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चीड़ की पत्तियों से बनाएं टिकली और बायोचार ब्लॉक, मुनाफा कमाएं

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 28 Sep 2019 01:03 AM IST
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Build from pine leaves, biochar blocks, make profits
पंतनगर में किसान मेले का फीता काटकर उद्घाटन करती मुख्य अतिथि रेखा भंडारी साथ में कुलपति। - फोटो : RUDRAPUR
रुद्रपुर। पहाड़ों के जंगलों की सेहत को बिगाड़ने वाले चीड़ की पत्तियों से हाईप्रेशर टिकली और बायोचार ब्लॉक तैयार कर आजीविका कमाई जा सकती है। पंतनगर विवि के प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के फार्म मशीनरी विभाग के विभागाध्यक्ष के निर्देशन में दो शोधार्थियों ने इसे तैयार करने का फार्मूला ईजाद किया है। यही नहीं फार्मूले को अपनाकर अल्मोड़ा जिले के एक ग्रामीण ने बायोचार ब्लॉक बनाने का व्यवसाय भी शुरू किया है।
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दरअसल चीड़ को पहाड़ों के जंगलों के लिए बेहद नुकसानदायक माना जाता है। गर्मियों के मौसम में तो चीड़ के जंगलों में आग धधकने की बहुत ज्यादा घटनाएं होती है लेकिन यही चीड़ ग्रामीणों की आमदनी का जरिया भी बन सकता है। अखिल भारतीय किसान मेले में पंतनगर विवि के फार्म मशीनरी एवं पावर इंजीनियरिंग विभाग के स्टाल में चीड़ से तैयार टिकली, बायोचार ब्लॉक और इसको तैयार करने की तकनीक ने किसानों खासकर पर्वतीय क्षेत्र से आए किसानों को अपनी तरफ आकर्षित किया।
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विभागाध्यक्ष डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि मोटर चालित या हाथ से चलने वाली मशीन से ब्लॉक तैयार किए जा सकते हैं। टिकली और बायोचार ब्लॉक को तैयार कर बेचा जा सकता है। अल्मोड़ा के कांतली गांव के रहने वाले शंकरलाल बायोचार ब्लॉक तैयार कर बेच रहे हैं। अगर किसी किसान को इसका फार्मूला और मशीन के बारे में जानकारी चाहिए तो वह विभाग में आकर उनसे संपर्क कर सकता है।
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इनसेट
ऐसे बनाई जाती है टिकली और बायोचर ब्लॉक
इंजीनियरिंग विभाग के स्टाल में मौजूद आकांक्षी कुमाईं और रजत शर्मा ने बताया कि हाईप्रेशर टिकली बनाने के लिए सबसे पहले चीड़ की पत्तियां सुखाई जाती हैं। इसके बाद थ्रेशर या कुट्टी काटने वाली मशीन से छोटे-छोटे टुकड़े किए जाते हैं। इसके बाद हाईप्रेशर मशीन से टुकड़ों पर दबाव डाला जाता है और निर्धारित तापमान में आकर ये टुकड़े आपस में चिपक जाते हैं।
इससे तैयार टिकली लकड़ी की तरह जलती है और एक घंटे में मशीन की मदद से 400 से 1200 किलो टिकली बनाई जा सकती है। बताया कि बायोचार ब्लॉक बनाने के लिए चीड़ की पत्तियों को जलाकर तैयार बायोचार में चूना या मिट्टी या सीमेंट मिला दिया जाता है। इसके बाद इसे प्रेशर मशीन में डालकर ब्लॉक तैयार कर लिए जाते हैं।
कोयले का विकल्प बन सकते हैं टिकली या ब्लॉक
डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि बड़े आयोजनों में भट्ठियां जलाने के लिए मैदानी क्षेत्रों से पहाड़ों को कोयला ले जाया जाता है, लेकिन हाईप्रेशर टिकली या बायोचार ब्लॉक इसका अच्छा विकल्प हो सकते हैं। यह कोयले से कम दाम में पहाड़ में ही तैयार होकर उपलब्ध हो सकते हैं। इसके अलावा बायोचार ब्लॉक का इस्तेमाल मिट्टी में मिलाकर उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है।

एक घंटे में बन सकते हैं 40 ब्लॉक
रुद्रपुर। डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि हस्तचालित बायोचार ब्लाक बनाने के लिए तैयार की गई मशीन से एक घंटे में 40 ब्लॉक बनाए जा सकते हैं। पांच इंच व्यास और तीन इंच ऊंचाई का ब्लॉक तैयार किया जा सकता है। एक ब्लॉक का वजन 600 से 800 ग्राम होता है। मशीन की कीमत भी बहुत ज्यादा नहीं है। हालांकि बड़े स्तर पर ब्लॉक बनाने के लिए बड़ी मशीनरी की जरूरत होगी। वहीं टिकली के लिए हाईप्रेशर मशीन की जरूरत पड़ती है।
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