एनएच के लिए उनकी 808 वर्गमीटर जमीन अधिग्रहीत हुई थी लेकिन उनको अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा नहीं मिल सका। एसएलओ ने मामले में तहसीलदार से जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई। एसएलओ नरेश दुर्गापाल ने बताया कि तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद अब रुद्रपुर के कारोबारी को अतिरिक्त मुआवजे की 30 लाख 44 हजार की रकम लौटाने का नोटिस जारी किया गया है, ताकि मुआवजा सही हकदार बलराम त्यागी को दिया जा सके।
स्ट्रक्चर का मिला मुआवजा लेकिन जमीन का नहीं
रुद्रपुर। एनएच-74 में अधिग्रहीत जमीन पर मुआवजे को लेकर खेल होने का संदेह है। दरअसल कारोबारी बलराम ने 10 साल पहले भमरौला में जमीन खरीदकर होटल बनाया था। एनएच के अधिग्रहण में बलराम की जमीन के साथ ही स्ट्रक्चर भी जद में आया था।
सवाल खड़ा हो रहा है कि तत्कालीन कर्मियों ने स्ट्रक्चर की रिपोर्ट को बलराम के नाम बनाई जबकि जिस जमीन पर स्ट्रक्चर खड़ा था, उस जमीन की रिपोर्ट पुराने मालिक के नाम तैयार की। इसी आधार पर मुआवजे का निर्धारण किया गया।
अगस्त 2018 में बलराम को स्ट्रक्चर के मुुआवजे के रूप में पांच लाख नौ हजार रुपये तो मिले लेकिन दिसंबर 2018 में जमीन के लिए जारी मुआवजा पुराने भूस्वामी के खाते में चला गया। तत्कालीन कर्मियों की गलत रिपोर्ट से वास्तविक को मुआवजा नहीं मिलने के ऐसे कई और मामले भी एसएलओ दफ्तर में आए हैं।
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रुद्रपुर। एनएच-74 की चौड़ीकरण की जद में आई एक कारोबारी की जमीन का लाखों रुपये का मुआवजा एनएचएआई ने जारी तो किया लेकिन मुआवजा जमीन के पुराने मालिक के खाते में चला गया। जब मामले की जानकारी कारोबारी को हुई तो पैरों तले जमीन खिसक गई और उसने एसएलओ दफ्तर में शिकायत की। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) ने जब तहसीलदार से मामले की जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई। इसके बाद एसएलओ ने अतिरिक्त मुआवजा वापस करने का नोटिस जारी किया है।
दिल्ली के कारोबारी बलराम त्यागी ने रुद्रपुर के कारोबारी से 10 साल पहले भमरौला गांव में 9500 वर्गमीटर जमीन खरीदी थी। एनएच के अधिग्रहण में दोनों की 1182 वर्गमीटर जमीन अधिग्रहीत हो गई थी। एक ही खसरा नंबर होने की वजह से तत्कालीन कर्मियों ने जमीनी रिपोर्ट में अधिग्रहीत पूरी जमीन को रुद्रपुर के कारोबारी के नाम दर्शाकर रिपोर्ट तहसीलदार को दी थी।
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तहसीलदार के माध्यम से एसएलओ दफ्तर में दी गई रिपोर्ट के आधार पर थ्रीडी की कार्यवाही के बाद प्रतिकर निर्धारण कर एनएचएआई को भेजा गया था। इसके बाद पूरी जमीन का करीब 44 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान दिसंबर 2018 को रुद्रपुर के कारोबारी को हो गया था। इसी बीच जब बलराम त्यागी को मुआवजा जारी होने की जानकारी मिली तो उन्होंने मुआवजा नहीं मिलने की शिकायत एसएलओ दफ्तर में की थी।
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उन्होंने बताया कि एनएच के लिए उनकी 808 वर्गमीटर जमीन अधिग्रहीत हुई थी लेकिन उनको अधिग्रहीत जमीन का मुआवजा नहीं मिल सका। एसएलओ ने मामले में तहसीलदार से जांच कराई तो शिकायत सही पाई गई। एसएलओ नरेश दुर्गापाल ने बताया कि तहसीलदार की रिपोर्ट के बाद अब रुद्रपुर के कारोबारी को अतिरिक्त मुआवजे की 30 लाख 44 हजार की रकम लौटाने का नोटिस जारी किया गया है, ताकि मुआवजा सही हकदार बलराम त्यागी को दिया जा सके।
स्ट्रक्चर का मिला मुआवजा लेकिन जमीन का नहीं
रुद्रपुर। एनएच-74 में अधिग्रहीत जमीन पर मुआवजे को लेकर खेल होने का संदेह है। दरअसल कारोबारी बलराम ने 10 साल पहले भमरौला में जमीन खरीदकर होटल बनाया था। एनएच के अधिग्रहण में बलराम की जमीन के साथ ही स्ट्रक्चर भी जद में आया था।
सवाल खड़ा हो रहा है कि तत्कालीन कर्मियों ने स्ट्रक्चर की रिपोर्ट को बलराम के नाम बनाई जबकि जिस जमीन पर स्ट्रक्चर खड़ा था, उस जमीन की रिपोर्ट पुराने मालिक के नाम तैयार की। इसी आधार पर मुआवजे का निर्धारण किया गया।
अगस्त 2018 में बलराम को स्ट्रक्चर के मुुआवजे के रूप में पांच लाख नौ हजार रुपये तो मिले लेकिन दिसंबर 2018 में जमीन के लिए जारी मुआवजा पुराने भूस्वामी के खाते में चला गया। तत्कालीन कर्मियों की गलत रिपोर्ट से वास्तविक को मुआवजा नहीं मिलने के ऐसे कई और मामले भी एसएलओ दफ्तर में आए हैं।