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बिहार के चादर गैंग ने की थी मोबाइल शोरूम में चोरी
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रुद्रपुर। शहर के अग्रसेन चौक के पास स्थित ढींगरा मोबाइल टावर से चोरी लाखों की मोबाइल चोरी का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने बिहार के अंतरराज्यीय चोर गिरोह चादर गैंग के तीन बदमाशों को हरियाणा के गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 20 महंगे मोबाइल बरामद हुए हैं। गैंग के सरगना समेत छह बदमाश फरार चल रहे हैं।
सोमवार को एसपी सिटी देवेंद्र पींचा और एसपी क्राइम प्रमोद कुमार ने पुलिस कार्यालय में वारदात का खुलासा करते हुए बताया कि 24 अक्तूबर को अग्रसेन चौक स्थित ढींगरा मोबाइल टावर में बदमाशों ने अलग-अलग कंपनियों के करीब 150 मोबाइल चोरी कर लिए थे। चोरी गए मोबाइल की कीमत लाखों में थी। चोरों की तलाश में पुलिस व एसओजी की टीम दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार भेजी गई थी। खुलासे के लिए इन राज्यों की पुलिस की मदद से जब छानबीन की गई तो वारदात में बिहार के मोतिहारी जिले के चादर गैंग का नाम सामने आया।
इसके बाद पुलिस की कई टीमों ने बिहार में डेरा डाल दिया था। सूचना पर एसओजी और पुलिस ने हरियाणा के सेक्टर 10 मार्केट एचडीएफसी के सामने नगर पालिका मैदान गुरुग्राम (हरियाणा) से मुन्ना देवान, मोहम्मद टिमना और लालबाबू गोसाईं निवासी वीरता चौक, थाना घोड़ासहन, जिला मोतिहारी (बिहार) को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से चोरी किए गए 20 मोबाइल बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गैंग में कुल नौ लोग शामिल हैं। चादर गैंग का सरगना मोतिहारी निवासी समीर उर्फ चेलवा है।
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वारदात का खुलासा करने वाली टीम को डीआईजी जगतराम जोशी ने पांच हजार और एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने 2500 का इनाम देने की घोषणा की है। खुलासा करने वाली टीम में कोतवाल कैलाश चंद्र भट्ट, एसएसआई भुवन चंद्र जोशी, एसएसआई अरविंद कुमार चौधरी, एसआई होशियार सिंह, सत्येंद्र बुटोला, विपिन चंद्र जोशी, सुधाकर जोशी, ललित मोहन रावल, योगेश कुमार, प्रकाश भगत, कुलदीप सिंह, भूपेंद्र, मोहम्मद नासिर, कुलदीप बिष्ट, संतोष रावत, भूपेंद्र आर्य शामिल थे। इधर, एसपी क्राइम प्रमोद कुमार और सीओ अमित कुमार ने बताया कि टीमें पूरे गैंग की गिरफ्तारी और मोबाइल बरामदगी के प्रयास में लगी हुई है। जल्द ही गैंग पुलिस की गिरफ्त में होगा।
ऐसे बुना था चोरी का तानाबाना
धींगरा मोबाइल टावर में चोरी से पहले गैंग लीडर समीर उर्फ चेलवा, रियाज और संतोष हल्द्वानी न्यायालय में तारीख पर आए थे। वापसी में रुद्रपुर बाजार में ढींगरा टावर में रेकी कर चोरी का प्लान बनाया। इसके बाद तीनों गुरुग्राम (हरियाणा) चले गए। वहां गिरोह के अन्य सदस्य किराये के कमरे में रह रहे थे। 23 अक्तूबर की शाम को सात बजे गैंग के सदस्यों ने आनंद विहार बस स्टेशन से बस पकड़ी और देर रात करीब दो बजे रुद्रपुर डीडी चौक पहुंचे।
इनका सरगना 4:45 बजे प्लान के मुताबिक धींगरा मोबाइल टावर में पहुंचा। लालबाबू ने चौकीदार को अपनी बातों में उलझा लिया। अजय और मुन्ना देवान ने दुकान के शटर के सामने पर्दा किया। समीर उर्फ चेलवा, सलमान उर्फ बेलवा व नसरुद्दीन ने शटर उठाकर संतोष और रियाज को दुकान के भीतर भेज दिया। टिमना देवान रोड पर निगरानी कर रहा था। करीब 20 मिनट बाद संतोष और रियाज मोबाइल और नकदी समेतटकर बाहर निकल आए। आरोपी चोरी के मोबाइल चार बैग में भरकर बस स्टैंड चले गए और वहां से बस में बैठकर मुरादाबाद पहुंचे। वहां से दूसरी बसों से दिल्ली गए। समीर उर्फ चेलवा और रियाज उर्फ रियाजुद्दीन दिल्ली से बस पकड़कर मोतिहारी चले गए। दोनों ने कुछ मोबाइल अपने गिरोह के सदस्यों के पास रख दिए।
गैंग ऐसे देता है वारदात को अंजाम
रुद्रपुर। बिहार के चादर गैंग में सात से 10 सदस्य होते हैं। गिरोह चोरी करने से पहले दो गुटों में बंट जाता है। यह पहले बड़े मोबाइल, घड़ी, कैमरा और ज्वेलरी के शोरूम को चिह्नत कर उसकी रेकी करते हैं। वहां से छोटी मोटी खरीदारी कर दुकान के अंदर का माहौल भांपते हैं। चोरी के समय गिरोह मोबाइल का प्रयोग नहीं करता है। बड़े शटर वाली दुकानें, जिनमें सेंटर लॉक नहीं होते उनको ही निशाना बनाते हैं। शटर तोड़ने के लिए लोहे की रॉड और हाइड्रोलिक जैक इस्तेमाल करते हैं।
गैंग के दो लोग सड़क पर निगाह रखते हैं। एक-दो सदस्य चौकीदार को बातों में उलझाते हैं। तीन-चार सदस्य शटर खींचते हैं और दो लोग चादर फैलाकर परदा करते हैं। गैंग सुबह 4:30 बजे से छह बजे के बीच चोरी करता है। चोरी के लिए सिर्फ 20 से 25 मिनट का समय लेते हैं। चोरी के बाद डिब्बे दुकान में ही छोड़ जाते हैं। मोबाइल पिट्ठू बैग में भरकर अलग-अलग रास्तों से पहले से तय स्थान पर पहुंचते हैं। गिरोह इतना शातिर है कि थाने चौकियों की गश्त की जानकारी भी रखते हैं।
नेपाल में बेच देते हैं चोरी का माल
रुद्रपुर। चादर गैंग चोरी का माल देश में नहीं बेचता है। गिरोह पूरा माल नेपाल में सप्लाई कर देता है। इसी कारण यहां की पुलिस उसे जल्दी ट्रेस भी नहीं कर पाती है। नेपाल में चोरी का सामान पकड़े जाने का खतरा भी कम रहता है। दूसरा देश होने के कारण पुलिस भी वहां जल्दी कार्रवाई नहीं कर पाती। ढींगरा मोबाइल टावर से चोरी मोबाइल को भी नेपाल में बेचा गया है। बता दें कि नेपाल की सीमा बिहार के मोतिहारी जिले से अधिक दूर नहीं है। इसी कारण गैंग का नेपाल के चोरी के माल खरीदने वालों से अच्छी जान पहचान भी है।
चोरी के लिए कोड वर्ड ईजाद किया
बिहार के चादर गैंग ने चोरी के कई कोड वर्ड ईजाद किए हैं। चोरी करने से पहले गैंग के सदस्यों को शब्दों को जानकारी दी जाती है। इनके कोड वर्ड में पुलिस को मास्टर जी, पुलिस के वाहन को चक्का, मोबाइल की दुकान में घुसने वाले सदस्य को प्लेयर, जिस दुकान को निशाना बनाया जाता है उसे मेला, मोबाइल को घंटी, लैपटॉप को किताब, घड़ी को बीट और चोरी का माल ले जाने वाले को गधा कहकर बुलाते हैं।
गिरोह के ये छह सदस्य हैं फरार
चादर गैंग में कुल नौ सदस्य शामिल हैं। इनका सरगना समीर उर्फ चेलवा, उसका भाई सलमान उर्फ बेलवा, रियाज उर्फ रियाजुद्दीन, नसरुद्दीन, अजय सुनार, संतोष उर्फ संतोष जायसवाल, निवासी वीरता चौक, थाना घोड़ासहन मोतिहारी (बिहार)।
गैंग पर दर्ज है 12 मुकदमे
चादर गैंग पर 12 मुकदमे दर्ज हैं। गैंग के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी, हरिद्वार, उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के मथुरा गेट कोतवाली, प्रयागराज उत्तर प्रदेश की सिविल लाइन कोतवाली, आगरा (यूपी) के सिकंदरा, राजस्थान की अलवर सदर कोतवाली, थाना मथुरा गेट भरतपुर राजस्थान, थाना रूपनगर दिल्ली, थाना जिगरा वाराणसी, थाना साक्षी जमशेदपुर झारखंड, कोतवाली पाछरा, बड़ोदरा, गुजरात और मध्य प्रदेश के कटनी में चोरी के मुकदमे दर्ज हैं। अभी पुलिस गैंग का आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही है।
गुरुग्राम में केबल ऑपरेटर बनकर घूमे पुलिस वाले
रुद्रपुर। चादर गैंग की तलाश आसान नहीं थी। यह गैंग वारदात के बाद तेजी से स्थान बदलता है। इसके साथ ही दूसरे शहर में भी वारदात को अंजाम दे देता है। गैंग के गुरुग्राम में होने का सुराग लगने के बाद रुद्रपुर पुलिस और एसओजी ने गुरुग्राम में डेरा डाल दिया था। पुलिस कर्मी शहर में वेश बदलकर घूमते रहे। एएसपी देवेंद्र पींचा ने बताया कि पुलिस के जवान गुरुग्राम में केबल ऑपरेटर का वेश बनाकर घर-घर घूमे। इसके बाद गैंग के तीन सदस्य पकड़ में आ सके।
गैंग को मिलती है एक हफ्ते की ट्रेनिंग, पुलिस को चाल से पहचान लेते हैं
रुद्रपुर। चादर गैंग के सदस्य बहुत शातिर हैं। गैंग के सदस्यों को चोरी से पहले सरगना समीर उर्फ चेलवा और सलमान उर्फ बेलवा एक सप्ताह की ट्रेनिंग देते थे। गिरोह के सदस्य पुलिस वालों को चाल से ही पहचान लेते हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस की चाल के अलावा उनके जूते और चाल से पहचान लेते हैं।
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सोमवार को एसपी सिटी देवेंद्र पींचा और एसपी क्राइम प्रमोद कुमार ने पुलिस कार्यालय में वारदात का खुलासा करते हुए बताया कि 24 अक्तूबर को अग्रसेन चौक स्थित ढींगरा मोबाइल टावर में बदमाशों ने अलग-अलग कंपनियों के करीब 150 मोबाइल चोरी कर लिए थे। चोरी गए मोबाइल की कीमत लाखों में थी। चोरों की तलाश में पुलिस व एसओजी की टीम दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार भेजी गई थी। खुलासे के लिए इन राज्यों की पुलिस की मदद से जब छानबीन की गई तो वारदात में बिहार के मोतिहारी जिले के चादर गैंग का नाम सामने आया।
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इसके बाद पुलिस की कई टीमों ने बिहार में डेरा डाल दिया था। सूचना पर एसओजी और पुलिस ने हरियाणा के सेक्टर 10 मार्केट एचडीएफसी के सामने नगर पालिका मैदान गुरुग्राम (हरियाणा) से मुन्ना देवान, मोहम्मद टिमना और लालबाबू गोसाईं निवासी वीरता चौक, थाना घोड़ासहन, जिला मोतिहारी (बिहार) को गिरफ्तार कर लिया। उनके कब्जे से चोरी किए गए 20 मोबाइल बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गैंग में कुल नौ लोग शामिल हैं। चादर गैंग का सरगना मोतिहारी निवासी समीर उर्फ चेलवा है।
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ऐसे बुना था चोरी का तानाबाना
धींगरा मोबाइल टावर में चोरी से पहले गैंग लीडर समीर उर्फ चेलवा, रियाज और संतोष हल्द्वानी न्यायालय में तारीख पर आए थे। वापसी में रुद्रपुर बाजार में ढींगरा टावर में रेकी कर चोरी का प्लान बनाया। इसके बाद तीनों गुरुग्राम (हरियाणा) चले गए। वहां गिरोह के अन्य सदस्य किराये के कमरे में रह रहे थे। 23 अक्तूबर की शाम को सात बजे गैंग के सदस्यों ने आनंद विहार बस स्टेशन से बस पकड़ी और देर रात करीब दो बजे रुद्रपुर डीडी चौक पहुंचे।
इनका सरगना 4:45 बजे प्लान के मुताबिक धींगरा मोबाइल टावर में पहुंचा। लालबाबू ने चौकीदार को अपनी बातों में उलझा लिया। अजय और मुन्ना देवान ने दुकान के शटर के सामने पर्दा किया। समीर उर्फ चेलवा, सलमान उर्फ बेलवा व नसरुद्दीन ने शटर उठाकर संतोष और रियाज को दुकान के भीतर भेज दिया। टिमना देवान रोड पर निगरानी कर रहा था। करीब 20 मिनट बाद संतोष और रियाज मोबाइल और नकदी समेतटकर बाहर निकल आए। आरोपी चोरी के मोबाइल चार बैग में भरकर बस स्टैंड चले गए और वहां से बस में बैठकर मुरादाबाद पहुंचे। वहां से दूसरी बसों से दिल्ली गए। समीर उर्फ चेलवा और रियाज उर्फ रियाजुद्दीन दिल्ली से बस पकड़कर मोतिहारी चले गए। दोनों ने कुछ मोबाइल अपने गिरोह के सदस्यों के पास रख दिए।
गैंग ऐसे देता है वारदात को अंजाम
रुद्रपुर। बिहार के चादर गैंग में सात से 10 सदस्य होते हैं। गिरोह चोरी करने से पहले दो गुटों में बंट जाता है। यह पहले बड़े मोबाइल, घड़ी, कैमरा और ज्वेलरी के शोरूम को चिह्नत कर उसकी रेकी करते हैं। वहां से छोटी मोटी खरीदारी कर दुकान के अंदर का माहौल भांपते हैं। चोरी के समय गिरोह मोबाइल का प्रयोग नहीं करता है। बड़े शटर वाली दुकानें, जिनमें सेंटर लॉक नहीं होते उनको ही निशाना बनाते हैं। शटर तोड़ने के लिए लोहे की रॉड और हाइड्रोलिक जैक इस्तेमाल करते हैं।
गैंग के दो लोग सड़क पर निगाह रखते हैं। एक-दो सदस्य चौकीदार को बातों में उलझाते हैं। तीन-चार सदस्य शटर खींचते हैं और दो लोग चादर फैलाकर परदा करते हैं। गैंग सुबह 4:30 बजे से छह बजे के बीच चोरी करता है। चोरी के लिए सिर्फ 20 से 25 मिनट का समय लेते हैं। चोरी के बाद डिब्बे दुकान में ही छोड़ जाते हैं। मोबाइल पिट्ठू बैग में भरकर अलग-अलग रास्तों से पहले से तय स्थान पर पहुंचते हैं। गिरोह इतना शातिर है कि थाने चौकियों की गश्त की जानकारी भी रखते हैं।
नेपाल में बेच देते हैं चोरी का माल
रुद्रपुर। चादर गैंग चोरी का माल देश में नहीं बेचता है। गिरोह पूरा माल नेपाल में सप्लाई कर देता है। इसी कारण यहां की पुलिस उसे जल्दी ट्रेस भी नहीं कर पाती है। नेपाल में चोरी का सामान पकड़े जाने का खतरा भी कम रहता है। दूसरा देश होने के कारण पुलिस भी वहां जल्दी कार्रवाई नहीं कर पाती। ढींगरा मोबाइल टावर से चोरी मोबाइल को भी नेपाल में बेचा गया है। बता दें कि नेपाल की सीमा बिहार के मोतिहारी जिले से अधिक दूर नहीं है। इसी कारण गैंग का नेपाल के चोरी के माल खरीदने वालों से अच्छी जान पहचान भी है।
चोरी के लिए कोड वर्ड ईजाद किया
बिहार के चादर गैंग ने चोरी के कई कोड वर्ड ईजाद किए हैं। चोरी करने से पहले गैंग के सदस्यों को शब्दों को जानकारी दी जाती है। इनके कोड वर्ड में पुलिस को मास्टर जी, पुलिस के वाहन को चक्का, मोबाइल की दुकान में घुसने वाले सदस्य को प्लेयर, जिस दुकान को निशाना बनाया जाता है उसे मेला, मोबाइल को घंटी, लैपटॉप को किताब, घड़ी को बीट और चोरी का माल ले जाने वाले को गधा कहकर बुलाते हैं।
गिरोह के ये छह सदस्य हैं फरार
चादर गैंग में कुल नौ सदस्य शामिल हैं। इनका सरगना समीर उर्फ चेलवा, उसका भाई सलमान उर्फ बेलवा, रियाज उर्फ रियाजुद्दीन, नसरुद्दीन, अजय सुनार, संतोष उर्फ संतोष जायसवाल, निवासी वीरता चौक, थाना घोड़ासहन मोतिहारी (बिहार)।
गैंग पर दर्ज है 12 मुकदमे
चादर गैंग पर 12 मुकदमे दर्ज हैं। गैंग के खिलाफ उत्तराखंड के हल्द्वानी, हरिद्वार, उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के मथुरा गेट कोतवाली, प्रयागराज उत्तर प्रदेश की सिविल लाइन कोतवाली, आगरा (यूपी) के सिकंदरा, राजस्थान की अलवर सदर कोतवाली, थाना मथुरा गेट भरतपुर राजस्थान, थाना रूपनगर दिल्ली, थाना जिगरा वाराणसी, थाना साक्षी जमशेदपुर झारखंड, कोतवाली पाछरा, बड़ोदरा, गुजरात और मध्य प्रदेश के कटनी में चोरी के मुकदमे दर्ज हैं। अभी पुलिस गैंग का आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही है।
गुरुग्राम में केबल ऑपरेटर बनकर घूमे पुलिस वाले
रुद्रपुर। चादर गैंग की तलाश आसान नहीं थी। यह गैंग वारदात के बाद तेजी से स्थान बदलता है। इसके साथ ही दूसरे शहर में भी वारदात को अंजाम दे देता है। गैंग के गुरुग्राम में होने का सुराग लगने के बाद रुद्रपुर पुलिस और एसओजी ने गुरुग्राम में डेरा डाल दिया था। पुलिस कर्मी शहर में वेश बदलकर घूमते रहे। एएसपी देवेंद्र पींचा ने बताया कि पुलिस के जवान गुरुग्राम में केबल ऑपरेटर का वेश बनाकर घर-घर घूमे। इसके बाद गैंग के तीन सदस्य पकड़ में आ सके।
गैंग को मिलती है एक हफ्ते की ट्रेनिंग, पुलिस को चाल से पहचान लेते हैं
रुद्रपुर। चादर गैंग के सदस्य बहुत शातिर हैं। गैंग के सदस्यों को चोरी से पहले सरगना समीर उर्फ चेलवा और सलमान उर्फ बेलवा एक सप्ताह की ट्रेनिंग देते थे। गिरोह के सदस्य पुलिस वालों को चाल से ही पहचान लेते हैं। बताया जा रहा है कि पुलिस की चाल के अलावा उनके जूते और चाल से पहचान लेते हैं।