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सेंचुरी एरिया में बसे गांवों की मुश्किलें होंगी खत्म
ब्यूरो/ अमर उजाला रुद्रप्रयाग
Updated Wed, 03 Feb 2016 09:49 PM IST
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वन क्षेत्रों (सेंचुरी एरिया) में बसे गांवों में निवास करने वाले ग्रामीणों की मुश्किलें अब खत्म होने वाली हैं। इन गांवों को सड़क सहित अन्य जरूरी सुविधाओं से जोडने के लिए शासन स्तर पर कवायद शुरू हो गई है। इस वर्ष के अंत तक जनपद के अंतिम गांव गौंडार तक सड़क निर्माण हो जाएगा।
21वीं सदी में भी असुविधाओं के बीच जी रहे वन क्षेत्र के गांवों के ग्रामीणों के दुख भरे दिन बीतने वाले हैं। फॉरेस्ट एक्ट के कारण जरूरी सुविधाओं से वंचित गांवों को सुविधा मुहैया कराने के लिए वनाधिकार 2006 लागू किया गया है। इस अधिनियम में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। वनाधिकार 2006 में स्पष्ट किया गया है कि सेंचुरी क्षेत्र व परंपरागत बसागत वाले गांवों को सड़क, पेयजल लाइन, विद्युत लाइन, स्कूल/आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण किया जाएगा। ऐसे में सेंचुरी एरिया में होने के बावजूद सड़क या अन्य निर्माण के लिए वन भूमि का हस्तांतरण नहीं करना होगा। बल्कि भूमि का मूल्य/मुआवजा वन विभाग को दिया जाएगा। इसके अलावा गांव तहसील और जिला स्तर समितियां गठित की जाएंगी। ये समितियां चरणबद्ध तरीके से संबंधित गांवों के प्रस्तावों और बसागत से जुड़े साक्ष्यों का मूल्यांकन करेंगी। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
ग्राम पंचायत/गांव को ये साक्ष्य देने होंगे
सेंचुरी एरिया (वन क्षेत्र) में बसे गांवों को यह साक्ष्य अनिवार्य रूप से देना होगा कि वह संबंधित क्षेत्र में तीन पीढ़ी या कम से कम 75 वर्ष से निवास कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें गांव के सबसे वृद्ध ग्रामीणों के नाम, बंदोबस्त के समय के नक्शा, जिसमें गांव अंकित हो। गांव में मिले पुराने सिक्के, मूर्ति के अलावा प्राचीन रास्ते, पुरानी छानी या गोट के साक्ष्य देने होंगे।
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रुद्रप्रयाग में सेंचुरी एरिया के गांव
चौमासी 69
बुरूवा 107
गडगू 172
त्रिजुगीनारायण 270
चिलौंड 81
रांसी 235
गौंडार 75
रेंस 19
गौरीकुंड 100
तोषी 42
लोलछड़ा 30
कोट-
सेंचुरी एरिया/फॉरेस्ट एक्ट क्षेत्र में आने वाले गांवों को सड़क सहित अन्य सुविधाओं से जोड़ने के लिए वनाधिकार 2006 लागू किया गया है। अब वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया नहीं होगी। ग्राम पंचायत का निवास उस क्षेत्र में कम से कम 75 वर्ष पुराना होना चाहिए। इस व्यवस्था से संसाधनों को जुटाने में कम समय के साथ विकास को भी गति मिलेगी।- डा. राघव लंगर, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग
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21वीं सदी में भी असुविधाओं के बीच जी रहे वन क्षेत्र के गांवों के ग्रामीणों के दुख भरे दिन बीतने वाले हैं। फॉरेस्ट एक्ट के कारण जरूरी सुविधाओं से वंचित गांवों को सुविधा मुहैया कराने के लिए वनाधिकार 2006 लागू किया गया है। इस अधिनियम में वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। वनाधिकार 2006 में स्पष्ट किया गया है कि सेंचुरी क्षेत्र व परंपरागत बसागत वाले गांवों को सड़क, पेयजल लाइन, विद्युत लाइन, स्कूल/आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण किया जाएगा। ऐसे में सेंचुरी एरिया में होने के बावजूद सड़क या अन्य निर्माण के लिए वन भूमि का हस्तांतरण नहीं करना होगा। बल्कि भूमि का मूल्य/मुआवजा वन विभाग को दिया जाएगा। इसके अलावा गांव तहसील और जिला स्तर समितियां गठित की जाएंगी। ये समितियां चरणबद्ध तरीके से संबंधित गांवों के प्रस्तावों और बसागत से जुड़े साक्ष्यों का मूल्यांकन करेंगी। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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ग्राम पंचायत/गांव को ये साक्ष्य देने होंगे
सेंचुरी एरिया (वन क्षेत्र) में बसे गांवों को यह साक्ष्य अनिवार्य रूप से देना होगा कि वह संबंधित क्षेत्र में तीन पीढ़ी या कम से कम 75 वर्ष से निवास कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें गांव के सबसे वृद्ध ग्रामीणों के नाम, बंदोबस्त के समय के नक्शा, जिसमें गांव अंकित हो। गांव में मिले पुराने सिक्के, मूर्ति के अलावा प्राचीन रास्ते, पुरानी छानी या गोट के साक्ष्य देने होंगे।
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रुद्रप्रयाग में सेंचुरी एरिया के गांव
चौमासी 69
बुरूवा 107
गडगू 172
त्रिजुगीनारायण 270
चिलौंड 81
रांसी 235
गौंडार 75
रेंस 19
गौरीकुंड 100
तोषी 42
लोलछड़ा 30
कोट-
सेंचुरी एरिया/फॉरेस्ट एक्ट क्षेत्र में आने वाले गांवों को सड़क सहित अन्य सुविधाओं से जोड़ने के लिए वनाधिकार 2006 लागू किया गया है। अब वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया नहीं होगी। ग्राम पंचायत का निवास उस क्षेत्र में कम से कम 75 वर्ष पुराना होना चाहिए। इस व्यवस्था से संसाधनों को जुटाने में कम समय के साथ विकास को भी गति मिलेगी।- डा. राघव लंगर, जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग